संजय गांधी (Sanjay Gandhi) भारतीय राजनीति के उन व्यक्तित्वों में से हैं, जिनका प्रभाव अल्प आयु और बिना किसी औपचारिक पद के बावजूद गहरा और विवादास्पद रहा. उनका जन्म 14 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुआ था. वे भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे पुत्र और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाती थे. राजनीतिक विरासत के बावजूद संजय गांधी ने कभी चुनाव नहीं लड़ा, फिर भी 1970 के दशक में वे सत्ता के केंद्र में रहे.
संजय गांधी का नाम विशेष रूप से आपातकाल (1975-77) के दौर से जुड़ा है. इस अवधि में उन्होंने सरकार के भीतर एक प्रभावशाली भूमिका निभाई. उनके द्वारा शुरू किया गया पांच सूत्री कार्यक्रम- परिवार नियोजन, वृक्षारोपण, दहेज विरोध, साक्षरता और जातिवाद उन्मूलन देश के सामाजिक सुधार के उद्देश्य से सामने आया. हालांकि, इन योजनाओं के क्रियान्वयन के तरीकों को लेकर भारी विवाद हुआ.
सबसे अधिक आलोचना जबरन नसबंदी अभियान और दिल्ली की झुग्गी बस्तियों को हटाने को लेकर हुई. इन कार्रवाइयों ने आम जनता में भय और असंतोष पैदा किया और कांग्रेस पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया. वहीं उनके समर्थक मानते हैं कि संजय गांधी प्रशासनिक जड़ता को तोड़ने और तेजी से फैसले लेने वाले नेता थे, जो भारत को आधुनिक दिशा में ले जाना चाहते थे.
राजनीति के अलावा संजय गांधी को ऑटोमोबाइल क्षेत्र में भी रुचि थी. उन्होंने मारुति प्रोजेक्ट की नींव रखी, जो बाद में मारुति सुजुकी के रूप में भारत की सबसे सफल कार परियोजना बनी.
23 जून 1980 को एक विमान दुर्घटना में संजय गांधी का आकस्मिक निधन हो गया. मात्र 33 वर्ष की आयु में उनका जाना भारतीय राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ. संजय गांधी आज भी एक ऐसे नेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिनमें अपार ऊर्जा, साहस और परिवर्तन की चाह थी, लेकिन जिनकी कार्यशैली ने उन्हें उतना ही विवादास्पद भी बना दिया.
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