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नेशनल हॉकी प्लेयर नेहा दो जून की रोटी के लिए बेच रहीं फास्ट फूड, जिंदगी बदहाल

हमीरपुर में नेशनल हॉकी खिलाड़ी नेहा बेहद ही बुरे दौर से गुजर रही हैं. पाई पाई के लिए मोहताज नेहा को रेहड़ी लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. नेहा अपने बीमार पिता और छोटी बहन के साथ बाजार में रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचकर किसी तरह से अपना घर चला रही हैं.

हॉकी खिलाड़ी नेहा रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचने को मजबूर हॉकी खिलाड़ी नेहा रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचने को मजबूर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • हॉकी खिलाड़ी रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचने को मजबूर
  • हमीरपुर की झुग्गी-झोंपड़ी में रहती हैं हॉकी प्लेयर नेहा
  • नेहा और उसके परिवार ने सरकार से मांगी मदद

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में नेशनल हॉकी खिलाड़ी नेहा बेहद ही बुरे दौर से गुजर रही हैं. पाई पाई के लिए मोहताज नेहा को रेहड़ी लगाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. नेहा अपने बीमार पिता और छोटी बहन के साथ बाजार में रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचकर किसी तरह से अपना घर चला रही हैं. नेहा ने केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से मदद की गुहार लगाई है.

नेहा के पिता चंद्र सिंह पिछले लंबे समय से बीमार हैं. उनका टांडा मेडिकल कॉलेज में इलाज हुआ और कई महीनों से बिस्तर पर हैं. वो मछली कॉर्नर चलाते थे. जिसकी वजह से पूरे परिवार की जिम्मेदारी अब नेहा और उनकी छोटी बहन निकिता पर आ गई है. छोटी बहन निकिता बीए की पढ़ाई कर रही है और भाई अंकुश बाल स्कूल हमीरपुर में पढ़ रहा है. 

हॉकी खिलाड़ी नेहा रेहड़ी पर फास्ट फूड बेचने के लिए मजबूर 

नेहा अपने परिवार के साथ छोटी सी जर्जर झुग्गी झोपड़ी में रहती हैं. कुछ समय पहले नगर परिषद हमीरपुर के वार्ड नंबर दस के पास सरकार ने चार मरले जमीन यानी 80 गज दी थी.  लेकिन पास पैसे न होने की वजह से वो उस पर घर नहीं बना सकीं. नेहा की मां निर्मला देवी का कहना है कि अगर बेटी को नौकरी मिल जाए तो उनकी मुश्किल काफी आसान हो जाएगी.  

हमीरपुर की झुग्गी-झोंपड़ी में रहती हैं हॉकी प्लेयर नेहा
हमीरपुर की झुग्गी-झोंपड़ी में रहती हैं हॉकी प्लेयर नेहा

 

पैसों के लिए खेलती हैं हॉकी 

नेहा का कहना है कि उन्हें खेल में करियर की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं है. वो सिर्फ अपने परिवार के गुजारे के लिए मैच खेल लेती हैं ताकि कुछ पैसे मिल जाएं. आठवीं कक्षा के दौरान ही उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के धर्मशाला हॉस्टल के लिए हुआ था. उसने राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में सिल्वर मेडल अपने नाम किया. हॉकी में जूनियर वर्ग में दो नेशनल खेले. वेटलिफ्टिंग में पंजाब की तरफ से नेशनल स्पर्धा में हिस्सा लिया. उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द घर के निर्माण के लिए उन्हें पैसा दिया जाए. राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों को रोजगार भी दिया जाए. 

हताशा की वजह से भाई-बहनों को खेल से दूर रखा 

इसे अलावा नेहा ने बताया कि जब खेल अकादमियों को खिलाड़ियों की जरुरत होती है तब तो खिलाड़ियों को बुलाया जाता है. लेकिन खेल खत्म होने पर खिलाडियों को भुला दिया जाता है. उन्होंने बताया कि कई बार खेल के दौरान चोटिल भी हुई है, लेकिन कोई सुध किसी ने भी नहीं ली. इस हताश की वजह से उन्होंने अपने भाई बहन को भी खेलों से दूर रखा. 

नेहा की मां निर्मला देवी ने कहा कि अधिकारियों का तो हमें पूरा सहयोग मिल रहा है. लेकिन बेटी को नौकरी न मिलने से उनकी विपदा दोगुना हो गई है. उन्होंने बताया कि उधार लेकर मकान का निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन अब यह काम भी पति के बीमार होने के बाद अधर में लटक गया है. 

 

माता-पिता से सरकार से बेटी के लिए मांगी नौकरी
माता-पिता से सरकार से बेटी के लिए मांगी नौकरी

 

 

नेहा के परिवार ने सरकार से मांगी नौकरी 

बीमारी पिता चंद्र सिंह ने बताया कि बेटी ने नेशनल हॉकी में कई बार खेला है लेकिन नौकरी तक नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि बहुत बार भर्तियों में भी हिस्सा लिया है, लेकिन कहीं भी नौकरी के लिए मौका नहीं मिला. उन्होंने बताया कि केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से भी गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई तक नहीं हुई. उन्होंने सरकार से मांग की है कि जल्द नेहा को नौकरी दी जाए. 

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