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पहले इंटरनेट ठप, फिर गूंजीं मिसाइलें, Iran पर ऐसे चला डिजिटल अटैक, साइबर वॉरफेयर की पूरी कहानी

अमेरिका और इजरायल के द्वारा ईरान की धरती पर हमले के बाद अब ईरान के सिस्टम पर साइबर अटैक हुआ. ग्लोबल इंटरनेट मॉनिटरिंग ने दिखाया कि ईरान की इंटरनेट कनेक्टिविटी अचानक भारी गिरावट पर पहुंच गई. देश का बाहरी ट्रैफिक सामान्य के सिर्फ कुछ प्रतिशत रह गया.

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ईरान-इजरायल की जंग पर एक्सपर्ट क्या कहते हैं? (Photo: Social Media/X)
ईरान-इजरायल की जंग पर एक्सपर्ट क्या कहते हैं? (Photo: Social Media/X)

28 फरवरी की सुबह खबरें सिर्फ आसमान और धमाकों की नहीं थीं. ग्लोबल इंटरनेट मॉनिटरिंग ने दिखाया कि ईरान की इंटरनेट कनेक्टिविटी अचानक भारी गिरावट पर पहुंच गई. देश का बाहरी ट्रैफिक सामान्य के सिर्फ कुछ प्रतिशत रह गया. मतलब देश के बाहर जाने आने वाला डेटा बहुत कम हो गया था.

इसी दौरान कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में लिखा गया कि मिसाइल और एयरस्ट्राइक के साथ डिजिटल ऑपरेशन भी चल रहे थे. असर सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सूचना का प्रवाह, मीडिया और आम लोगों की कनेक्टिविटी भी प्रभावित हुई.

यह घटना सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं थी. जब नेशनल लेवल ट्रैफिक इतनी कम हो, तो सवाल उठता है कि यह किस तरह का हमला है, किसका मकसद है और इससे आगे क्या जोखिम हैं.

यह हमला कब और कैसे शुरू हुआ

रिपोर्ट्स और नेटवर्क डेटा बताते हैं कि इंटरनेट गिरावट उसी समय सामने आई जब सैन्य स्ट्राइक की खबरें आईं. कुछ मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म्स ने लगभग राष्ट्रीय स्तर पर कनेक्टिविटी 4 प्रतिशत तक बताई. यानी सामान्य ट्रैफिक का लगभग 96 प्रतिशत बंद हो गया था. ऐसे तेज और व्यापक बदलाव आम तौर पर तभी दिखते हैं जब बड़े स्तर पर किसी फिजिकल गेटवे को निशाना बनाया गया हो, या रूटिंग लेयर पर छेड़छाड़ हुई हो, या सरकार ने खुद शटडाउन लागू किया हो.

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कुछ जगहों पर लोगों के फोन पर अजीब नोटिफिकेशन भी पहुंचे. लोकप्रिय प्रार्थना ऐप से सरेंडर जैसा संदेश दिखाई देने की रिपोर्ट आई. ऐसे मैसेज सूचना अभियान का हिस्सा माने जाते हैं. यानी सिर्फ नेटवर्क तोड़ना ही नहीं, जनता के मनोबल पर असर डालना भी मकसद हो सकता है.

क्यों साइबर वार इस तरह की स्थिति में अहम हो जाता है

डिजिटल स्ट्राइक का फायदा यह है कि बिना बड़े पैमाने पर जमीन या हवा में संसाधन झोंके, किसी देश की जरूरी क्षमताओं को कमजोर किया जा सकता है. 

कम्युनिकेशन, मीडिया प्रसारण, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स और सरकारी कमांड चेन. जब सूचना रुक जाती है, तो फैसले लेना मुश्किल हो जाता है. इसलिए आधुनिक युद्ध में पहले नेटवर्क को निशाना बनाना रणनीति का हिस्सा बन गया है.

