हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित डलहौजी (Dalhousie) एक शांत, सुंदर और ऐतिहासिक हिल स्टेशन है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ठंडी जलवायु और औपनिवेशिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है. समुद्र तल से लगभग 1,970 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह पर्यटन स्थल हिमालय की धौलाधार पर्वत श्रृंखला की गोद में स्थित है.
डलहौजी की स्थापना वर्ष 1854 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी और इसका नाम ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौजी के नाम पर रखा गया. आज भी यहां कई पुरानी चर्च, बंगले और इमारतें ब्रिटिश काल की याद दिलाती हैं. सेंट जॉन्स चर्च, सेंट एंड्रयूज चर्च और सेंट फ्रांसिस चर्च यहां के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल हैं.
प्राकृतिक दृष्टि से डलहौज़ी बेहद आकर्षक है. यहां के घने देवदार और चीड़ के जंगल, हरी-भरी घाटियां और बर्फ से ढकी चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं. डलहौजी के पास स्थित खजियार को ‘भारत का मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है. यहां की हरी घास की मैदान, झील और चारों ओर फैले जंगल इसे बेहद खास बनाते हैं.
डलहौजी घूमने के लिए कई दर्शनीय स्थल हैं, जिनमें पंचपुला, सुभाष बावली, डैनकुंड पीक और कलातोप वन्यजीव अभयारण्य प्रमुख हैं. डैनकुंड पीक डलहौजी का सबसे ऊंचा स्थान है, जहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य अत्यंत मनोहारी लगता है.
यहां की जलवायु साल भर सुहावनी रहती है. गर्मियों में भी मौसम ठंडा रहता है, जबकि सर्दियों में बर्फबारी का आनंद लिया जा सकता है. डलहौजी उन लोगों के लिए आदर्श स्थान है जो शांति, प्रकृति और सुकून की तलाश में पहाड़ों की ओर जाना चाहते हैं.
हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर बर्फबारी का मौसम जारी है. फरवरी की शुरुआत में डलहौजी के ऊपरी इलाकों में रविवार की शाम को एक बार फिर बर्फ गिरी. डलहौजी के डायनकुंड इलाके, जो समुद्रतल से लगभग 2900 मीटर ऊंचाई पर है, वहां के सुंदर दृश्य कैमरे में कैद किए गए. बर्फ से ढके पहाड़ और वहां की प्राकृतिक सुंदरता स्विट्जरलैंड की याद ताजा कर देती है.