नई दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit में India Today Group की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुुरी ने भी शिरकत की. इस दौरान उन्होंने न्यूज मीडिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के फेयर, अकाउंटेबिलिटी और रिसिप्रोसिटी को लेकर 9-पॉइंट चार्टर पेश किया.
इस चार्टर का मकसद यह है कि मीडिया में AI का इस्तेमाल जिम्मेदारी से हो और जर्नलिज्म के साथ कोई नाइंसाफी न हो.
भारत मंडपम में हो रहे 'AI and Media: Opportunities, Responsible Pathways, and the Road Ahead' सेशन में देश के बड़े मीडिया हाउस के हेड्स मौजूद रहे. इस पैनल में कली पुरी ने चेतावनी दी कि अगर AI पर बिना किसी कंट्रोल और नियम के भरोसा किया गया तो पब्लिक डिस्कोर्स बिगड़ सकता है.
उन्होंने ये भी कहा कि अगर जर्नलिज्म को सिर्फ बड़े लैंग्वेज मॉडल्स के लिए कच्चा माल बना दिया गया और सेफगार्ड नहीं लगाए गए, तो इसका असर लोकतंत्र और समाज दोनों पर पड़ेगा.
इंडिया टुडे की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने कहा कि जर्नलिस्टिक कंटेंट की फेयर वैल्यू पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI सिस्टम न्यूज को कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं, इस पर ट्रांसपेरेंसी जरूरी है. उनके मुताबिक जर्नलिज्म लोकतांत्रिक जवाबदेही का एक अहम हिस्सा है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए.
Kalli Purie द्वारा पेश किया गया 9-पॉइंट चार्टर
जर्नलिस्टिक कंटेंट की फेयर वैल्यू तय होनी चाहिए और यह साफ हो कि AI सिस्टम न्यूज का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं.
ट्रेसएबिलिटी और एट्रिब्यूशन को लोकतांत्रिक सिद्धांत माना जाए.
जर्नलिज्म को पब्लिक गुड के तौर पर माना जाए.
ऐसे स्टोरीज़ को प्रमोट किया जाए जिनका सोशल इम्पैक्ट हो.
भरोसेमंद संस्थानों द्वारा बनाए गए वेरिफाइड कंटेंट की असली वैल्यू तय की जाए.
AI की गलत या भ्रामक जानकारी देने की गलती पर सख्त सजा हो.
लेगेसी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बीच रिवॉर्ड और पनिशमेंट में जो असंतुलन है, उसे खत्म किया जाए.
लोगों का अटेंशन एक लिमिटेड और महंगा संसाधन है, इसे इसी तरह ट्रीट किया जाए.
‘Magnificent Seven’ जैसी बड़ी टेक कंपनियों से रिसिप्रोसिटी होनी चाहिए, अगर वे कंटेंट और यूजर्स के अटेंशन जैसे रेयर मिनरल का इस्तेमाल कर रही हैं तो बदले में वे क्या दे रही हैं, यह साफ हो.
कली पुरी ने कहा कि इंडिया टुडे जैसे न्यूज ब्रांड सिर्फ जानकारी नहीं बांटते बल्कि लोगों की सोच और राय बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाते हैं. भारत जैसे देश में, जहां साक्षरता का स्तर हर जगह एक जैसा नहीं है, वहां यह जिम्मेदारी जवाबदेह संस्थानों के पास होनी चाहिए, न कि बिना पहचान वाले एल्गोरिदम्स के हाथ में.
उन्होंने यह भी साफ किया कि India Today Group टेक्नोलॉजी के खिलाफ नहीं है. उनके मुताबिक ग्रुप पिछले ढाई साल से AI का एक्टिव इस्तेमाल कर रहा है.
उन्होंने कहा कि उनके यहां AI एंकर्स, AI क्लोन्स, वॉयस क्लोनिंग और AI-बेस्ड स्टोरीटेलिंग का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन AI की जिम्मेदारी किसी न किसी इंसान के नाम से जुड़ी होनी चाहिए.
कली पुरी ने इंडिया टुडे के अप्रोच को 'AI सैंडविच' बताया, जहां शुरुआत में इंसानी सोच होती है, बीच में AI मदद करता है और आखिरी फैसला इंसानी एडिटर का होता है.
उन्होंने कहा कि वे AI कुकी-कटर वाली दुनिया का एक बिस्किट नहीं बनना चाहते, बल्कि अपनी स्टोरी खुद कहना चाहते हैं, AI की स्टोरी नहीं.
उन्होंने ‘डिजिटल इम्पीरियलिज्म’ का मुद्दा भी उठाया और कहा कि ग्लोबल टेक प्लेटफॉर्म्स अक्सर भारतीय मीडिया के साथ पश्चिमी देशों के मीडिया जैसा बर्ताव नहीं करते.
भारतीय रिपोर्टर्स जमीन पर जाकर रिसर्च करते हैं, रिसोर्स लगाते हैं और रिस्क लेकर ओरिजिनल स्टोरी लाते हैं. ऐसे में इंफ्लुएंसर्स या AI समरी उन स्टोरीज़ का फ्री में फायदा नहीं उठा सकते. उन्होंने मांग की कि AI सिस्टम द्वारा ओरिजिनल जर्नलिज्म के इस्तेमाल के लिए भुगतान होना चाहिए.
कली पुरी ने कहा कि न्यूज इकोसिस्टम में जो भी वैल्यू क्रिएट करता है, उस पर कंज्यूमर का भरोसा बचाने की जिम्मेदारी होती है. उन्होंने कंज्यूमर को केंद्र में रखते हुए एक Sovereign AI Stack की भी वकालत की.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अभी जर्नलिज्म को कमजोर किया गया तो बाद में उसे दोबारा मजबूत करने की कीमत कहीं ज्यादा चुकानी पड़ेगी. उनका कहना था कि उनका 9-पॉइंट चार्टर एक फ्रेमवर्क है ताकि जैसे-जैसे AI मीडिया को बदल रहा है, वह भरोसेमंद जर्नलिज्म की नींव को कमजोर करने की बजाय मजबूत करे.
AI Impact Summit में इस सुझाव पर इंडस्ट्री के कई बड़े नामों ने सहमति जताई. The Hindu, Times of India, Amar Ujala और Dainik Bhaskar जैसे मीडिया हाउस के लीडर्स ने इस फ्रेमवर्क को औपचारिक रूप देने पर सहमति दी.