अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा में बड़ी चूक नजर आई है. वॉशिंगटन हिल्टन होटल में आयोजित व्हाइट हाउस संवाददाता संघ (WHCA) के दौरान गोलियों की आवाज आने लगी. इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति के साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी थीं.
गोलियों की आवाज सुनते ही सीक्रेट सर्विस ने सुरक्षा का घेरा बनाया और राष्ट्रपति को सुरक्षित बाहर निकाल ले गए. हमले के तुरंत बाद स्टेज पर बंदूकों के साथ स्पेशल फोर्स नजर आई, जिसने तुरंत एक हाई पावर लाइट को ऑन कर दी.
वॉशिंगटन में हमले के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों ने जिस लाइट को ऑन किया है, वह एक स्टैंडर्ड सिक्योरिटी प्रोटोकॉल होता है.
बिना शोर के होता है एक्शन
सफेद रंग में नजर आने वाली ये लाइट असल में SOS लाइट होती है. इस लाइट का इस्तेमाल बिना किसी शोर-शराबे के ये बताना होता है कि शख्स को सुरक्षा की जरूरत है. इसके अलावा लाइट का यूज सिक्योरिटी ऑपरेशन को बेहतर करना होता है. वीडियो देखने पर पतता चलता है कि वहां कुछ लोग लाइट के इशारें पर एक्शन लेने लगे.
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कब-कब इस्तेमाल की जाती है ऐसी लाइट
SOS लाइट को अक्सर हमला, एक्सिडेंट या इमरजेंसी स्थिति में किया जाता है. SOS लाइट ऑन करने का मतलब है कि तुरंत ध्यान दें. इस लाइट को हाई बीम पर तैयार किया जाता है.