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माघ मेला 2026: संगम की रेती पर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए पुख्ता इंतजाम, व्हीलचेयर से ई-रिक्शा तक की सुविधाओं का ऐसे उठाएं लाभ

माघ मेला 2026 में संगम क्षेत्र तक पहुंच और आवाजाही को लेकर बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए कई स्तरों पर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. श्रद्धालु इन सुविधाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं? इससे जुड़ी पूरी जानकारी यहां जानिए...

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माघ मेले में  बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए पुख्ता इंतजाम (Photo: PTI)
माघ मेले में बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए पुख्ता इंतजाम (Photo: PTI)

संगम की पावन रेती पर माघ मेले का आध्यात्मिक वैभव अपने पूरे शबाब पर है. 3 जनवरी से आस्था के इस महाकुंभ की शुरुआत हो चुकी है और 15 फरवरी तक चलने वाले इस उत्सव में देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाने पहुंच रहे हैं. वैसे तो माघ मेले की यात्रा हर किसी के लिए चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए रेतीली जमीन पर मील पैदल चलना किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं होता. श्रद्धालुओं की इसी परेशानी को समझते हुए प्रयागराज मेला प्रशासन ने पुख्ता और संवेदनशील इंतजाम किए हैं, ताकि हर उम्र और हर स्थिति का व्यक्ति आसानी से त्रिवेणी तट तक पहुंच सके. तो चलिए जानते हैं कि प्रशासन ने बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए संगम तट पर क्या-क्या खास व्यवस्थाएं की हैं और श्रद्धालु इन सुविधाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं.

संगम की रेती पर अब नहीं थकेंगे 'श्रद्धा के पांव'

मेला क्षेत्र के विशाल विस्तार को देखते हुए प्रशासन ने परिवहन की ऐसी व्यवस्था की है कि अब किसी के कदम नहीं थकेंगे. संगम के रास्तों पर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए मुफ्त ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहन निरंतर दौड़ रहे हैं. ये वाहन न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि रेतीले रास्तों पर भी बहुत सुगमता से चलते हैं. इसके साथ ही, बड़े हनुमान मंदिर और अक्षय वट जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों तक जाने के लिए विशेष इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट सेवा भी उपलब्ध कराई गई है. यह सेवा उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिन्हें चलने-फिरने में अधिक कठिनाई होती है. शहर के अलग-अलग हिस्सों से मेले के करीब तक पहुंचने के लिए वातानुकूलित शटल ई-बसें भी चलाई जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं का सफर काफी आरामदायक हो गया है. 

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रेलवे स्टेशन से घाटों तक चप्पे-चप्पे पर तैनात 'सारथी'

प्रशासन की यह सजगता केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे स्टेशनों पर भी वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए विशेष मदद का जाल बिछाया गया है. स्टेशन पर उतरते ही यात्रियों को हेल्प डेस्क, व्हीलचेयर और बैटरी चालित वाहन तैयार मिलेंगे, जो उन्हें सुरक्षित तरीके से स्टेशन परिसर से बाहर लाने में मदद करेंगे. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि ट्रेन से उतरने के बाद श्रद्धालु खुद को असहाय महसूस न करें. प्रशासन की कोशिश है कि स्टेशन से लेकर संगम की रेती तक, बुजुर्गों को हर मोड़ पर एक 'सारथी' के रूप में सरकारी सहायता उपलब्ध मिले.

आस्था के साथ सेहत की भी सुरक्षा, अस्पताल से एम्बुलेंस तक तैयार

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इस बार मेले में किसी बड़े अस्पताल जैसी सुविधाएं दी गई हैं. मेला क्षेत्र में 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ 20-20 बेड के अस्थायी अस्पताल और कई मेडिकल पोस्ट बनाए गए हैं. किसी भी आपात स्थिति के लिए एम्बुलेंस की चौबीस घंटे मौजूदगी सुनिश्चित की गई है. इसके अलावा, दिव्यांगजनों की विशेष जरूरतों का ख्याल रखते हुए उन्हें निःशुल्क कृत्रिम अंग और अन्य सहायक उपकरण प्रदान करने की भी व्यवस्था की गई है. यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि यदि किसी श्रद्धालु की तबीयत अचानक खराब होती है, तो उसे मेला क्षेत्र के भीतर ही तुरंत इलाज मिल सके.

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सुखद यात्रा के लिए इन जरूरी बातों का रखें ख्याल

इन सुविधाओं का सही तरीके से लाभ उठाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. यदि आप किसी निजी कैंप में ठहर रहे हैं, तो आयोजकों को अपनी जरूरतों के बारे में पहले ही बता दें ताकि वे प्रशासन के साथ मिलकर उचित व्यवस्था कर सकें. सटीक जानकारी और लोकेशन के लिए श्रद्धालु 'मेला सेवा ऐप' या आधिकारिक वेबसाइट (Utsav.gov.in) का सहारा ले सकते हैं. प्रशासन की सलाह है कि बुजुर्ग और दिव्यांगजन भीड़भाड़ वाले मुख्य स्नान पर्वों के बजाय सामान्य दिनों में या कम भीड़ वाले समय में स्नान की योजना बनाएं. इन छोटी सावधानियों और सरकार द्वारा दी गई सुविधाओं के साथ संगम की यह यात्रा अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुखद बन गई है.

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