मैराथन (Marathon) एक लंबी दूरी की दौड़ होती है, जो आमतौर पर करीब 42-45 किलोमीटर की होती है. आजकल मैराथन दुनियाभर में बहुत लोकप्रिय हो चुकी है और हर उम्र के लोग इसमें हिस्सा लेते हैं. मैराथन दौड़ की शुरुआत प्राचीन ग्रीस से मानी जाती है. कहा जाता है कि एक सैनिक ने मैराथन नाम की जगह से एथेंस तक दौड़ लगाकर जीत की खबर दी थी, उसी से इस दौड़ का नाम पड़ा. आज के समय में यह एक बड़ा खेल आयोजन बन चुका है, जिसमें हजारों लोग हिस्सा लेते हैं.
मैराथन में भाग लेना आसान नहीं होता. इसके लिए शरीर और मन दोनों को तैयार करना पड़ता है. नियमित अभ्यास, सही खान-पान और पूरी नींद बहुत जरूरी होती है. दौड़ से पहले वार्म-अप करना और बाद में शरीर को आराम देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. जो लोग पहली बार मैराथन में हिस्सा लेते हैं, वे अक्सर छोटी दूरी से शुरुआत करते हैं और धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाते हैं.
मैराथन दौड़ के कई फायदे भी हैं. यह शरीर को फिट रखती है, दिल को मजबूत बनाती है और मानसिक तनाव को कम करती है. आजकल कई शहरों में 'हाफ मैराथन' का आयोजन किया जाता है. इन आयोजनों में लोग न सिर्फ दौड़ने के लिए, बल्कि जागरूकता फैलाने के लिए भी हिस्सा लेते हैं.
भारत के मैराथन धावक सावन बरवाल ने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया. 28 साल के सावन ने 2:11:37 का समय निकाला. इसी साल उन्होंने पहली मैराथन में 2:11:58 का रिकॉर्ड बनाया था. सावन ने कहा कि अगर एशियन गेम्स में मेडल नहीं मिलता तो मैराथन में आने का फैसला और 15-16 साल की मेहनत बेकार लगती.
महाराष्ट्र की रमाबाई रणवीर नंगे पैर मैराथन जीतकर चर्चा में आ गई हैं. अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए दौड़ लगाने के बाद उनकी खूब वाहवाही हो रही है. इस बीच अब सरकार उनकी मदद के लिए आगे आई है. महाराष्ट्र सरकार ने फैसला किया है कि वो रमाबाई की बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएगी.
महाराष्ट्र की रमाबाई रणवीर की हिम्मत और संघर्ष की कहानी ने हर किसी का ध्यान खींचा है. बेटियों की पढ़ाई के लिए उन्होंने नंगे पैर मैराथन दौड़कर पहला स्थान हासिल किया और 3000 रुपये का इनाम जीता. अब महाराष्ट्र सरकार ने भी उनकी मदद का फैसला किया है. सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने बताया कि सरकार रमाबाई की बेटियों की पढ़ाई और परिवार के पालन पोषण के लिए आर्थिक सहायता देगी.
रॉटरडैम मैराथन में 28 साल के भारतीय धावक सावन बरवाल ने 2:11:58 का समय निकालकर 48 साल पुराना राष्ट्रीय मैराथन रिकॉर्ड तोड़ दिया. फिनिश लाइन से कुछ मीटर पहले बेहोश होकर गिरने और फिर वॉलंटियर की मदद से उठकर दौड़ पूरी करने की यह कहानी बेहद नाटकीय रही. इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने शिवनाथ सिंह के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया...
चीन के Honor कंपनी के रोबोट लाइटनिंग ने बीजिंग में 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन मात्र 50 मिनट 26 सेकेंड में पूरी कर दी. इसने मानव विश्व रिकॉर्ड (57 मिनट 20 सेकंड) को 6 मिनट 54 सेकंड से पीछे छोड़ दिया. पिछले साल इंसानों से पीछे रहने वाला यह रोबोट इस बार पूरे मैदान को पछाड़ गया. चीन की रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी में यह एक बड़ी उपलब्धि है.
मैराथन की दुनिया में 2 घंटे की सीमा को तोड़ना वैसा ही है जैसे अंतरिक्ष विज्ञान में इंसान का पहली बार चांद पर कदम रखना. केन्या के सेबेस्टियन सावे अपनी लीग के इकलौते इंसान बन गए हैं. आइए, इस ऐतिहासिक उपलब्धि और केन्याई धावकों के 'सुपरह्यूमन' होने के पीछे की साइंस को और विस्तार से समझते हैं.