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महंगाई भत्ता

महंगाई भत्ता

महंगाई भत्ता

महंगाई भत्ता (DA) असल में बढ़ती महंगाई को देखते हुए दिया जाने वाला एक अतिरिक्त पैसा होता है. यानी जब रोजमर्रा का खर्च बढ़ता है, तो सरकार अपने कर्मचारियों और पब्लिक सेक्टर (सरकारी कंपनियों) में काम करने वालों की सैलरी में थोड़ा बढ़ोतरी करती है, ताकि उन्हें राहत मिल सके.

पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों को भी यह भत्ता मिलता है, लेकिन वे सीधे सरकारी अधिकारी (सिविल सर्वेंट) नहीं होते. कुछ बड़ी और पुरानी प्राइवेट कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देती हैं.

महंगाई भत्ता, आपकी बेसिक सैलरी (मूल वेतन) का एक प्रतिशत होता है. जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, वैसे-वैसे DA भी बढ़ाया जाता है ताकि लोगों पर उसका असर कम हो. किसी व्यक्ति को सैलरी या पेंशन मिलती है, जिसमें बाद में DA और कभी-कभी हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी जोड़ दिया जाता है. DA पूरी तरह टैक्स के दायरे में आता है यानी इस पर टैक्स देना पड़ता है.

महंगाई भत्ता इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप किस शहर या इलाके में रहते हैं, क्योंकि हर जगह महंगाई का स्तर अलग होता है.

महंगाई भत्ते दो प्रकार को होते हैं- पहला- रोजगार की शर्तों के तहत मिलने वाला DA (यानि नौकरी के नियमों में शामिल) और दूसरा- रोजगार की शर्तों के तहत न मिलने वाला DA (यानि अलग से दिया जाने वाला).

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