अगर दिल कह रहा है कहीं दूर निकल चलें, जहां पहाड़ हों, पानी हो, रंगीन गलियां हों और माहौल बिल्कुल विदेश जैसा लगे, तो इसके लिए पासपोर्ट-वीजा की जरूरत नहीं है. महाराष्ट्र में पुणे के पास एक ऐसी जगह है, जहां कदम रखते ही लगता है जैसे भारत में नहीं, बल्कि यूरोप के किसी खूबसूरत शहर में पहुंच गए हों. सह्याद्री की पहाड़ियों के बीच बसा लावासा आज उन लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, जो कम बजट में विदेशी वाइब्स चाहते हैं. झील के किनारे बनी रंगीन इमारतें, साफ-सुथरी सड़कें और शांत माहौल इसे बाकी हिल स्टेशनों से बिल्कुल अलग बनाते हैं.
आखिर क्यों इसे कहा जाता है 'भारत का इटली'?
लावासा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कोई इत्तेफाक से बसा पहाड़ी इलाका नहीं, बल्कि एक बेहद खास विजन के साथ संवारा गया शहर है. इसे इटली के विश्व प्रसिद्ध और बेहद खूबसूरत शहर 'पोर्टोफिनो' (Portofino) की तर्ज पर बड़ी बारीकी से डिजाइन किया गया है. जैसे ही आप यहां की सड़कों पर कदम रखते हैं, झील के किनारे कतार में खड़ीं चटक और चमकीले रंगों वाली इमारतें और पत्थरों से बने ऊबड़-खाबड़ कोबलस्टोन रास्ते आपको सीधे यूरोप की सैर पर ले जाते हैं. वारसगांव झील के शांत नीले पानी और इन रंग-बिरंगी बिल्डिंग्स का मेल आपको भूमध्यसागरीय शैली के करीब होने का अहसास कराता है. यहां की आधुनिक टाउन प्लानिंग और सह्याद्री की कुदरती हरियाली का ऐसा तालमेल भारत में शायद ही कहीं और देखने को मिले. यही वजह है कि बिना सात समंदर पार किए इटली का अनुभव चाहने वाले मुसाफिरों के लिए लावासा आज पहली पसंद बन चुका है.
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रोमांच और सुकून का बेहतरीन ठिकाना
लावासा में करने के लिए इतना कुछ है कि आपका एक दिन कम पड़ सकता है. यहां का सबसे बड़ा आकर्षण झील किनारे बना प्रोमेनेड यानी सैरगाह है. शाम के वक्त यहां टहलना या साइकिल चलाना आपको किसी विदेशी फिल्म के सीन जैसा महसूस कराएगा. अगर आप एडवेंचर के शौकीन हैं, तो वारसगांव झील में जेट स्कीइंग और कयाकिंग का मजा ले सकते हैं, या फिर आसपास की पहाड़ियों पर ट्रेकिंग के लिए निकल सकते हैं. इतना ही नहीं, यहां के कैफे और रेस्तरां में बैठकर आप दुनिया भर के व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं. झील किनारे बैठकर एक कप कॉफी पीना और डूबते सूरज को देखना, एक ऐसा अनुभव है जिसे आप उम्र भर नहीं भूलेंगे. यहां के लग्जरी रिसॉर्ट्स इस सुकून को और बढ़ा देते हैं, जहां आप अपनी बालकनी से पहाड़ियों और झील का नजारा ले सकते हैं.
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कब और कैसे पहुंचें इस जादुई शहर में?
लावासा जाने का सबसे बेहतरीन समय अक्टूबर से मार्च तक का होता है, क्योंकि इस दौरान मौसम बहुत सुहावना रहता है. हालांकि, जो लोग हरियाली और धुंध के दीवाने हैं, उनके लिए मानसून (जून से सितंबर) किसी जन्नत से कम नहीं होता. पुणे से लगभग 60 किलोमीटर और मुंबई से करीब 190 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस हिल स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे उत्तम है. यहां घुमावदार रास्तों और सह्याद्री के शानदार नजारों के बीच ड्राइविंग का अपना ही एक अलग मजा है. अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पुणे तक ट्रेन या फ्लाइट से आकर वहां से टैक्सी या बस ले सकते हैं. ऐसे में यदि आप भी शहर के शोर-शराबे से दूर किसी ऐसी जन्नत की तलाश में हैं, जहां विदेशी नजारे और देसी सुकून का संगम मिले, तो लावासा की ये वादियां आपका स्वागत करने के लिए तैयार हैं.