भिंडी (Bhindi) भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियों में से एक है. इसे अंग्रेजी में Okra या Lady's Finger कहा जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Abelmoschus esculentus है. भिंडी का पौधा गर्म जलवायु में अच्छी तरह बढ़ता है और इसकी खेती देश के लगभग सभी राज्यों में की जाती है. यह खरीफ और गर्मी, दोनों मौसमों की महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है.
भिंडी का पौधा आमतौर पर 1 से 2 मीटर तक ऊंचा होता है. इसकी पत्तियां चौड़ी और हरे रंग की होती हैं, जबकि फूल हल्के पीले रंग के होते हैं जिनके बीच में गहरा लाल या बैंगनी रंग दिखाई देता है. फूल आने के बाद हरे रंग की लंबी फलियां विकसित होती हैं, जिन्हें सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है.
भारत में भिंडी की कई किस्में उगाई जाती हैं, जिनमें पूसा सावनी, पूसा ए-4, अर्का अनामिका, परभणी क्रांति और हिसार उन्नत जैसी किस्में प्रमुख हैं. अलग-अलग क्षेत्रों की जलवायु और मिट्टी के अनुसार किसान उपयुक्त किस्म का चयन करते हैं.
भिंडी की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. इसके पौधे को पर्याप्त धूप और गर्म तापमान की आवश्यकता होती है. बुवाई के बाद समय-समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और फसल की देखभाल की जाती है. पहली तुड़ाई सामान्यतः बुवाई के 45 से 60 दिनों के बीच शुरू हो जाती है.
भिंडी का उपयोग मुख्य रूप से सब्जी बनाने में किया जाता है. इसके अलावा इसे विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों और क्षेत्रीय रेसिपी में भी शामिल किया जाता है. ताजी भिंडी की मांग स्थानीय मंडियों के साथ-साथ बड़े शहरों में भी बनी रहती है.
भारत विश्व के सबसे बड़े भिंडी उत्पादक देशों में शामिल है. घरेलू खपत के अलावा इसका निर्यात भी कई देशों में किया जाता है. खेती, व्यापार और दैनिक भोजन में महत्वपूर्ण स्थान होने के कारण भिंडी भारतीय कृषि और सब्जी उत्पादन का एक अहम हिस्सा मानी जाती है.