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देहरादून का रहस्यमय ट्रैवल स्पॉट, गुफा में छुपी है महाभारत के अश्वत्थामा की कहानी!

देहरादून में स्थित टपकेश्वर महादेव मंदिर एक ऐसा ट्रैवल स्पॉट है, जहां लोग सुकून और अलग तरह का अनुभव लेने के लिए आते हैं. आसपास की प्राकृतिक सुंदरता और नदी-झरनों का माहौल इसे और भी आकर्षक बनाता है.

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टपकेश्वर मंदिर (Photo: ITG)
टपकेश्वर मंदिर (Photo: ITG)

अगर आप पहाड़ों की ठंडी हवा, हरियाली और किसी अलग तरह के ट्रैवल एक्सपीरियंस की तलाश में हैं, तो देहरादून आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकता है. यहां सिर्फ खूबसूरत नजारे ही नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ी ऐसी जगह भी हैं जो आपके सफर को ओर यादगार बना सकती है. इन्हीं में से एक जगह है टपकेश्वर महादेव मंदिर. उत्तराखंड की 'देवभूमि' में स्थित यह प्रसिद्ध शिव मंदिर अपनी विशेषता के कारण खास पहचान रखता है.

यह एक ऐसा मंदिर है, जो प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है. जो अपनी अनोखी बनावट के कारण टूरिस्ट और श्रद्धालुओं का अपनी ओर ध्यान खींचता है. गुफा की छत से शिवलिंग पर लगातार टपकती पानी की बूंदें इस जगह को और खास बनाती हैं. जिसके कारण यह एक बेहतरीन ट्रैवल स्पॉट भी माना जाता है. हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं, क्योंकि यहां आस्था के साथ-साथ प्रकृति का अद्भुत मेल देखने को मिलता है

मंदिर का नाम टपकेश्वर कैसे पड़ा?

इस मंदिर का नाम उसकी सबसे बड़ी खासियत से जुड़ा है. गुफा की छत से हर वक्त गिरती पानी की बूंदें सीधे शिवलिंग पर पड़ती हैं, जिससे इसका नाम टपकेश्वर पड़ा. माना जाता है कि यह प्रक्रिया सदियों से जारी है, जो इसे और भी चमत्कारी और विशेष बनाती है.

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टपकेश्वर महादेव मंदिर, देहरादून

महाभारत काल से जुड़ी कहानी

टपकेश्वर मंदिर के पंडित विजय कुमार जायसवाल ने Aajtak.in से बात करते हुए बताया कि, 'यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है. दरअसल, यहां प्राचीन काल से ही गौरी-शंकर और गणेश जी की मान्यता जुड़ी हुई है. कहा जाता है कि आदिकाल में यहां गुरु द्रोणाचार्य ने पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. तब पुत्र अश्वत्थामा का जन्म हुआ था. उनके अनुरोध पर भगवान शिव जी इस गुफा में लिंग के रूप में स्थापित हुए थे. अश्वत्थामा की मां उनको दूध पिलाने में असमर्थ थीं, तब 4 वर्ष के अश्वत्थामा ने भगवान शिव की तपस्या की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने गुफा की छत से दूध की धारा प्रवाहित की, जो समय के साथ पानी में बदल गई और आज भी स्वयंभू शिवलिंग पर टपकती रहती है. यहां भगवान शिव को केशव महादेव और दूधेश्वर महादेव के नाम से पूजा जाता है और यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है.'

महादेव का मंदिर, देहरादून

गुफा में स्थित अद्भुत शिवलिंग

इस मंदिर का शिवलिंग किसी गर्भगृह में नहीं, बल्कि प्राकृतिक गुफा में स्थित है. मान्यताओं के अनुसार, यहां दो शिवलिंग मौजूद हैं. गुफा के अंदर का शांत वातावरण, हल्की रोशनी और ठंडी हवा मिलकर एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं, जहां पहुंचकर मन स्वतः ही शांत हो जाता है. शिवलिंग पर गिरती पानी की बूंदें इस मंदिर की सबसे बड़ी रहस्यमयी बात हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह पानी चट्टानों के बीच से रिसकर आता है और गुफा की प्राकृतिक बनावट के कारण बूंदों के रूप में गिरता है. वहीं धार्मिक मान्यता इसे भगवान शिव का चमत्कार मानती है. यही कारण है कि यह स्थान आस्था और विज्ञान दोनों का अद्भुत संगम बन गया है.

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इस प्राचीन मंदिर के प्रांगण में शिवजी के अलावा माता पार्वती, गणेशजी, माता वैष्णो देवी (कृत्रिम गुफा में) और गुरु द्रोणाचार्य से संबंधित मंदिर/स्थान स्थित हैं.

प्राकृतिक सौंदर्य और स्थान

यह मंदिर देहरादून शहर से लगभग 6-7 किमी. दूर टोंस नदी (तमसा नदी) के किनारे स्थित है. इसके आसपास हरियाली, पहाड़, छोटे झरने और शांत नदी का बहाव इस जगह को बेहद खूबसूरत बना देते हैं. यही वजह है कि यह स्थान सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि एक शानदार प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट भी माना जाता है.

टपकेश्वर मंदिर के बाहर बहती नदी, देहरादून

यहां का अनुभव कैसा होता है?

मंदिर में प्रवेश करते ही एक अलग ही माहौल महसूस होता है. गुफा के अंदर हल्की रोशनी, ठंडी हवा, पानी की बूंदों की आवाज और भक्तों का 'हर हर महादेव' का जयघोष मिलकर ऐसा अनुभव देते हैं, जिसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना मुश्किल है. यह जगह मन को शांति और सुकून से भर देती है.

महाशिवरात्रि और सावन का महत्व

पंडित विजय कुमार जायसवाल ने आगे बताया कि, ' महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर को फूलों व रोशनी से सजाया जाता है. वहीं सावन के महीने में भी यहां विशेष भीड़ रहती है, जब कांवड़िए जल चढ़ाने आते हैं और मंदिर लगभग पूरे दिन खुला रहता है. इन दोनों अवसरों पर यहां का धार्मिक माहौल और ऊर्जा देखने लायक होती है.

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कैसे पहुंचे और कब जाएं?

टपकेश्वर मंदिर तक पहुंचना काफी आसान है. यह देहरादून रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर दूर है, जहां टैक्सी, ऑटो या बस के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है. थोड़ा सा पैदल रास्ता भी तय करना पड़ता है. यहां घूमने के लिए फरवरी से जून तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है, जबकि सावन और महाशिवरात्रि पर यहां आध्यात्मिक अनुभव अपने चरम पर होता है. मानसून में पानी का स्तर बढ़ सकता है, इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है.

आसपास घूमने की जगहें

टपकेश्वर मंदिर के आसपास कई आकर्षक जगहें भी हैं, जैसे रॉबर्स केव (गुच्चू पानी) और सहस्त्रधारा. इन सभी स्थानों को मिलाकर एक बेहतरीन डे ट्रिप प्लान किया जा सकता है.

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