हवाई यात्रा ट्रांसपोर्ट का सबसे तेज तरीका है जो हमें कुछ ही घंटों में एक देश से दूसरे देश पहुंचा देती है. लेकिन क्या आपने कभी हवाई यात्रा के दौरान खिड़की के पास बैठकर सोचा है कि अभी प्लेन स्पीड कितनी होगी या वो कितनी रफ्तार से रनवे पर दौड़ रहा है. वास्तव में अंदर बैठे हुए व्यक्ति को तो स्पीड तेज लगती है लेकिन टेक-ऑफ (उड़ान भरने) और लैंडिंग (उतरने) की स्पीड के पीछे की साइंस काफी दिलचस्प है.
हवाई जहाज कितनी तेज चलते हैं?
हर उड़ान अलग होती है और इसकी स्पीड कई कारकों पर निर्भर करती है. जैसे विमान का आकार, उसका वजन (यात्रियों और सामान सहित), मौसम, तापमान, ऊंचाई और बहुत कुछ. इसलिए इसे एक निश्चित संख्या के बजाय स्पीड की एक रेंज के रूप में समझा सकता है.
लागू होता है ये गणित
उड़ान भरने से पहले विमान गेट से रनवे तक लगभग 30-35 किमी/घंटा की स्पीड से चलता है. शुरुआत में विमान धीरे चलता है ताकि किसी भी आपात स्थिति में इसे तुरंत रोका जा सके या सुरक्षित रूप से मोड़ा जा सके. जब विमान आखिरकार उड़ान भर लेता है तो कमर्शियल विमानों की स्पीड 220 से 285 किमी/घंटा और छोटे विमानों की 90 से 100 किमी/घंटा के बीच होती है.
अगर आप सोच रहे हैं कि विमान को उड़ान भरने के लिए इतनी स्पीड की जरूरत क्यों होती है तो इसका कारण यह है कि यही स्पीड पंखों के ऊपर से हवा का बहाव बनाती है जो विमान को ऊपर की ओर धकेलता है.
क्रूजिंग और लैंडिंग की स्पीड
एक बार जब आप आराम से हवा में होते हैं तब विमान अपनी सबसे तेज स्पीड पकड़ता है. इसे क्रूजिंग कहा जाता है. इस समय विमान की स्पीड 830-900 किमी/घंटा होती है. यानी यह हर मिनट लगभग 14 किमी की दूरी तय करता है. अगर आपकी कार इतनी तेज चल पाती तो आप दिल्ली से वाराणसी (820 किमी) की दूरी मात्र एक घंटे में तय कर लेते.
विमान के टाइप का भी होता है अहम किरदार
लैंडिंग की बात करें तो रुकने से पहले विमान की स्पीड कम हो जाती है लेकिन उतनी कम नहीं जितना आप सोचते होंगे. एक कमर्शियल विमान 240-290 किमी/घंटा की स्पीड से लैंड करता है. छोटे विमान लैंडिंग के दौरान लगभग 80-90 किमी/घंटा की स्पीड से उड़ते हैं.
आप यह सोंचेगे कि टेक ऑफ की तुलना में यह काफी कम होगी लेकिन चूंकि विमान पहले से ही हवा में होता है इसलिए स्थिर रहने के लिए उसे स्पीड की जरूरत होती है. वास्तव में अगर स्पीड बहुत कम हो जाए तो ये खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि पायलट सुरक्षित और सॉफ्ट लैंड नहीं कर पाएंगे.
कुल मिलाकर विमान धीरे चलना शुरू होते हैं. स्पीड के साथ उड़ान भरते हैं और फिर अपनी पूरी क्षमता से हवा में सफर करते हैं. साथ ही रुकने से पहले धीमी स्पीड से जमीन पर उतरते हैं.