र्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के फॉर्मेट में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है. इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) जल्द ही इस पर अंतिम फैसला ले सकती है. अप्रैल के आखिर या मई की शुरुआत में होने वाली ICC मीटिंग में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने की पूरी संभावना है.
WTC की शुरुआत 2019 में हुई थी, जबकि पहला फाइनल 2021 में खेला गया. यह चैम्पियनशिप दो साल के साइकल में आयोजित होती है और फिलहाल इसका चौथा सेशन चल रहा है, जो 2027 में समाप्त होगा.
क्या WTC में बढ़ जाएगी टीमों की संख्या
क्रिकइंफो की खबर के अनुसार- अभी WTC में कुल 9 टीमें हिस्सा लेती हैं, लेकिन नई सिफारिश के तहत इसे बढ़ाकर 12 करने की योजना है. अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो जिम्बाब्वे, अफगानिस्तान और आयरलैंड को भी इसमें शामिल कर लिया जाएगा.
इन तीनों देशों को टेस्ट स्टेटस तो मिला हुआ है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में इन्हें बड़ी टीमों के खिलाफ खेलने के मौके बेहद कम मिलते हैं. ऐसे में यह बदलाव उनके लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है.
WTC में एक टेस्ट मैच भी होगा शामिल
फिलहाल WTC के नियमों के मुताबिक किसी भी सीरीज में कम से कम दो टेस्ट मैच होना जरूरी है. लेकिन अब एक टेस्ट मैच को भी WTC साइकल में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया है.
इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण आर्थिक और व्यावहारिक है. छोटी टीमों की मेजबानी करना कई बार बड़ी टीमों के लिए घाटे का सौदा साबित होता है. ऐसे में एक टेस्ट मैच को शामिल करने से खर्च कम होगा और मुकाबलों की संख्या बढ़ेगी.
पहले भी आया था बड़ा प्रस्ताव
न्यूजीलैंड के पूर्व बल्लेबाज रोजर टूज की अगुवाई में ICC ने WTC सुधार के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाया था. इस ग्रुप ने नवंबर 2025 में WTC को दो डिवीजन में बांटने का सुझाव दिया था, लेकिन उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया.अब यही ग्रुप नई सिफारिशों के साथ सामने आने वाला है, जिसमें टीमों की संख्या बढ़ाने और एक टेस्ट को शामिल करने जैसे अहम बदलाव शामिल हैं.
WTC का मौजूदा फॉर्मेट क्या है?
अभी WTC में हर टीम कुल 6 सीरीज खेलती है, जिसमें 3 घरेलू और 3 विदेशी होती हैं. हर सीरीज में कम से कम 2 और अधिकतम 5 टेस्ट मैच खेले जाते हैं. हाल ही में भारत और अफगानिस्तान के बीच जून में एक टेस्ट मैच प्रस्तावित है, लेकिन यह WTC का हिस्सा नहीं होगा. इसी तरह इंग्लैंड और आयरलैंड के बीच खेला गया एकमात्र टेस्ट भी WTC में शामिल नहीं था.
WTC में बदलाव क्यों जरूरी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक ICC का फोकस टेस्ट क्रिकेट को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनाना है. छोटे देशों को ज्यादा मौके देने के साथ-साथ बड़े देशों के लिए इसे आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाना भी इस बदलाव का मकसद है. अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है.