अमेरिका के सिलिकॉन वैली के गलियारों में एक इंपॉर्टेंट सवाल घूम रहा है. क्या Meta के अंदर AI को लेकर अंदरूनी जंग शुरू हो चुकी है? वजह है कंपनी के CEO मार्क ज़करबर्ग और हाल ही में लाए गए स्टार AI चीफ Alexandr Wang के बीच बढ़ता टकराव.
बाहर से यह सिर्फ एक मैनेजमेंट री-स्ट्रक्चर की खबर लगती है, लेकिन अंदर की कहानी Meta के AI फ्यूचर और कॉरपोरेट कल्चर दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है.
28 साल के वांग को मिले 1.26 लाख करोड़!
पिछले साल जब मार्क ज़करबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बड़ा दांव खेला था. उन्होंने 28 साल के एलेक्ज़ांडर वांग को Meta की नई सुपरइंटेलिजेंस लैब्स का प्रमुख बनाया, जिसके लिए Meta ने उनके बनाये Scale AI में लगभग 14 अरब डॉलर यानी करीब ₹1.26 लाख करोड़ का निवेश किया. इस डेवेलपमेंट ने टेक इंडस्ट्री में भूचाल सा ला दिया था.
Meta का ये इन्वेस्टमेंट मॉडर्न AI हिस्ट्री के सबसे बड़े सौदों में से एक था. वांग 2025 में Meta का सबसे ज़्यादा सैलरी पाने वाला कर्मचारी बन गए और उन्हें कंपनी की AI लीडर माना जाने लगा.
लेकिन अब वही बड़ा निवेश, जो पहले Meta की AI क्रम को तेज़ करने वाला माना जाता था, अब कंपनी के भीतर टकराव की वजह भी बनता दिख रहा है.
मार्क जकरबर्ग से क्यों नाराज हैं वांग?
रिपोर्ट्स के मुताबिक वांग खुद ज़करबर्ग के तरीकों से नाराज़ हैं और उनका कहना है कि यह तरीका उनके काम को सफोकेट कर रहा है. वहीं कई सीनियर कर्मचारियों और अंदरूनी लोगों ने यह भी जताया है कि वांग अभी एक्सपीरिएंस और उम्र के लिहाज से जूनियर हैं. इसलिए वो Meta जैसी कंपनी का AI डिविजन लीड करने के लिए ठीक नहीं हैं.
गौरतलब है कि Alexandr Wang कोई आम टेक एक्जीक्यूटिव नहीं हैं. बहुत कम उम्र में उन्होंने Scale AI खड़ा किया, जो आज दुनिया की सबसे बड़ी डेटा लेबलिंग कंपनियों में गिनी जाती है.
पिछले साल Meta ने उन्हें भारी पैकेज के साथ अपने AI मिशन का चेहरा बनाया. कंपनी का मकसद साफ था. OpenAI, Google और Microsoft की रेस में Meta को AI में फिर से लीडर बनाना. लेकिन अब रिपोर्ट्स इशारा कर रही हैं कि अंदर की तस्वीर इतनी स्मूद नहीं है.
Meta ने बदला रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर
Meta ने हाल ही में अपना नया रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर लागू किया. इसके बाद कई टीमों की सीधी रिपोर्टिंग लाइन बदली गई. इसी बदलाव में यह बात सामने आई कि Alexandr Wang को ज़करबर्ग के AI विज़न से पूरी ऑपरेशनल फ्रीडम नहीं मिल रही है. दूसरी तरफ ज़करबर्ग खुद AI प्रोडक्ट रोडमैप पर बेहद माइक्रो-मैनेजमेंट कर रहे हैं. यही फ्रिक्शन अब बाहर आने लगा है.
टेक इंडस्ट्री में यह सिर्फ ईगो क्लैश नहीं माना जा रहा. असल में यह दो अलग सोच का टकराव है. एक तरफ ज़करबर्ग का प्रोडक्ट फर्स्ट और फास्ट शिपिंग मॉडल है. दूसरी तरफ Wang का रिसर्च फर्स्ट और फाउंडेशन मॉडल फोकस अप्रोच. यही वजह है कि Meta के अंदर कई AI रिसर्चर्स अब डायरेक्शन को लेकर असमंजस में हैं.
Meta से निकल रहे टॉप AI टैलेंट
इसी बीच Meta के कुछ टॉप AI टैलेंट का कंपनी छोड़ना भी चर्चा में है. अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कई सीनियर इंजीनियर्स और रिसर्चर्स अपने रोल्स और प्रायॉरिटी को लेकर अनिश्चित महसूस कर रहे हैं. यह वही फेज है जिसे टेक इंडस्ट्री में क्लटर क्रैक कहा जाता है. यानी जब हाइपर ग्रोथ एंबिशन और ग्राउंड रिएलिटी में गैप बनने लगता है.
Meta के लिए यह वक्त बेहद अहम है. कंपनी पहले ही मेटावर्स बेट पर भारी पैसा लगा चुकी है, जिसका रिटर्न अभी तक उम्मीद के मुताबिक नहीं आया. अब AI ही वह नया बड़ा दांव है जिस पर भविष्य की ग्रोथ टिकी है. ऐसे में AI लीडर्शिप में इंटर्नल कलह, इन्वेस्टर्स और कर्मचारियों दोनों के लिए मुश्किल की बात है.
दिलचस्प यह भी है कि ज़करबर्ग ने खुद हाल के महीनों में Meta को AI फर्स्ट कंपनी घोषित किया है. Llama मॉडल्स को ओपन सोर्स करने से लेकर इन हाउस फाउंडेशन मॉडल रोडमैप तक, हर जगह AI अब कंपनी की कोर पहचान बन रहा है. लेकिन अगर AI टीम के अंदर ही क्लैरिटी और अलाइनमेंट नहीं रहा, तो यह मेटावर्स की तरह ये भी शायद रिस्क में आ सकता है.
फाउंडर्स नहीं छोड़़ना चाहते कंट्रोल
Silicon Valley में इसे एक फैमिलियर माना जा रहा है. विजनरी फाउंडर और हाई प्रोफाइल स्पेशलिस्ट हायर के बीच एक तनातनी का माहौल एक टाइम के बाद लाजमी हो जाता है. हिस्ट्री में कई बार ऐसा क्लैश देखा गया है, जिसे आम भाषा में कलेश भी बोल सकते हैं. दरअसल जब कंपनियों के फाउंडर्स कंट्रोल छोड़ना नहीं चाहते और एलेंग्जेंडर वांग की तरह स्पेशलिस्ट लीडर्स फ्रीडम चाहते हैं. Meta अब उसी मोड़ पर खड़ा दिख रहा है.
फिलहाल कंपनी ने आधिकारिक तौर पर किसी इंटरनल कॉ़न्फ्लिक्ट को पब्लिकली मान नहीं रही है.