दुनियाभर में iPhone यूजर्स के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है. नई रिपोर्ट में कहा गया है कि एक खतरनाक स्पाईवेयर टूल की वजह से करोड़ों iPhone डिवाइस खतरे में आ सकते हैं.
रिसर्चर्स ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर टूल का पता लगाया है जो चुपचाप फोन में घुस सकता है और यूजर को पता भी नहीं चलता. रिपोर्ट के मुताबिक यह टूल इंटरनेट पर ऐक्टिव है और कुछ हैकर ग्रुप इसे इस्तेमाल कर रहे हैं.
बिना ऐप डाउनलोड किए हैक हो सकता है फोन
सबसे चिंता वाली बात यह है कि इस हमले के लिए यूजर को कोई ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती. सिर्फ एक इन्फेक्टेड वेबसाइट खोलना ही काफी हो सकता है. इसके बाद यह टूल फोन के सिस्टम में घुसकर डेटा तक पहुंच बना सकता है.
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इस स्पाईवेयर की खास बात यह है कि यह फोन के अंदर कई तरह की जानकारी तक पहुंच सकता है. इसमें मैसेज, ईमेल, लोकेशन और दूसरे पर्सनल डेटा शामिल हो सकते हैं. यही वजह है कि इसे काफी खतरनाक माना जा रहा है.
ऐपल की वेबसाइट के मुताबिक दुनिया भर में अब भी 25% यूजर्स अब भी पुराने वर्जन के iOS पर हैं. ऐसे में अगर कैलकुलेट करें तो लगभग 27 कोरड़ आईफोन यूजर्स पर ये संभावित खतरा मंडरा रहा है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह खतरा खास कर उन यूजर्स के लिए ज्यादा है जो पुराने सॉफ्टवेयर वर्जन पर हैं. कई लोग अपने फोन को समय पर अपडेट नहीं करते, जिससे ऐसे हमलों का खतरा बढ़ जाता है.
क्या है DarkSword?
इस मैलवेयर का नाम DarkSword रखा गया है जो तुरंत आईफोन को हैक कर सकता है. रिसर्चर्स ने अनुमान लगाया है कि इससे 220 से 270 मिलियन आईफोन्स खतरे में आ सकते हैं. क्योंकि वो पुराने सॉफ्टवेयर पर काम कर रहे हैं.
ये स्पाईवेयर iOS 18.4 और 18.6 वर्जन पर चल रहे स्मार्टफोन्स में आ सकता है और हैक कर सकता है. मुश्किल ये है कि .gov.ua जैसी वेबसाइट के जरिए मैलवेयर अटैक हुआ है जो देखने में असली लगती हैं.
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ऐपल के प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया है कि सॉफ्टवेयर अपडेट रख कर इस तरह के मैलवेयर से बचा जा सकता है. कंपनी ने कहा है कि ऐपल का सेफ ब्राउजिंग इस तरह के मलेशियस वेबसाइट को ब्लॉक करता है.
यह मामला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि अब तक ऐसे एडवांस्ड टूल सिर्फ चुनिंदा लोगों को निशाना बनाते थे. लेकिन अब इनका दायरा बढ़ रहा है और आम यूजर्स भी इसके दायरे में आ सकते हैं.
हालांकि Apple समय-समय पर सिक्योरिटी अपडेट जारी करता रहता है. लेकिन असली समस्या यह है कि सभी यूजर्स तुरंत अपडेट नहीं करते. यही वजह है कि करोड़ों डिवाइस अभी भी जोखिम में हो सकते हैं.