दिल्ली में चल रहे इंडिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट 2026 के दौरान एक अनोखी और चौंकाने वाली घटना सामने आई. बुधवार (14 जनवरी) को इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम की एक दर्शक दीर्घा में बंदर दिखाई दिया, जिसने आयोजकों की पहले से मौजूद परेशानियों में और इजाफा कर दिया. आयोजकों ने इस घटना को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया है.
बंदर दिखाई देते ही स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के बीच हलचल मच गई. तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे. हालांकि राहत की बात यह रही कि बंदर ने किसी मैच या अभ्यास सत्र में बाधा नहीं डाली.
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आयोजकों ने कहा कि सुरक्षा और संचालन से जुड़े कर्मचारियों की टीम पिछले 20 दिनों से बिना रुके काम कर रही है और यह पहली बार हुआ है जब किसी जानवर के प्रवेश की सूचना मिली है. बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के सचिव संजय मिश्रा ने कहा कि संभवतः स्टेडियम का कोई दरवाजा गलती से खुला रह गया होगा, जिससे बंदर भीतर आ गया.
BAI सचिव ने दी सफाई
संजय मिश्रा ने कहा, 'हमने सभी प्रवेश द्वारों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं. स्टेडियम चारों ओर से घने हरियाली वाले क्षेत्र में स्थित है, इसलिए प्राकृतिक रूप से ऐसे जानवरों का आना संभव है. हम संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं.'
एक फोटोग्राफर ने बंदर की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर डालीं, जिसके बाद मामला और चर्चा में आ गया. कुछ ही देर बाद साउथ कोरिया के मेन्स डबल्स खिलाड़ी कांग मिन ह्युक ने भी केडी जाधव हॉल में एक बंदर के दिखने का वीडियो साझा किया. केडी जाधव हॉल इस टूर्नामेंट का आधिकारिक ट्रेनिंग वेन्यू है.
टूर्नामेंट की शुरुआत से ही विदेशी खिलाड़ियों ने दिल्ली के माहौल और सुविधाओं पर सवाल उठाए हैं. डेनमार्क की खिलाड़ी मिया ब्लिचफेल्ट ने पहले दिन ही स्टेडियम परिसर को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया था. इसी बीच विश्व नंबर 2 खिलाड़ी एंडर्स एंटोनसेन ने खुलासा किया कि दिल्ली के अत्यधिक प्रदूषण के कारण लगातार तीसरे साल उन्होंने इस टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया.
संजय मिश्रा ने इस टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि भारत आए बिना कोई खिलाड़ी यहां की वास्तविक परिस्थितियों का मूल्यांकन नहीं कर सकता. बंदर के अचानक प्रवेश, ट्रेनिंग एरियाज में सुरक्षा खामियों और विदेशी खिलाड़ियों की शिकायतों ने आयोजकों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इंडिया ओपन 2026 पहले ही कई कारणों से सवालों के घेरे में है और यह घटना व्यवस्थाओं को लेकर नई बहस छेड़ सकती है.