खतौली (Khatauli) उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले का एक महत्वपूर्ण शहर और नगर पालिका क्षेत्र है. यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का हिस्सा माना जाता है और देश की राजधानी नई दिल्ली से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. अपनी भौगोलिक स्थिति और परिवहन सुविधाओं के कारण खतौली लंबे समय से क्षेत्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है.
खतौली राष्ट्रीय राजमार्ग-58 (NH-58) पर स्थित है, जो उत्तर भारत के प्रमुख मार्गों में से एक है. यह सड़क मार्ग दिल्ली को हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून और उत्तराखंड के अन्य महत्वपूर्ण शहरों एवं धार्मिक स्थलों से जोड़ता है. यही कारण है कि इस मार्ग से पूरे वर्ष बड़ी संख्या में यात्रियों और श्रद्धालुओं का आवागमन होता है. इसके अलावा खतौली दिल्ली-सहारनपुर (मेरठ मार्ग) रेलवे लाइन पर भी स्थित है, जिससे रेल संपर्क भी मजबूत बना हुआ है.
प्रशासनिक दृष्टि से खतौली को वर्ष 2007 में तहसील का दर्जा दिया गया था. इसके बाद से यह क्षेत्र प्रशासनिक गतिविधियों का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया. शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए यहां आते हैं.
इतिहास की बात करें तो खतौली का उल्लेख मुगलकालीन ग्रंथ आइने-अकबरी में मिलता है. उस समय यह सहारनपुर सरकार के अंतर्गत एक परगना था. ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार यह क्षेत्र शाही खजाने में राजस्व देता था और सैन्य बल भी उपलब्ध कराता था.
वर्ष 2017 में खतौली राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था. 19 अगस्त 2017 को यहां पुरी-हरिद्वार कलिंग उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. मानव त्रुटि के कारण हुई इस दुर्घटना में ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए थे. इस घटना ने पूरे देश का ध्यान खतौली की ओर आकर्षित किया था.
खतौली में कई धार्मिक और शैक्षणिक संस्थान भी मौजूद हैं. यहां विभिन्न धर्मों से जुड़े मंदिर, गुरुद्वारे और अन्य धार्मिक स्थल स्थित हैं. शहर में नौ जैन मंदिर हैं, जबकि रेलवे स्टेशन के निकट महानुभाव संप्रदाय का भगवान कृष्ण मंदिर भी स्थित है. शिक्षा के क्षेत्र में केके जैन पीजी कॉलेज प्रमुख संस्थानों में शामिल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करते हैं.
खतौली का विकास परिवहन, प्रशासन, शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों के साथ जुड़ा हुआ है, जिसके कारण यह मुजफ्फरनगर जिले के प्रमुख नगरों में अपनी पहचान बनाए हुए है.