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सर्वे रिपोर्ट: इंटरनेट पर प्राइवेसी के मामले में भारत सबसे बेफिक्र

बदलते समय के साथ भारत में इंटरनेट और सोशल नेटवर्क का चलन बढ़ा है. इससे भारतीय यूजर्स की पहुंचे देश से आगे विदेशों तक फैली है, लेकिन हमारे देश में इंटरनेट प्राइवेसी को लेकर ब्रेफिक्री का आलम सबसे अधिक है. ईएमसी इंडिया की ओर से जारी एक सर्वे रिर्पोट के मुताबिक 61 फीसदी भारतीय यूजर इंटरनेट पर काम के दौरान अपनी प्राइवेसी को महत्‍व नहीं देते हैं.

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प्राइवेसी इंडेक्‍स में भारतीय यूजर्स की प्राइवेसी सबसे अधिक खतरे में
प्राइवेसी इंडेक्‍स में भारतीय यूजर्स की प्राइवेसी सबसे अधिक खतरे में

बदलते समय के साथ भारत में इंटरनेट और सोशल नेटवर्क का चलन बढ़ा है. यकीनन इससे भारतीय यूजर्स की पहुंचे देश से आगे विदेशों तक फैली है, लेकिन इसका एक पक्ष यह भी है हमारे देश में इंटरनेट प्राइवेसी को लेकर ब्रेफिक्री का आलम सबसे अधिक है. ईएमसी इंडिया की ओर से जारी एक सर्वे रिर्पोट के मुताबिक 61 फीसदी भारतीय यूजर इंटरनेट पर काम के दौरान अपनी प्राइवेसी को महत्‍व नहीं देते हैं.

ऑनलाइन प्राइवेसी पर आधारित इस ग्‍लोबल सर्वे में 15 देशों के 15 हजार यूजर्स को शामिल किया गया. लेकिन सर्वे से जो नतीजे सामने आए वह भारत के लिए चौंकाने वाले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक 77 फीसदी भारतीय यूजर्स पासवर्ड या अपनी निजी जानकारी शेयर करने में संबंधित वे‍बसाइट और उसकी पॉलिसी पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं.

क्‍या रहे हैं प्राइवेसी घटने के कारण
रिपोर्ट के मुताबिक, आम तौर पर इंटरनेट यूजर्स को सुविधा के नाम पर सब कुछ चाहिए होता है और इसके लिए वह अपनी प्राइवेसी को दांव पर लगा देते हैं. 61 फीसदी भारतीय यूजर अपनी प्राइवेसी को दांव पर लगाने के लिए तैयार रहते हैं. हालांकि महिलाओं का रुझान पुरुषों के मुकाबले बहुत बेहतर है. 43 फीसदी पुरुष यूजर के मुकाबले 59 फीसदी महिला यूजर प्राइवेसी को महत्‍व देती हैं और जानकारी साझा करने से बचती हैं.

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ईएमसी कॉरपोरेशन के अध्‍यक्ष (भारत और सार्क) राजेश्‍ा जाने कहते हैं, 'इंटरनेट की दुनिया में भारत नया है. हर कोई इससे जुड़ रहा है इसलिए यहां रिटेल और ई-कॉमर्स वेबसाइट से खरीदारी का चलन और इसके लिए जानाकरी शेयर कने का ललक बढ़ा है. लेकिन यह चिंता का विषय है.'

जानते हैं, लेकिन कुछ नहीं करते
रिपोर्ट के मुताबिक 64 फीसदी भारतीय यूजर ने कई बार पासवर्ड हैक से लेकर डाटा चोरी का सामना किया है. लेकिन बावजूद इसके कोई कदम नहीं उठाया. ईएमसी रिपोर्ट के अनुसार, 41 फीसदी भारतीय नियमित तौर पर अपना पासवर्ड नहीं बदलते हैं. 28 फीसदी बगैर पासवर्ड के मोबाइल इस्‍तेमाल करते हैं. 21 फीसदी प्राइवेसी पॉलिसी नहीं पढ़ते. 21 फीसदी वेबसाइट पर अपनी प्राइवेसी सेटिंग नहीं बदलते. 51 फीसदी यह मानते हैं कि उनकी प्राइवेसी घटी है.

कैसे बचाए अपनी प्राइवेसी
सर्वे करने वाली संस्‍था ईएमसी इंडिया ने इंटरनेट यूजर्स को प्राइवेसी बनाए रखने के लिए कई सुझाव दिए हैं. इसके मुताबिक-

1) अलग-अलग अकाउंट के लिए एक ही पासवर्ड का इस्‍तेमाल न करें. नियमित तौर पर पासवर्ड बदलते रहें.
2) जहां ऑप्‍शन हो वहां ईमेल या ऑनलाइन अकाउंट के लिए मल्‍टी फैक्‍टर ऑथेंटिकेशन का प्रयोग करें.
3) कंपनी की ओर से दिए गए नेटवर्क का इस्‍तेमाल निजी प्रयोग के लिए न करें.
4) जहां जरूरी न हो वहां मोबाइल एप्‍स के लिए जियो लोकेशन ट्रैकिंग को बंद करें.
5) इस्‍तेमाल न होने पर एप्‍स बंद रखें.
6) हर जगह वाईफाई कनेक्‍शन पर विश्‍वास न करें.
7) सोशल मीडिया साइट के प्राइवेसी पॉलिसी के बारे में जानकारी रखें.
8) किसी अनजान साइट पर अपनी जानकारी साझा न करें.

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प्राइवेसी कंट्रोल और इस बारे में अधिक जानकारी के लिए www.emc.com/privacyindex पर जाएं.

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