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Tokyo Paralympics: डिस्कस थ्रो में योगेश ने जीता सिल्वर मेडल, देश लौटने पर हुआ भव्य स्वागत

टोक्यो पैरालंपिक्स में सिल्वर मेडल जीतने वाले योगेश कथुनिया का जब हरियाणा के बहादुरगढ़ पहुंचे तो उनका भव्य स्वागत किया गया. उनके स्वागत समारोह में कई लोग जमा हुए थे.

योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में जीता सिल्वर मेडल. योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में जीता सिल्वर मेडल.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • टोक्यो ओलंपिक में योगेश ने जीता है सिल्वर
  • पीएम मोदी ने जीत की दी थी बधाई
  • देश लौटने पर योगेश का हुआ भव्य स्वागत

टोक्यो पैरालंपिक्स (Tokyo Paralympics 2020) में भारत के योगेश कथुनिया ने डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है. सिल्वर मेडल जीतकर जब योगेश कथुनिया हरियाणा के बहादुरगढ़ में पहुंचे, लोग उनकी स्वागत में उमड़ आए.

योगेश कथुनिया के स्वागत के लिए जिला मजिस्ट्रेट श्यामलाल पुनिया और पूर्व विधायक नरेश कौशिक मौजूद रहे. नजफगढ़ रोड स्थित बालाजी मंदिर में उन्होंने भगवान के दर्शन किए. योगेश ने कहा कि अगले पैरालंपिक्स में वे सिल्वर मेडल को गोल्ड मेडल में बदलेंगे.

2022 में वर्ल्ड गेम्स आयोजित होने वाले हैं. योगेश कथुनिया का अगला टार्गेट विश्व चैम्पियनशिप में डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीतने का है. इसके अलावा से शॉट पुट कम्पटीशन में भी हिस्सा लेंगे. योगेश ने अपने माता-पिता और कोच को अपनी जीत का श्रेय दिया है. 

Paralympics: डिस्कस थ्रो में योगेश ने भारत की झोली में डाला सिल्वर मेडल 

योगेश ने बढ़ाया देश का मान

योगेश कथुनिया ने कहा है कि उन्हें हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से सम्मान मिला है. योगेश के कोच नवल सिंह ने कहा है कि सिल्वर मेडलिस्ट योगेश बहुत प्रतिभावान खिलाड़ी हैं. आने वाले दिनों में वे देश का नाम और रोशन करेंगे. योगेश के पिता ने कहा है कि बेटे पर उन्हें गर्व है. बेटे ने देश का सपना पूरा किया है.

योगेश के सम्मान में उमड़े लोग

योगेश का परिवार और खेल प्रेमी लोग अब खुली गाड़ी में बैठकर शहरभर में विजय जुलूस भी निकाल रहे. योगेश पुरुषों के डिस्कस थ्रो 56 फाइनल राउंड में दूसरे स्थान पर रहे थे. सोमवार को उन्होंने अपने छठे और आखिरी प्रयास में 44.38 मीटर डिस्कस थ्रो किया और सिल्वर मेडल हासिल कर लिया.  ब्राजील के बतिस्ता डॉस सैंटोस क्लॉडनी (45.25) ने इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल जीता. क्यूबा के डियाज अल्दाना लियोनार्डो (43.36) तीसरे स्थान पर रहे.   

योगेश की जीत पर पीएम मोदी ने दी थी बधाई

योगेश की जीत पर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन लगाकर बात की थी और ट्विटर पर उनकी परफॉर्मेंस को 'आउटस्टैंडिंग' बताया था. 3 मार्च 1997 को जन्मे योगेश जब 8 साल के थे, तभी उन्हें लकवा मार दिया. उनके हाथ और पैर ने काम करना बंद कर दिया था. काफी इलाज के बाद उनके हाथों ठीक हो गए लेकिन पैर वैसे ही रहे.

बहुत मेहनत के बाद योगेश व्हीलचेयर से अपने पैरों पर आ गए थे. उनकी स्कूली पढ़ाई चंडीगढ़ के एक आर्मी स्कूल से हुई. उन्होंने वहां डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो दोनों में हाथ आजमाया. हालांकि, बाद में उन्होंने डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो दोनों में हाथ आजमाया लेकिन बाद में सफलता उन्हें डिस्कस थ्रो में मिली. और आज दुनिया उनकी उड़ान देख रही है.
 

 

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