टुंडे कबाब (Tunday Kabab) भारत के सबसे प्रसिद्ध कबाबों में से एक है. यह खास तौर पर उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर की पहचान माना जाता है. इसकी खुशबू, मुलायम बनावट और लाजवाब स्वाद इसे बाकी कबाबों से अलग बनाते हैं.
टुंडे कबाब की सबसे बड़ी खासियत इसकी नरमी है. यह इतना मुलायम होता है कि मुंह में जाते ही घुल जाता है. इसे खास मसालों और बारीक पिसे मांस से तैयार किया जाता है. कहा जाता है कि इसमें 100 से ज्यादा तरह के मसालों का इस्तेमाल होता है, जो इसके स्वाद को बेहद खास बना देते हैं.
टुंडे कबाब का नाम इसके बनाने वाले हाजी मुराद अली से जुड़ा है. उन्हें एक हाथ से दिक्कत थी, इसलिए लोग उन्हें “टुंडे मियां” कहते थे. उनके बनाए कबाब इतने मशहूर हुए कि वही नाम आगे चलकर इस डिश की पहचान बन गया.
टुंडे कबाब को बनाने के लिए कीमा (मांस) में अलग-अलग मसाले मिलाए जाते हैं. फिर इसे टिक्की के आकार में बनाकर तवे पर हल्की आंच पर पकाया जाता है. इसे पराठे या रुमाली रोटी के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
लखनऊ के Tunday Kababi की दुकान टुंडे कबाब के लिए बहुत मशहूर है. यहां देश-विदेश से लोग सिर्फ इस खास स्वाद को चखने आते हैं. टुंडे कबाब न सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि यह लखनऊ की नवाबी संस्कृति का भी हिस्सा है. यहां के खाने में जो नजाकत और खुशबू होती है, वह इस कबाब में साफ झलकती है.
लखनऊ में LPG गैस की किल्लत का असर अब शहर के मशहूर फूड जॉइंट्स पर भी दिखाई देने लगा है. टुंडे कबाब, बाजपेई कचौरी भंडार और शर्मा जी की चाय जैसे प्रसिद्ध खाने-पीने के ठिकानों को गैस की कमी के कारण कोयले के चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे कामकाज का समय घट गया है और कारोबार पर भी असर पड़ रहा है.
लखनऊ के मशहूर टुंडे कबाब (Tunday Kabab) का इतिहास नवाब आसफ-उद-दौला के कबाब प्रेम और हाजी मुराद अली से जुड़ा है. गिरते दांतों की वजह से नवाब के लिए बनाए गए ये कबाब आज अपनी सॉफ्टनेस और 160 सीक्रेट मसालों की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर हैं.