प्रियंका चतुर्वेदी, राजनेता
प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद और शिवसेना की उपनेता के पद पर हैं ( Member of Rajya Sabha and Deputy Leader of Shiv Sena). इससे पहले, वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्य और उसके राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में से एक थीं (Former member of Congress Party). वह तहलका, डेली न्यूज एंड एनालिसिस और फर्स्टपोस्ट के लिए स्तंभकार भी रही हैं. प्रियंका दो गैर सरकारी संगठनों की ट्रस्टी हैं, जो बच्चों की शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए काम करती है. वह एक पुस्तक समीक्षा ब्लॉग भी चलाती हैं जो भारत में पुस्तकों पर शीर्ष दस वेबलॉग में से एक है.
प्रियंका चतुर्वेदी का जन्म 19 नवंबर 1979 को हुआ था और उनका पालन-पोषण मुंबई में हुआ (Priyanka Chaturvedi age). उनका परिवार उत्तर प्रदेश से आता है. उन्होंने 1995 में मुंबई के सेंट जोसेफ हाई स्कूल से स्कूली शिक्षा हासिल की. 1999 में, नरसी मोंजी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स, मुंबई से वाणिज्य में स्नातक किया (Priyanka Chaturvedi education. वह शादीशुदा हैं और उनके दो बच्चे हैं.
चतुर्वेदी ने अपने करियर की शुरुआत एक मीडिया, पीआर और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी एमपॉवर कंसल्टेंट्स के निदेशक के रूप में की थी (Director of MPower Consultants). वह प्रयास चैरिटेबल ट्रस्ट की ट्रस्टी हैं, जो 200 से अधिक वंचित बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए दो स्कूल चलाती है (Trustee of NGO).
वह 2010 में कांग्रेस में शामिल हुई थीं और 2012 में उत्तर-पश्चिम मुंबई से भारतीय युवा कांग्रेस की महासचिव बनी थीं. 19 अप्रैल 2019 को वह उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की उपस्थिति में शिवसेना में शामिल हुईं (Priyanka Chaturvedi political career).
सरकार वर्तमान समय में केवल भगवान भरोसे चल रही है और सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट पर ध्यान दे रही है. बड़े-बड़े वादे किए जा रहे हैं पर असल में काम पड़ोसी देशों पर निर्भर होकर किया जा रहा है. जब असली मुश्किलें सामने आती हैं तो उनका सामना करना पड़ता है. भारत पूरी तरह से तैयार नहीं दिखता और जो परेशानी उठ रही है उसका बोझ सामान्य जनता पर गिरेगा.
ईरान में आने वाले समय में कई दिक्कतें सामने आ सकती हैं, जिनसे जुड़े geopolitical स्थिति भी चिंताजनक है. डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस मुद्दे पर अपनी बात रखते रहे हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री के इजरायल में आने के बाद भी ऐसा लगता है कि उन्हें भी पूरी जानकारी नहीं है कि क्या होने वाला है. इन सभी स्थितियों को समझते हुए और जियो पॉलिटिकल वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए, भारत में LPG के दाम पहले ही बढ़ा दिए गए हैं.
प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि पार्लियामेंट के प्रश्नोत्तर सत्र में मंत्री जनता से सरेआम झूठ बोलते हैं. कहा गया था कि पर्याप्त स्टॉक रिजर्व है और किसी भी वैश्विक संकट को हम अच्छी तरह संभाल लेंगे. लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है. पुणे में इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम, बेंगलुरु के होटल, मुंबई की किल्लत और कई फैक्ट्रियों की उत्पादन क्षमता घट गई है, क्योंकि गैस की कमी हो रही है.
प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि एक हफ्ते के अंदर एलपीजी घरेलू सिलेंडर के दामों में वृद्धि ने जनता के सुझावों को नजरअंदाज किया है. सरकार ने पहले कहा था कि कीमतें नहीं बढ़ेंगी और सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी, लेकिन जल्द ही दाम बढ़ा दिए गए. यह दर्शाता है कि इस कदम की योजना सही तरीके से नहीं बनाई गई और सरकार अनपेक्षित परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार नहीं थी.
प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि बाइक रैली में शामिल होकर बहुत खुशी हुई. इतनी सारी महिलाओं को बाइक चलाते देखकर महसूस हुआ कि वे अपनी जिंदगी का स्टीयरिंग व्हील खुद संभाल रही हैं और देश की प्रगति में योगदान दे रही हैं. मैं सभी महिलाओं को उनकी इस उन्नति पर बधाई देना चाहती हूं. यह आयोजन महिलाओं की शक्ति और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.
यह स्पष्ट है कि वोट आप कहीं भी दें सरकार बीजेपी की ही बनेगी. इस प्रकार का माहौल देश में जारी है और इसका विरोध किया जा रहा है. यह विरोध देश के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है. हम सभी इसका समर्थन करते हैं और इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. शिवसेना भी इस विरोध का हिस्सा है और वह उनके साथ हैं.
बिहार में वोटर्स के अधिकारों का किस प्रकार हनन हो रहा है, यह एक गंभीर मुद्दा है. वोटर्स ने नीतीश कुमार को वोट दिया लेकिन वे बीजेपी को पसंद नहीं करते. इसके बावजूद बीजेपी ने नीतीश कुमार को राज्यसभा भेज दिया है और वहां से अपना मुख्यमंत्री बनाने की योजना बना रही है. इससे वोटर्स के अधिकारों का उल्लंघन होता है और लोकतंत्र की भावना को चोट पहुँचती है.
