ज्वार (Jowar) एक प्रमुख अनाज (मोटा अनाज) है, जिसे भारत के कई राज्यों में लंबे समय से उगाया जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम सोरघम (Sorghum bicolor) है. यह फसल मुख्य रूप से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है और भारत के साथ-साथ अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इसकी खेती होती है. भारत सरकार ने भी मोटे अनाजों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें ज्वार एक महत्वपूर्ण फसल है.
भारत में ज्वार की खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में की जाती है. इसकी बुवाई खरीफ और कुछ क्षेत्रों में रबी मौसम में भी होती है. यह फसल गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह उगती है तथा कम पानी वाले इलाकों में भी इसकी खेती संभव होती है.
ज्वार के पौधे की ऊंचाई सामान्यतः 2 से 4 मीटर तक होती है. इसके दाने गोल आकार के होते हैं, जिनका रंग सफेद, पीला, लाल या भूरा हो सकता है. ज्वार का उपयोग आटा बनाने, रोटी, दलिया, खिचड़ी और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार करने में किया जाता है. इसके अलावा पशुओं के चारे के रूप में भी इसका व्यापक उपयोग होता है.
भारत में ज्वार का उत्पादन और खरीद-बिक्री कृषि बाजारों के माध्यम से होती है. कई राज्यों में किसान इसकी खेती स्थानीय जरूरतों और बाजार की मांग के अनुसार करते हैं. समय के साथ ज्वार से बने खाद्य उत्पादों की उपलब्धता भी बढ़ी है, जिससे इसकी बाजार में मौजूदगी मजबूत हुई है.
आज ज्वार केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य उद्योग में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है. देश के कई हिस्सों में ज्वार से बने पैकेज्ड उत्पाद, आटा और अन्य खाद्य सामग्री आसानी से उपलब्ध हैं. इसी कारण ज्वार भारतीय कृषि और खाद्य प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है.