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न कचरा, न सिगरेट, न तंबाकू… ओडिशा का ये आदिवासी गांव साफ-सफाई से बना टूरिस्ट हॉटस्पॉट

ओडिशा का एक छोटा सा गांव आज अपने साफ-सफाई के अनोखे नियमों के कारण चर्चा में है. यहां प्लास्टिक, गंदगी और धूम्रपान पर पूरी तरह रोक है. आइए जानते हैं इस खास गांव के बारे में, जिसको लोग भी दूर दूर से देखने आते हैं.

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यहां सफाई सिर्फ काम नहीं, लोगों की आदत है (Photo: thebetterindia/instagram)
यहां सफाई सिर्फ काम नहीं, लोगों की आदत है (Photo: thebetterindia/instagram)

Babojola Village: भारत में ऐसे कई शहर व गांव हैं, जो अपनी स्वच्छता को लेकर दूसरों के लिए मिसाल बनने के साथ-साथ पर्यटन का आकर्षण भी बनते जा रहे हैं. उसी में सबसे आगे ओडिशा के बाबोजोला गांव का नाम आता है. दरअसल, ओडिशा के बाबोजोला गांव के लोगों ने साफ-सफाई को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना लिया है. यहां सफाई कोई मजबूरी नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है. सफाई को लेकर इस गांव के नियम काफी अलग हैं. यहां प्लास्टिक पूरी तरह बैन है. कोई भी व्यक्ति सिगरेट या बीड़ी नहीं पीता है. यहां थूकना, गुटखा या तंबाकू खाना भी सख्त मना है. गांव में गंदगी फैलाने वाली हर चीज पर रोक है.

गांव की महिलाएं सफाई में अहम भूमिका निभाती हैं. वे रोज तीन बार पूरे गांव में झाड़ू लगाती हैं और कचरे को इकट्ठा करके डस्टबिन में डालती हैं. इसके बाद गांव के युवा अगले दिन उस कचरे को हटा देते हैं. अगर आप इस गांव में घूमने जाएंगे तो आपको कहीं भी प्लास्टिक या गंदगी नहीं दिखेगी. चारों तरफ साफ-सुथरा माहौल और साफ-सफाई नजर आएगी. जगह-जगह 'नो स्मोकिंग' के बोर्ड लगे हुए हैं, ताकि लोग नियमों का पालन करें और अपनी सेहत व हेल्थ का भी ध्यान रखें.

साफ-सफाई की मिसाल है ओडिशा का यह गांव

जानकारी के मुताबिक, बाबोजोला गांव में सफाई अभियान की शुरुआत करीब 15 साल पहले एक स्थानीय शिक्षक मधुसूदन मरांडी ने की थी. उनका सपना था कि बाबोजोला गांव को एक जाना माना गांव बनाया जाए. उनकी इस सोच को गांव के लोगों ने सिर्फ बात नहीं रहने दिया, बल्कि इस बात को अपनी जिम्मेदारी मान लिया. जिसके बाद गांव के सभी लोगों ने मिलकर एक क्लब बनाया, जो गांव की साफ-सफाई का ध्यान रखे. यह क्लब पूरे गांव से पैसे इकट्ठा करता है, ताकि गांव में जरूरी चीजें लगाई जा सकें जैसे सीसीटीवी कैमरे, डस्टबिन और सोलर पैनल आदि. इस तरह पूरे गांव ने मिलकर इसे एक मिशन की तरह अपनाया, जिसे लोग आजतक फॉलो कर रहे हैं. 

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प्राकृतिक चीजों से बने हैं घर

इस वक्त बाबोजोला गांव में करीब 70 संथाल परिवार रहते हैं. इन सभी परिवारों के घर कच्चे चीजों के बने हुए हैं और पूरी तरह प्रकृति से जुड़े हुए हैं. इस गांव की एक खास बात यह है कि यहां के घरों की दीवारें बहुत सुंदर तरीके से सजी हुई हैं. गांव की महिलाएं दीवारों पर फूल-पत्तियों, जानवरों और पारंपरिक डिजाइनों की पेंटिंग बनाती हैं. इस कला को स्थानीय भाषा में 'भित पोताव' कहा जाता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन पेंटिंग्स में इस्तेमाल होने वाले रंग भी पूरी तरह प्राकृतिक होते हैं. ये रंग नदी की मिट्टी, पत्थरों, पेड़ों की छाल और फूलों से बनाए जाते हैं. जिससे इस गांव के घर और भी खूबसूरत-प्राकृतिक लगते हैं. 

वहां के स्थानीय लोगों के मुताबिक, फरवरी महीने में जब पतापरब त्योहार होता है तो बाबोजोला गांव के लोग अपने घरों को फिर से रंगते-सजाते हैं. इस त्योहार के मौके पर गांव में गाना-बजाना और लोक नृत्य होता है, जिसमें साफ-सफाई का संदेश भी दिया जाता है. गांव में जगह-जगह सी.सी.टीवी कैमरे लगे हैं, ताकि आने वाले लोग या पर्यटक गंदगी न फैलाएं. अगर कोई कचरा फैलाता हुआ पकड़ा जाता है, तो उसे खुद सफाई करनी पड़ती है या फिर जुर्माना देना होता है.

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कैसे पहुंचे ओडिशा के बाबोजोला गांव?

हवाई मार्ग- अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं तो सबसे दिल्ली हवाई अड्डे से भुवनेश्वर हवाई अड्डा पहुंचें. उसके बाद भुवनेश्वर हवाई अड्डे से मयूरभंज जाने के लिए टैक्सी या बस लें. उसके बाद बाबोजोला गांव जाने के लिए वहां के लोकल ट्रांसपोर्ट लें. 

ट्रेन मार्ग- बाबोजोला गांव जाने के लिए ओडिशा के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बारिपदा रेलवे स्टेशन और बालासोर रेलवे स्टेशन हैं. यहां से आप बस, शेयर कैब या जीप लेकर गांव तक पहुंच सकते हैं.

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