जो लड़ाई सिर ने लड़ी है वह बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय है. यह लड़ाई केवल बंगाल की नहीं बल्कि पूरे देश की लड़ाई है. इस लड़ाई में मुख्य मुद्दा वोटर्स के अधिकारों का हनन है. वोटर्स के अधिकार धीरे धीरे उनसे छीने जा रहे हैं और बिहार में भी इसका असर दिख रहा है. वोटर्स ने नीतीश कुमार को चुना लेकिन वे बीजेपी के अनुकूल नहीं थे. इस वजह से बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेज दिया। यह पूरी परिस्थिति बताती है कि वोटर्स के अधिकारों को सुरक्षित रखना कितना आवश्यक है.
निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव का ऐलान कर दिया है. इन सीटों पर 16 मार्च को मतदान होगा. अप्रैल में सांसदों का कार्यकाल खत्म होने की वजह से यह प्रक्रिया शुरू की गई है. अधिसूचना 26 फरवरी को जारी होगी और नामांकन 5 मार्च तक भरे जा सकेंगे.
शिवसेना उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने SIR के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और अन्य चुनावी क्षेत्रों में चुनाव आयोग के कथित पक्षपात को लेकर चर्चा हो रही है. कहा जा रहा है कि आयोग भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम कर रहा है। ममता बनर्जी की लीगल लड़ाई को भी समर्थन दिया गया है.
शिवशेना उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज की चर्चा में यह सच सामने आया कि पीयूष गोयल जी भी अमेरिकी डील के संबंध में स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ हैं. वे संभवतः डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट का इंतजार कर रहे हैं जिसमें डील के टर्म्स और कंडीशंस की जानकारी दी जाएगी.
आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ 15 फरवरी को होने वाला मैच नहीं खेलने का फैसला किया है, हालांकि टूर्नामेंट में उसकी भागीदारी बनी रहेगी. इस पर राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रतिक्रिया देते हुए ICC से पाकिस्तान पर जुर्माना लगाने की मांग की और तंज कसा. पाकिस्तान सरकार ने X पर इसकी घोषणा की.
यूजीसी के नए नियमों के लागू होने के साथ ही विवाद गहरा गया है. सड़क से सोशल मीडिया तक संग्राम छिड़ गया है. इसे लेकर लोगों के बयान आ रहे हैं, कवि कुमार विश्वास से लेकर किसान नेता राकेश टिकैत तक ने सवाल उठाया तो आरजेडी की प्रवक्ता कंचना यादव अलग लाइन पर दिख रही है.
शिवसेना UBT की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि किस तरह विपक्ष को वोट देने वालों के नाम बूथ पर जाकर काटे जा रहे हैं. गृह मंत्री के बयान के अनुसार जो लोग विपक्ष के मुख्यमंत्री को चुनते हैं उन्हें घुसपैठिया बताया जा रहा है. इसके विपरीत, जो सरकार के साथ हैं उन्हें देशभक्त कहा जा रहा है.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के एआई फीचर ग्रोक के बेजा इस्तेमाल की लगातार खबरें आ रही है. इस बीच राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी है और कहा है कि महिलाओं की अस्मिता का हनन होता रहे और इस पर कोई प्रतिक्रिया न दी जाए. ऐसा नहीं हो सकता है.
शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने AI ऐप्स के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने आईटी मंत्री से आग्रह किया कि महिलाओं की तस्वीरों को अनधिकृत रूप से अश्लील बनाने वाले टूल्स पर सख्त सुरक्षा मानक लगाए जाएं.
शिवसेना उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, दोनो भाइयों के गठबंधन की घोषणा पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. प्रियंका ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि 'ये एक ऐतिहासिक दिन और एक ऐतिहासिक क्षण है और हम एक ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर होंगे जब ये दोनों भाई मिलकर इसकी घोषणा करंगे.
शिवसेना UBT सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि मंत्री राम मोहन नायडू को इंडिगो संकट को लेकर संसद में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय को इंडिगो पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए क्योंकि इंडिगो ने यात्रियों को काफी परेशानी में डाला है. प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि इंडिगो के पास नियमों में हुए बदलावों की पूरी जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों को असुविधा हुई.
उद्धव गुट की शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 'संचार साथी' ऐप पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर हल्ला बोला है. उन्होनें कहा कि 'मैं उन हर मुद्दों पर आवाज उठाऊंगी जो हमारी संवैधानिक अधिकारों का हनन करेगा. हम उन मुद्दों पर आवाज उठाते रहेंगे जिससे आम जिंदगियों पर असर पड़ता है. और संचार साथी ऐप एक निगरानी तंत्र था.'
Auramine Dye In Roasted Gram: राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा कि खाने में कैंसर पैदा करने वाले रंगों का इस्तेमाल पब्लिक सेफ्टी का एक गलत उल्लंघन है. मंत्रालय की यह जिम्मेदारी है कि वह पब्लिक हेल्थ की रक्षा करने और फूड सेफ्टी सिस्टम में कंज्यूमर का भरोसा वापस लाने के लिए तुरंत दखल दे.
उद्धव ठाकरे की शिवसेना पार्टी की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने बिहार चुनावके नतीजों पर बात करते हुए SIR पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होनें कहा कि बिहार में SIR की आड़ में कई वोटर्स को हटाए जाने की खबरे सामने आई हैं. असम में भी SIR के नाम पर सीमित रिविजन किया जा रहा है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक जानकारी के गहन रिविजन में कमी देखी जा रही है.