scorecardresearch
 

... जब द्रविड़ ने रहाणे से कहा था- टीम इंडिया में सेलेक्शन के पीछे मत भागो

मध्यक्रम के बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे भारतीय टेस्ट टीम की अहम कड़ी हैं. 18-22 जून तक साउथैम्पटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के फाइनल में रहाणे से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी. हालांकि रहाणे के लिए टीम इंडिया का सफर आसान नहीं रहा है.

Advertisement
X
Dravid and Rahane (File)
Dravid and Rahane (File)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मध्यक्रम के बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे भारतीय टेस्ट टीम की अहम कड़ी हैं
  • WTC के फाइनल में रहाणे से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी

मध्यक्रम के बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे भारतीय टेस्ट टीम की अहम कड़ी हैं. 18-22 जून तक साउथैम्पटन में न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के फाइनल में रहाणे से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी. हालांकि रहाणे के लिए टीम इंडिया का सफर आसान नहीं रहा है. करियर की शुरुआत में लगातार रन बनाने के बावजूद रहाणे को भारतीय टीम में मौका नही मिला था, जिसके चलते वह काफी परेशान रहते थे. तब राहुल द्रविड़ की थी गई सलाह रहाणे के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई थी.

जिसके बाद 2011 में उन्हें भारत के लिए डेब्यू करने का मौका मिला था. अजिंक्य रहाणे ने ईएसपीएन क्रिकइंफो के खास शो में पूर्व क्रिकेटर दीपदास गुप्ता के साथ बातचीत में इसका खुलासा किया. अजिंक्य रहाणे ने कहा, 'मुझे याद है कि 2008-09 के दिलीप ट्रॉफी के फाइनल में हम साउथ जोन के खिलाफ खेल रहे थे, राहुल भाई भी थे. उस फाइनल में मैंने 165 और 98 रनों की इनिंग्स खेली थी.' 

रहाणे ने आगे कहा, 'राहुल भाई ने मुझे खेल के बाद बुलाया और कहा कि मैंने आपके बारे में बहुत सुना है, आप काफी रन बना रहे हो. स्वाभाविक तौर पर आप भारत के लिए खेलने की उम्मीद कर रहे होंगे. लेकिन आप सिर्फ खेल पर ध्यान दो, जल्द मौका मिल जाएगा. आपको बस इतना कहूंगा कि उसके पीछे मत भागो, वह तुम्हारा पीछा करेगा. राहुल भाई जैसे व्यक्ति इंसान की सलाह से मुझे वास्तव में बहुत प्रेरणा मिली. उन्होंने काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं. अगले सीजन में मैंने फिर हजार रन बनाए और उसके दो साल बाद मेरा चयन हो गया.' 

Advertisement

33 साल के रहाणे ने कहा, 'रणजी ट्रॉफी के मेरे शुरुआती सीजन में पहले तीन या चार मैच अच्छे नहीं रहे थे. लोग कहने लगे कि मुझे टीम से हटाकर क्लब क्रिकेट में वापस भेज दिया जाना चाहिए. लेकिन उस समय हमारे कोच रहे प्रवीण आमरे ने मेरा बचाव किया था. आमरे ने कहा कि था कि एक बार किसी को टीम में चुने हैं, तो उसे कम से कम 7-8 मैच खेलने देना चाहिए. इसके बाद आखिरी तीन मैचों में मैंने काफी रन बनाए और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा. अगले पांच सीजन मैंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में हर बार हजार से अधिक रन बनाए. पहले दो-तीन वर्षों के बाद मैं सोचने लगा कि मुझे किसी भी दिन टीम इंडिया का बुलावा मिल सकता है. लेकिन जितना अधिक मैंने इसके बारे में सोचा, यह उतना ही दूर होता गया.'

Advertisement
Advertisement