बचपन में रिश्तों को एक ऐसा धागा होता था जो रिश्तों के फौरन आपस में जोड़ देता था. रिश्ते खून के रंग से रंगे नहीं होते बल्कि दिल से जुड़े होते हैं. संजय सिन्हा से सुनिए रिश्तों के ताने-बाने की कहानी.