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मर गया है IOA अधिकारियों का जमीर: बीवीपी राव

महीनों से निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) खुद को सुधारने की तो कोई कोशिश कर नहीं रहा है बल्कि बेशर्मी पर उतरते हुए वह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से भी जुबानी जंग में उलझ गया है. खेल मंत्रालय भी आईओए की छवि सुधारने के लिए कुछ नहीं कर पाया है. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने आईओसी को खुद एक चिट्ठी लिखकर आईओए के नए प्रस्ताव को स्वीकार ना करने के लिए कहा था.

सुरेश कलमाडी सुरेश कलमाडी

महीनों से निलंबित भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) खुद को सुधारने की तो कोई कोशिश कर नहीं रहा है बल्कि बेशर्मी पर उतरते हुए वह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से भी जुबानी जंग में उलझ गया है. खेल मंत्रालय भी आईओए की छवि सुधारने के लिए कुछ नहीं कर पाया है. हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने आईओसी को खुद एक चिट्ठी लिखकर आईओए के नए प्रस्ताव को स्वीकार ना करने के लिए कहा था.

आईओसी भी लगातार इस बात के लिए दबाव बना रही है कि भारतीय ओलंपिक संघ दागी अधिकारियों को चुनाव में हिस्सा न लेने दे. आईओसी नहीं चाहती कि भ्रष्टाचार और दूसरे आपराधिक मुकदमे झेल रहे अधिकारी किसी भी तरह भारतीय ओलंपिक संघ का हिस्सा बनें. इस संबंध में इंडिया टुडे ने आईओए की जिद और मंत्रालय की कमजोर प्रतिक्रिया को लेकर पूर्व खेल अधिकारी बीवीपी राव से बातचीत की. राव इस वक्त एक स्वतंत्र क्लीन स्पोर्ट्स इंडिया ग्रुप का नेतृत्व कर रहे हैं.

सवाल- खेल मंत्रालय ने आईओसी को पत्र भेजा है. क्या वह आईओए के खिलाफ आईओसी की मदद लेना चाहता है?
जवाब- जितेंद्र सिंह का पत्र एक बहादुरी भरा कदम है. खेल मंत्रालय के पास और कोई चारा भी नहीं है. लेकिन एक साफ है कि आईओए के अधिकांश मौजूदा अधिकारी स्वार्थी हो गए हैं. उनका कोई जमीर नहीं है.

सवाल - जब आपने आईओए अधिकारियों से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने को लेकर बात की तो उन्होंने कहा कि देश का कानून उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकेगा.
जवाब - ये कोई तर्क नहीं है. क्योंकि आईओसी के कानूनों के अनुसार दागी छवि वाले लोग सिस्टम में नहीं होने चाहिए. वैसे भी ओलंपिक के मूल्यों को सम्मान किया जाना चाहिए.

सवाल - आईओए भारत की छवि दांव पर लगाकर दागियों को बचाने के लिए इतना आमादा क्यों है?
जवाब - उन्हें देश की इज्जत की चिंता नहीं है. वो तो हर कीमत पर खुद को बचाना चाहते हैं.

सवाल - आपकी संस्था भी आईओए में चल रही धांधली को खत्म करने के लिए आगे आई है. आपने क्या प्रयास किए हैं?
जवाब - 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान और उसके बाद भारत में क्या हो रहा है, इस बारे में हम लगातार आईओसी को सूचित करते रहते हैं. राष्ट्रमंडल खेलों पर कैग रिपोर्ट की जानकारी भी हमने आईओसी को दी थी. भारत सरकार और आईओए कुछ भी आईओसी को नहीं बताती.

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