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‘आप इंडियन हैं? तो निकल जाइए’! वियतनाम में भारतीयों के साथ हो रही है बदसलूकी, सामने आए चौंकाने वाले अनुभव

वियतनाम में भारतीय पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन कई टूरिस्ट्स ने खराब अनुभव शेयर किए हैं. कुछ भारतीयों ने लोकल दुकानदारों के रूखे व्यवहार, मोलभाव को लेकर विवाद और भेदभाव जैसे मामलों का दावा किया है. जानें क्या है पूरा मामला और क्यों बन रही है ऐसी स्थिति.

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भारतीयों की कुछ आदतों के कारण वियतनामी उनसे परेशान हो गए हैं. (Photo: ITG)
भारतीयों की कुछ आदतों के कारण वियतनामी उनसे परेशान हो गए हैं. (Photo: ITG)

भारतीय लोगों में विदेश घूमकर आने का ट्रेंड पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गया है. लोग दुबई से लेकर बाली तक के खूब ट्रिप्स लगा रहे हैं. इन जैसे देशों के साथ ही एक और देश है, जो इन दिनों भारतीय पर्यटकों के लिए एक बेहद पसंदीदा डेस्टिनेशन बन गया है. अब आप सोचेंगे कि ये आखिर है कौन सी जगह, तो दिमाग पर ज्यादा जोर ना डालें. हम बात कर रहे हैं वियतनाम की. वियतनाम ना केवल लोगों की पसंदीदा जगह बन गया है, बल्कि बहुत ही बजट-फ्रेंडली भी है. 

खूबसूरत नजारे, बीच, सस्ती ट्रिप और आसान फ्लाइट कनेक्टिविटी की वजह से हर साल बड़ी संख्या में भारतीय यहां घूमने पहुंच रहे हैं. लेकिन जहां एक तरफ वियतनाम का टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ भारतीय यात्रियों के अनुभव उतने अच्छे नहीं रहे. कई लोगों ने दावा किया कि वहां के कुछ लोकल लोगों और दुकानदारों ने उनके साथ रूखा, भेदभाव करने वाला और कभी-कभी अपमानजनक व्यवहार किया.

वियतनाम में भारतीय पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. अगर 2026 के पहले दो महीनों की ही बात करें तो जनवरी और फरवरी में करीब 1.58 लाख भारतीय वियतनाम घूमने जा चुके हैं, जो पिछले साल की तुलना में 71% ज्यादा है. वहीं 2024 में ये आंकड़ा 5 लाख के पार पहुंच गया थे, जो महामारी से पहले के मुकाबले करीब 297% ज्यादा है. ज्यादातर भारतीय वियतनाम के हनोई, हो ची मिन्ह सिटी, दा नांग और फु क्वोक जैसे शहर घूमना पसंद करते हैं. खासकर हनीमून, ग्रुप ट्रिप और डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए ये शहर लोगों के बीच काफी मशहूर हैं.

टूरिस्ट्स के साथ हुए खराब अनुभव
कई भारतीय टूरिस्ट्स ने अपने एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि उन्हें दुकानों और मार्केट में अजीब और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा. नोएडा में रहने वाली हिना ने बताया कि जब वो एक दुकान पर जूते देखने के लिए गईं तो दुकानदार ने उनसे पूछा कि क्या वो भारतीय हैं? जैसे ही उन्होंने हां कहा, दुकानदार ने उन्हें जूते दिखाने से साफ मना कर दिया और बाहर जाने को कह दिया.

दिल्ली की रिया अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताती हैं कि जब उन्होंने मोलभाव करने की कोशिश की, तो दुकानदार ने ट्रांसलेशन ऐप के जरिए उन्हें समय बर्बाद करने वाला कहकर भगा दिया. वहीं मेधा और उनकी दोस्तों के साथ तो मामला और भी खराब हो गया, जब एक दुकानदार ने उन्हें नजरअंदाज करने के बाद उनके पीछे आकर गाली-गलौज शुरू कर दी.

बिना वजह रूखा व्यवहार और डराने वाली घटनाएं
कुछ टूरिस्ट्स ने बताया कि बिना किसी वजह के भी उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया. प्राची नामक पत्रकार ने कहा कि एक सब्जी वाले ने उन्हें बिना किसी वजह के दुकान से बाहर जाने को कह दिया, जबकि दूसरी दुकान पर कीमत पूछने पर भी जवाब नहीं दिया गया. इतना ही नहीं, कुछ मामलों में दुकानदारों द्वारा पैसे छीनने या वॉलेट में झांकने की कोशिश भी सामने आई. ऐसे एक्सपीरियंस ने कई लोगों को बहुत अनसेफ महसूस कराया.

