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बिना स्क्रीन वाला iPhone? Apple की बड़ी तैयारी, ये गैजेट खत्म कर देगा फोन!

Apple AI Pin कब लॉन्च होगा? दरअसल कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ऐपल एक खास AI डिवाइस पर काम कर रहा है जिसमें कोई स्क्रीन नहीं होगी. इसे iPhone से कनेक्ट किया जा सकेगा. आइए जानते हैं.

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क्या है ऐपल का फ्यूचर प्लान
क्या है ऐपल का फ्यूचर प्लान

क्या फोन के बाद अगला बड़ा गैजेट सच में आने वाला है? Apple का नया AI Pin.. जो जेब में लगाते ही, स्क्रीन की जरूरत ही खत्म. सुनने में क्रांतिकारी लगता है. लेकिन असली सवाल ये है कि क्या ये सच में अगला iPhone मोमेंट है, या फिर एक और टेक एक्सपेरिमेंट जो हाइप में उछलकर जमीन पर आकर गिर जाएगा.

पिछले कुछ हफ्तों से ग्लोबल टेक मीडिया में Apple के AI Pin को लेकर जबरदस्त चर्चा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple एक वेयरेबल टेक डिवाइस पर काम कर रहा है. अगर आपको याद हो तो ऐपल के सीनियर एग्जिक्यूटिव ताहिर चौधरी ने Humane AI PIN लॉन्च किया था. हालांकि ये फ्लॉप हो गया, लेकिन इसका पेटेंट HP ने खरीद लिया. 

AI Pin का मतलब फोन निकालने की जरूरत नहीं, न टैप करना, न स्क्रोल करना. आप बोलेंगे, AI सुनेगा, समझेगा और काम करेगा. आइडिया सुनने में फ्यूचर जैसा लगता है, लेकिन असलियत में इसके पीछे टेक्नोलॉजी, रिस्क और बिजनेस का खेल कहीं ज्यादा गहरा है.

AI Pin का कॉन्सेप्ट बेसिक तौर पर वॉयस और विजन पर टिका है. डिवाइस में कैमरा, माइक्रोफोन और AI प्रोसेसिंग होगी. आप किसी दुकान की तरफ देखेंगे, तो AI बताएगा कि ये जगह क्या है. आप कुछ पूछेंगे, तो क्लाउड में चल रहा बड़ा AI मॉडल जवाब देगा. यही वजह है कि इस तरह के डिवाइस सिर्फ गैजेट नहीं, बल्कि डेटा कलेक्शन मशीन भी बन जाते हैं. सवाल ये है कि ये डेटा कहां जाएगा, कैसे प्रोसेस होगा और यूजर की प्राइवेसी पर इसका असर क्या पड़ेगा.

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यहीं से असली बहस शुरू होती है. Apple सालों से प्राइवेसी को अपना बड़ा हथियार बनाता आया है. अब अगर वही कंपनी AI Pin जैसी चीज लेकर आती है, जिसमें कैमरा हमेशा ऑन हो सकता है और हर वक्त सुनने वाला माइक्रोफोन हो सकता है, तो भरोसे का सवाल खड़ा होना लाजमी है. एक तरफ यूजर को हैंड्स-फ्री AI का सपना दिखाया जा रहा है, दूसरी तरफ डर ये भी है कि कहीं ये हमेशा निगरानी करने वाला गैजेट न बन जाए.

टेक इंडस्ट्री में कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि AI Pin जैसे डिवाइस अभी शुरुआती दौर में हैं. बैटरी लाइफ, नेटवर्क पर निर्भरता, AI की गलतियां और रोजमर्रा की जिंदगी में इसका असली यूज.. ये सब बड़े सवाल हैं. स्मार्टफोन इसलिए हिट हुआ क्योंकि उसने कैमरा, इंटरनेट और ऐप्स को एक स्क्रीन पर आसान बना दिया. अब स्क्रीन हटाने का दावा करना आसान है, लेकिन आदतें बदलना सबसे मुश्किल काम होता है.

यही वजह है कि Apple का ये कदम सिर्फ नया प्रोडक्ट लॉन्च नहीं, बल्कि एक बड़ा रिस्क है. अगर ये चला, तो टेक इंडस्ट्री का अगला चैप्टर शुरू होगा. अगर नहीं चला, तो इसे भी Google Glass और दूसरे फेल हुए वियरेबल्स की लिस्ट में डाल दिया जाएगा. यूजर के लिए सवाल साफ है.. क्या आप सच में अपनी रोजमर्रा की जिंदगी AI के हवाले करने को तैयार हैं.

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