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सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन

सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (Central Board of Film Certification- CBFC) भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली एक वैधानिक (Statutory) संस्था है. इसका मुख्य कार्य भारत में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होने वाली फिल्मों को प्रमाणित करना है. यह संस्था 'सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 (Cinematograph Act, 1952)' के प्रावधानों के अनुसार काम करती है.

भारत में किसी भी फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने या सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले CBFC से प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक होता है. बोर्ड फिल्म की समीक्षा करता है और उसके विषय, भाषा, दृश्य तथा अन्य पहलुओं के आधार पर उपयुक्त श्रेणी का प्रमाणपत्र जारी करता है. यदि कोई फिल्म निर्धारित नियमों और प्रावधानों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो बोर्ड उसे प्रमाणित करने से इनकार भी कर सकता है.

वर्तमान में CBFC कई प्रकार के फिल्म प्रमाणपत्र जारी करता है. 'U (Universal)' प्रमाणपत्र का अर्थ है कि फिल्म सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त है. 'UA (Parental Guidance)' श्रेणी में आने वाली फिल्मों को बच्चे अभिभावकों के मार्गदर्शन में देख सकते हैं. नवंबर 2024 से UA श्रेणी को तीन आयु वर्गों में विभाजित किया गया है, जिनमें 'UA 7+', 'UA 13+' और 'UA 16+' शामिल हैं. इनका उद्देश्य दर्शकों की आयु के अनुसार उपयुक्त सामग्री का वर्गीकरण करना है.

'A (Adults Only)' प्रमाणपत्र केवल 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के दर्शकों के लिए जारी किया जाता है. वहीं 'S (Specialised Audience)' प्रमाणपत्र विशेष वर्ग के दर्शकों, जैसे डॉक्टरों, वैज्ञानिकों या अन्य विशेषज्ञों के लिए बनाई गई फिल्मों को दिया जाता है.

फिल्मों के अलावा वीडियो फिल्मों के लिए भी प्रमाणन व्यवस्था मौजूद है. इनमें 'V/U', 'V/UA' और 'V/A' जैसी श्रेणियों का उपयोग किया जाता है, जिनका अर्थ संबंधित फिल्म प्रमाणपत्रों के समान होता है.

CBFC का कार्य केवल फिल्म का वर्गीकरण और प्रमाणन करना है. बोर्ड की प्रक्रिया में फिल्म की जांच, आवश्यक होने पर संशोधन संबंधी सुझाव और उसके बाद प्रमाणपत्र जारी करना शामिल होता है. प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही किसी फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन भारत में किया जा सकता है.

इस प्रकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड भारत में फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले लागू होने वाली प्रमाणन प्रक्रिया का प्रमुख सरकारी निकाय है, जो सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाता है.

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