ऐसे होता है साइबर वॉरफेयर

जब किसी देश का पूरा नेटवर्क अचानक अंधेरा हो जाए. मतलब इंटरनेट, न्यूज साइट, सरकारी सेवाएं और फोन नेटवर्क एक साथ प्रभावित हो जाएं. तो उसके पीछे सिर्फ एक तरीका नहीं होता. 
रिपोर्ट्स के अनुसार Iran पर जो हमले हुए, उनमें कई तरह की तकनीक एक साथ इस्तेमाल की गई. इससे यह साफ है कि यह कोई छोटा मोटा हैक नहीं था, बल्कि प्लान किया गया बड़ा ऑपरेशन था.
आइए समझते हैं कि ऐसे हमले कैसे होते हैं और असली नुकसान कहां होता है.

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    1    इंटरनेट कैसे रोका जाता है. ISP और BGP पर असर

इंटरनेट कई छोटे बड़े नेटवर्क से मिलकर बना होता है. इन्हें जोड़ने वाला सिस्टम BGP कहलाता है. अगर किसी बड़े राउटर या ISP के रूट बदल दिए जाएं या उसके मुख्य नेटवर्क को बंद कर दिया जाए, तो पूरे इलाके की कनेक्टिविटी गिर सकती है. रिपोर्ट्स में ऐसे संकेत मिले कि बड़े स्तर पर नेटवर्क कट हुआ. कई बार हमलावर पहले बड़े ISP के अहम हिस्सों को निशाना बनाते हैं या डेटा के रास्ते को बदल देते हैं.

    2    DDoS. एक साथ बहुत ज्यादा ट्रैफिक भेजना

DDoS हमले में हजारों संक्रमित मशीनें एक साथ किसी सर्वर पर ट्रैफिक भेजती हैं. जितना ज्यादा ट्रैफिक उतना ज्यादा दबाव. इससे सर्वर बंद हो सकता है. सरकारी या मीडिया वेबसाइट पर ऐसा हमला हो तो साइट खुलना मुश्किल हो जाता है. छोटे ISP और कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क को इसका असर पहले दिखता है.

    3    मैलवेयर और वाइपर. डेटा मिटा देना

कुछ हमले सिर्फ साइट बंद नहीं करते. वे सिस्टम के अंदर मालवेयर डाल देते हैं. वाइपर मालवेयर फाइलें मिटा देता है. इससे सिस्टम दोबारा चलाना मुश्किल हो जाता है. अगर बैकअप न हो तो नुकसान ज्यादा होता है. पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं जहां खास तौर पर सरकारी नेटवर्क में वाइपर का इस्तेमाल किया गया.

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    4    कम्युनिकेशन और मोबाइल नेटवर्क पर असर

सरकारी और मीडिया सिस्टम अक्सर सैटेलाइट लिंक और मोबाइल नेटवर्क पर चलते हैं. अगर सैटेलाइट गेटवे या मोबाइल स्विचिंग सेंटर पर हमला हो, तो पूरे देश का मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क धीमा या बंद हो सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया कि कुछ कम्युनिकेशन सिस्टम खास निशाने पर थे.

    5    पावर और कंट्रोल सिस्टम को निशाना बनाना

कुछ हमले बिजली ग्रिड, फैक्ट्री कंट्रोल सिस्टम या ट्रांसमिशन सिस्टम को भी निशाना बना सकते हैं. ये हमले ज्यादा खतरनाक होते हैं क्योंकि इनका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है. जैसे अस्पताल, पानी सप्लाई या ट्रैफिक सिस्टम. ऐसे सिस्टम में सुरक्षा कई बार कमजोर होती है, इसलिए बड़े स्तर के हमलावर इन्हें निशाना बनाते हैं.

    6    सूचना और मीडिया पर असर

सिर्फ तकनीकी हमला ही नहीं होता. कई बार मीडिया और सूचना सिस्टम को भी प्रभावित किया जाता है. अगर राज्य मीडिया बंद हो जाए या गलत जानकारी फैलने लगे, तो अफवाहें बढ़ सकती हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और क्लिप्स भी फैलते हैं, लेकिन उनकी सच्चाई जांचना जरूरी होता है. कई बार गलत जानकारी से घबराहट फैलती है जबकि असली स्थिति अलग होती है.

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