महिला प्रीमियर लीग का चौथा सीजन अब बस शुरू होने वाला है… और साथ ही लौट रही है WPL की सबसे बड़ी और सबसे चर्चित राइवलरी. मुंबई इंडियंस (MI) बनाम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB)- एक मुकाबला, जिसने लीग को पहचान दी, फैन्स को बांधा और हर बार क्रिकेट को इमोशन में बदल दिया. ये सिर्फ दो टीमें नहीं, ये दो सोच, दो क्रिकेटिंग कल्चर और मैदान पर टकराते दो जबरदस्त जज्बात हैं.
अब तक WPL में इन दोनों के बीच 7 मुकाबले खेले जा चुके हैं. नतीजों की किताब कहती है कि मुंबई इंडियंस 4-3 से आगे है. लेकिन इस आंकड़े के पीछे छुपी कहानियां कहीं ज्यादा दिलचस्प हैं. कहीं आखिरी ओवर का तनाव, कहीं एक कैच जिसने मैच का रुख पलट दिया, तो कहीं एक पारी जिसने फैन्स को खड़ा होकर ताली बजाने पर मजबूर कर दिया.
MI: सिस्टम, स्थिरता और बड़े मैच का मिजाज
मुंबई इंडियंस की पहचान रही है- एक मजबूत सिस्टम. चाहे कप्तानी का दबाव हो या रन-चेज की उलझन, MI अक्सर सबसे मुश्किल लम्हों में सबसे साफ क्रिकेट खेलती नजर आई है. उनके लिए जीत अचानक नहीं आती, वो उसे प्लान करती हैं. यही वजह है कि इस प्रतिद्वंद्विता में उन्हें मामूली... लेकिन अहम बढ़त मिली हुई है.
RCB: उम्मीद, जुनून और स्मृति मंधाना का नेतृत्व
RCB की कहानी अलग है. ये टीम हर सीजन अपने साथ उम्मीदों का बोझ भी लाती है और उसे तोड़ने का साहस भी. इस बार सारी निगाहें स्मृति मंधाना पर होंगी. उनका बल्ला सिर्फ रन नहीं बनाता, वो माहौल बदलता है. जब स्मृति लय में होती हैं, तो RCB सिर्फ प्रतिस्पर्धी नहीं रहती- वो खतरनाक बन जाती हैं.
खेल, इमोशन का और इस मुकाबले में ये बात सबसे ज्यादा फिट बैठती है. एक चौका सिर्फ चार रन नहीं होता, वो किसी शहर की खुशी बन जाता है. एक विकेट सिर्फ एक खिलाड़ी का आउट होना नहीं, बल्कि लाखों दिलों की सांसें थमने जैसा होता है.
9 जनवरी: बराबरी या बढ़त?
अब बड़ा सवाल यही है-
9 जनवरी को क्या RCB इस प्रतिद्वंद्विता को 4-4 पर ला पाएगी?
या फिर मुंबई इंडियंस अपनी बढ़त को और मजबूत करेगी?
WPL सीजन-4 की शुरुआत के साथ ही ये मुकाबला बता देगा कि आने वाला सीजन किस मूड में है- चुनौती का या दबदबे का. प्रसारण- Star Sports Network & JioHotstar पर.
9 जनवरी, शाम 7.30 बजे. (Dr DY Patil Sports Academy, Navi Mumbai)
स्टेज तैयार है, किरदार तय हैं और कहानी फिर से लिखी जाने को तैयार है.
क्योंकि जब MI और RCB आमने-सामने हों… तो क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं रहता, एक एहसास बन जाता है.