आखिर क्यों हो रहा है ऐसा?
अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा हो क्यों रहा है. कई भारतीय पर्यटकों का मानना है कि इस व्यवहार के पीछे कुछ हद तक उनकी अपनी आदतें भी हो सकती हैं. दिल्ली की अंजलि के मुताबिक, कुछ भारतीय बहुत ज्यादा मोलभाव करते हैं और कुछ मामलों में पुरुषों का व्यवहार भी ठीक नहीं होता, जिससे दुकानदार और लोकल लोगों के बीच एक नकारात्मक छवि बन जाती है.

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सोशल मीडिया पर भी इसी तरह की बातें सामने आईं, जहां कुछ लोगों ने लिखा कि भारतीय टूरिस्ट अक्सर बहुत कम कीमत ऑफर करते हैं और लंबे समय तक मोलभाव करते रहते हैं, जिससे दुकानदार परेशान हो जाते हैं.

कुछ यात्रियों ने माना कि भारतीयों की छवि पर भी असर पड़ा है. जैसे कुछ भारतीय फ्लाइट में बहस करते हैं, ज्यादा शोर करते हैं और कई बार तो गंदगी भी फैलाते हैं. एक महिला पर्यटक ने वॉटर पार्क का एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि कुछ भारतीय पुरुषों के व्यवहार से वो बहुत असहज हो गई थीं, क्योंकि वो उन्हें घूर रहे थे और जबरदस्ती बातचीत करने की कोशिश कर रहे थे.

लोकल दुकानदारों का पक्ष
कुछ वियतनामी दुकानदारों ने भी अपनी बात रखी. उनका कहना है कि भारतीय ग्राहक बहुत ज्यादा और लंबे समय तक मोलभाव करते हैं, जिससे उनका समय खराब होता है और दूसरे ग्राहकों को संभालना मुश्किल हो जाता है. एक दुकानदार ने अपना एक्सपीरियंस शेयर  करते हुए बताया कि एक ग्राहक ने कॉफी की कीमत 270,000 डोंग से घटाकर 110,000 करने की कोशिश की और काफी देर तक बहस करता रहा, जिसके बाद उसने थककर कम कीमत पर सामान बेच दिया.

हालांकि, सभी लोकल लोगों का व्यवहार भारतीयों के प्रति ऐसा नहीं है. कुछ दुकानदारों ने कहा कि वे भारतीय पर्यटकों का स्वागत करते हैं और उनके आने से खुश हैं. कई लोग तो हिंदी के शब्द जैसे 'नमस्ते' और 'चलो-चलो' भी सीख रहे हैं ताकि भारतीय ग्राहकों को अट्रैक्ट कर सकें.

टूर गाइड और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस बारे में जब टूर गाइड और अधिकारियों से पूछा गया तो एक लोकल टूर गाइड ने कहा कि इस तरह का व्यवहार बिल्कुल गलत है और इसकी शिकायत की जा सकती थी. उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे मामले कुछ ही लोगों तक सीमित हैं और हर जगह ऐसे लोग मिल जाते हैं. हालांकि, अभी इस मुद्दे पर वियतनाम एम्बेसी ने किसी भी तरह का कोई बयान नहीं दिया है. उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है.

फिर भी क्यों खास है वियतनाम?
इन घटनाओं के बावजूद वियतनाम अपनी खूबसूरती, सांस्कृतिक विरासत और शानदार फूड-कल्चर की वजह से दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है. हॉलोंग बे के नजारे, होई एन की रोशनी से सजी गलियां और अलग-अलग तरह की कॉफी जैसे एग कॉफी, कोकोनट कॉफी और साल्ट कॉफी यहां का खास अट्रैक्शन हैं.

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इस पूरी स्थिति को समझने के बाद यही समझ आता है कि दोनों तरफ से समझदारी जरूरी है. भारतीय पर्यटकों को लोकल संस्कृति और व्यवहार का सम्मान करना चाहिए, वहीं वियतनामी लोगों को भी मेहमानों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए. अगर दोनों तरफ से संतुलन बना रहे, तो ट्रैवल एक्सपीरियंस और भी बढ़िया हो सकता है.

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