
Chaurasi Kutiya: ऋषिकेश को योग नगरी कहा जाता है, जहां गंगा नदी के किनारे बसे कई आश्रम, मंदिर और टूरिस्ट स्पॉट लोगों को सुकून का अनुभव कराते हैं. लक्ष्मण झूला, त्रिवेणी घाट और पहाड़ों के बीच छिपी शांत जगहों के बीच एक ऐसी ही खास जगह है चौरासी कुटिया, जिसे 'बीटल्स आश्रम' के नाम से भी जाना जाता है. यह स्थान ध्यान और साधना के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है. लेकिन, चौरासी कुटिया का यह स्थान अपने अनोखे इतिहास और विदेशी कनेक्शन के कारण भी ऋषिकेश के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो चुका है.
कैसे इसका नाम पड़ा चौरासी कुटिया?
ऋषिकेश की पहाड़ियों में बसे इस आश्रम की स्थापना 1960 के दशक में महर्षि महेश योगी ने की थी. वे ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन (TM) तकनीक के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध थे. उनका मानना था कि ध्यान के जरिए व्यक्ति अपने मन को शांत कर सकता है और जीवन में संतुलन ला सकता है. इसी उद्देश्य से उन्होंने ऋषिकेश में इस आश्रम को बनाया, जहां भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग ध्यान और साधना सीखने आते थे. इस आश्रम का नाम चौरासी कुटिया था.
चौरासी कुटिया इस जगह का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यहां कुल 84 छोटी-छोटी ध्यान कुटियाएं बनाई गई थीं. इस आश्रम में कई इमारतें हैं, जिनमें एक पुराना रसोईघर, मंदिर, कुछ आवासीय भवन, पुस्तकालय, एक पुराना डाकघर, महर्षि का निवास स्थान शामिल है. इन कुटियाओं का डिजाइन बेहद खास था, जिससे किसी भी व्यक्ति को एकांत और शांति मिल सके. हर कुटिया इस तरह बनाई गई थी कि बाहरी शोर कम से कम सुनाई दे और ध्यान में पूरी एकाग्रता बनी रहे. यही वजह थी कि यह जगह साधना के लिए आदर्श मानी जाती थी.

जब बीटल्स बैंड पहुंचा था चौरासी कुटिया
इस आश्रम को खास पहचान साल 1968 में मिली, जब दुनिया का मशहूर बैंड 'द बीटल्स' यहां पहुंचा. बैंड के सदस्य पॉल मैककार्टनी, जॉन लेनन, जॉर्ज हैरिसन और रिंगो स्टार ध्यान और आत्मिक शांति की तलाश में यहां आए थे. उस समय पश्चिमी देशों में भारतीय योग और ध्यान को लेकर काफी उत्सुकता थी, इसी वजह से वो लोग यहां आए थे. कहा जाता है कि उन्होंने यहां रहते हुए कई गाने लिखे, जो बाद में उनकी मशहूर 'व्हाइट एल्बम' का हिस्सा भी बने. इसके बाद ऋषिकेश और यह आश्रम दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया.

2015 के बाद फिर खुला ये स्थल
स्थानीय लोगों की मानें तो कुछ समय बाद परिस्थितियां बदलने लगीं और महर्षि महेश योगी इस आश्रम को छोड़कर कहीं और चले गए थे. इसके बाद यहां की गतिविधियां कम होती गईं. सन् 1980 में यह जगह लगभग पूरी तरह से बंद हो गई और धीरे धीरे खंडहर में बदलने लगी. कई सालों तक यह जगह वीरान रही. करीब 30 साल तक बंद रहने के बाद साल 2015 में इस आश्रम को फिर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया. इसके बाद यह जगह ऋषिकेश की एक प्रमुख और फेवरेट टूरिस्ट स्पॉट बन गई. आज यहां देश-विदेश से हजारों लोग हर साल घूमने आते हैं. यहां आने वाले लोग न सिर्फ इसके इतिहास को महसूस करते हैं, बल्कि प्रकृति और शांति का भी मजा लेते हैं.

आज देखने में कैसी लगती है चौरासी कुटिया?
आज चौरासी कुटिया में आपको पुरानी ध्यान कुटियाएं, मेडिटेशन हॉल और दीवारों पर बनी आकर्षक ग्रैफिटी (भित्तिचित्र कला) देखने को मिलेंगी. इन ग्रैफिटी में बीटल्स और अध्यात्म से जुड़ी कई खूबसूरत तस्वीरें बनी हुई है, जो इस जगह ओर भी खास बनाती हैं. यहां का माहौल आज भी शांत और सुकून देने वाला लगता है. घने जंगलों के बीच यह वीरान जगह लोगों को शहर की भागदौड़ से दूर ले जाकर कुछ समय के लिए मानसिक शांति देती है.
ऋषिकेश में घूमने के लिए ये जगह
ऋषिकेश में चौरासी कुटिया के अलावा कई ऐसी जगह हैं, जहां आप नेचर और एडवेंचर का मजा ले सकते हैं. जिनमें लक्ष्मण झूला, राम झूला, त्रिवेणी घाट, नीलकंठ महादेव मंदिर, परमार्थ निकेतन आश्रम, शिवपुरी और राजाजी नेशनल पार्क शामिल हैं.
कैसे पहुंचे चौरासी कुटिया?
सड़क मार्ग से- राम झूला से लगभग 3 किमी. दूर स्थित, ऑटो या टैक्सी से पहुंचा जा सकता है. यह जगह राम झूला से पैदल दूरी पर स्थित है. आप यहां गाड़ी से भी आ सकते हैं.
ट्रेन से- सबसे पहले ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पहुंचे और उसके बाद रिक्शा या पब्लिक ट्रांसपोर्ट लें.