आइज़क न्यूटन (Isaac Newton) एक गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी, खगोलशास्त्री, आविष्कारक, लेखक और दार्शनिक थे. उन्हें वैज्ञानिक क्रांति के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में गिना जाता है. उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "फिलॉसोफी नेचुरालिस प्रिंसिपिया मैथेमेटिका (Principia)" वर्ष 1687 में प्रकाशित हुई. इस पुस्तक में उन्होंने गति के तीन नियम (Laws of Motion) और सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण (Universal Gravitation) का सिद्धांत प्रस्तुत किया. इन सिद्धांतों ने कई सदियों तक भौतिक विज्ञान की नींव का काम किया.
न्यूटन ने प्रकाश (Optics) पर भी महत्वपूर्ण शोध किया. उन्होंने बताया कि सफेद प्रकाश कई रंगों से मिलकर बना होता है और प्रिज्म की मदद से इसे अलग-अलग रंगों में देखा जा सकता है. उनके प्रकाश संबंधी शोध को बाद में "ऑप्टिक्स (Opticks)" नामक पुस्तक में प्रकाशित किया गया.
गणित के क्षेत्र में न्यूटन ने कैलकुलस (Calculus) के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया. इस विषय के विकास का श्रेय जर्मन गणितज्ञ गॉटफ्रीड विल्हेम लाइबनिज के साथ साझा किया जाता है. इसके अलावा उन्होंने बाइनोमियल प्रमेय, टेलर श्रेणी, न्यूटन-कोट्स सूत्र और कई अन्य गणितीय सिद्धांतों पर भी काम किया.
आइज़क न्यूटन ने पहला सफल परावर्ती दूरबीन (Reflecting Telescope) भी बनाया. उन्होंने ध्वनि की गति, ऊष्मा के स्थानांतरण, द्रवों के व्यवहार और ग्रहों की गति जैसे विषयों पर भी अध्ययन किया. उनके शोध ने आधुनिक विज्ञान की कई शाखाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
सर आइज़क न्यूटन का जन्म 4 जनवरी 1643 को इंग्लैंड के लिंकनशायर स्थित वूल्सथोर्प नामक स्थान पर हुआ था. उनके जन्म से तीन महीने पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था. बचपन में उनका पालन-पोषण उनकी दादी ने किया, क्योंकि उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली थी. न्यूटन का बचपन सामान्य नहीं था, लेकिन आगे चलकर उन्होंने विज्ञान और गणित के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण काम किए.
वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज के फेलो और बाद में ल्यूकेशियन प्रोफेसर ऑफ मैथमेटिक्स बने. उन्होंने ब्रिटेन की संसद के सदस्य के रूप में भी कार्य किया. वर्ष 1705 में ब्रिटेन की महारानी ऐनी ने उन्हें 'सर' की उपाधि से सम्मानित किया. इसके बाद उन्होंने रॉयल मिंट के वार्डन और बाद में मास्टर के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई. साथ ही वे रॉयल सोसाइटी के अध्यक्ष भी रहे.
31 मार्च 1727 को लंदन में उनका निधन हुआ. आज भी सर आइज़क न्यूटन का नाम विज्ञान और गणित के इतिहास में सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों में लिया जाता है और उनके सिद्धांत आज भी शिक्षा तथा शोध का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.
ओडिशा के स्कूल और जनशिक्षा विभाग की नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 तथ्यात्मक, छपाई और वैचारिक गलतियां पाई गई हैं, जिनमें न्यूटन को 'पायलट' बताया गया, ओडिशा की पहाड़ियां झारखंड में दिखाईं गईं और कई अन्य गंभीर त्रुटियां शामिल हैं. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस मामले में हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं और 7 दिनों में रिपोर्ट मांगी है.