सप्तग्राम (Saptagram), जिसे सातगांव के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में स्थित एक प्राचीन गांव है. यह स्थान ऐतिहासिक रूप से बंगाल के दक्षिणी भाग का एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक नगर था, जो प्राचीन काल में सारस्वती नदी के किनारे स्थित था. यहां से व्यापारिक गतिविधियां अरब, फारस और टर्की जैसे दूर देशों तक फैलती थीं. नदी के अलावा इस जिले में बर्धमान, हुगली व कोलकाता क्षेत्र के अन्य स्थानों से यह व्यापारिक मार्ग जुड़ा हुआ था. 17वीं-18वीं सदी के बाद सारस्वती नदी का मैल जमने के कारण बंदरगाह क्षीण हो गया और सप्तग्राम का व्यापारिक महत्व कम होता गया. आज यह एक शांत ग्रामीण इलाका है, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व आज भी विद्यमान है.
सप्तग्राम एक मध्यम आकार का गांव है, जो चिन्सूड़ा-माग्रा ब्लॉक के अंतर्गत आता है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां कुल 1,758 लोग रहते थे, जिनमें से 892 पुरुष और 866 महिलाएं थीं, और इसमें लगभग 402 परिवार शामिल हैं. यहां का लिंग अनुपात 971 है, जो राज्य के औसत से बेहतर है. गांव की साक्षरता दर लगभग 89.9% है, जो पश्चिम बंगाल की औसत साक्षरता दर से भी अधिक है.
सप्तग्राम का गांव हुगली जिले के चिन्सूड़ा-माग्रा सबडिवीजन में स्थित है, और यह मुख्य नगर बान्देल से लगभग 4-5 किमी दूरी पर है. इसके आस-पास कई छोटे गांव जैसे बेंजपुर, गजाघंटा, डिंगलहट, तेजहरिया आदि हैं जो ग्रामीण जीवन और स्थानीय बाजार के केंद्र हैं. ग्राम पंचायत भी इसी नाम से स्थापित है, जिसमें कुल लगभग 10 गांव शामिल हैं. स्थानीय परिवहन नेटवर्क रेलवे और बस दोनों के माध्यम से उपलब्ध है. सप्तग्राम रेलवे स्टेशन हावड़ा-बर्धमान मुख्य रेल पटरी पर स्थित है, जिससे कोलकाता और अन्य बड़े शहरों का सीधा संपर्क होता है.
आज सप्तग्राम अपने प्राचीन इतिहास, ग्रामीण जीवन, और हुगली जिले के सांस्कृतिक और भौगोलिक परिदृश्य का सम्मिश्रण दिखाता है. इसका महत्व न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि इतिहासप्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है.