आईपीएल में ज्यादातर बल्लेबाज 46 रनों की पारी खेलकर तारीफ बटोरते हैं. लेकिन वैभव सूर्यवंशी उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां 46 रन भी लोगों को अधूरे लगने लगे हैं. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ यही हुआ. सिर्फ 21 गेंदों में 46 रन, 200 से ऊपर का स्ट्राइक रेट, स्टेडियम में शोर... लेकिन आउट होते ही चर्चा शुरू- 'फिर बड़ी पारी नहीं आई.'
राजस्थान रॉयल्स के लिए यही सबसे दिलचस्प और सबसे खतरनाक संकेत है. टीम को एक ऐसा बल्लेबाज मिल चुका है, जो मैच की दिशा 15 गेंदों में बदल सकता है. मगर अब सवाल सिर्फ विस्फोट का नहीं, विस्फोट को अंत तक ले जाने का है.
दिल्ली के खिलाफ वैभव ने शुरुआत ऐसी की, जैसे पावरप्ले में ही मैच छीन लेने उतरे हों... तेज गेंदबाजों पर हमला, स्पिनरों पर दबाव और फील्डरों को सिर्फ दर्शक बना देना… ये सब उनकी बल्लेबाजी का हिस्सा बन चुका है. लेकिन जैसे ही गेंद की रफ्तार बदली, कहानी भी बदल गई. मधव तिवारी की स्लोअर गेंद पर वैभव चूक गए और एक बार फिर उनका अर्धशतक अधूरा रह गया.
No first-ball six from #VaibhavSooryavanshi? That’s simply not in the script. 💥#LungiNgidi becomes the latest bowler to disappear into the teenager’s growing highlight reel. Follows it up with a third-ball maximum against #MitchellStarc! 🔥#TATAIPL Race to Playoffs 2026 👉… pic.twitter.com/Bj3mr1cpux
— Star Sports (@StarSportsIndia) May 17, 2026
माधव तिवारी की गेंद और वैभव ने गंवाया विकेट
7.3 ओवर
माधव तिवारी की 129 किमी प्रति घंटे की स्लोअर गेंद पर वैभव सूर्यवंशी चकमा खा गए. ऑफ स्टंप लाइन पर आई गेंद पर उन्होंने क्रीज में पीछे जाकर सीधा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन टाइमिंग बिगड़ गई. गेंद बल्ले पर जल्दी आ गई और लॉन्ग ऑफ पर खड़े डेविड मिलर ने दाईं तरफ दौड़ते हुए शानदार कैच लपक लिया. ग्राफिक्स के मुताबिक मिलर ने यह कैच लेने के लिए 24 मीटर की दूरी तय की. वैभव की तूफानी पारी यहीं थम गई और राजस्थान का स्कोर 89/2 हो गया.
वैभव की पिछली 10 पारियां-
39, 78, 0, 46, 8, 103, 43, 4, 36, 46
यहीं से 'कमजोरी' वाला नैरेटिव शुरू हुआ. क्या वैभव सिर्फ तेज गेंदों के खिलाफ खतरनाक हैं? क्या धीमी गेंदें उनकी रफ्तार रोक सकती हैं?
राजस्थान रॉयल्स ने इस सवाल को तुरंत खारिज कर दिया. बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ ने साफ कहा कि अगर विरोधी टीमों को लगता है कि स्लो बॉल से वैभव रुक जाएंगे, तो वे यही कोशिश जारी रखें. टीम मैनेजमेंट इसे कमजोरी नहीं, सीखने की प्रक्रिया मान रहा है.
दरअसल, राजस्थान को वैभव में सिर्फ एक बल्लेबाज नहीं, एक 'टेम्पो-सेटर' दिख रहा है. वही रोल, जो कभी वीरेंद्र सहवाग निभाते थे. मैदान पर आते ही मैच की गति बदल देना, गेंदबाजों को उनकी लाइन-लेंथ भुला देना और विपक्ष को बैकफुट पर धकेल देना. फर्क सिर्फ इतना है कि सहवाग अक्सर अपनी शुरुआत को शतक में बदल देते थे, जबकि वैभव फिलहाल उस आखिरी दरवाजे तक पहुंचकर लौट रहे हैं.
टीम के भीतर भी संदेश साफ है- वैभव को बदला नहीं जाएगा. उनसे 'सुरक्षित क्रिकेट' खेलने की उम्मीद नहीं है. राजस्थान जानता है कि अगर इस खिलाड़ी की आक्रामकता कम हुई, तो उसका सबसे बड़ा हथियार ही खत्म हो जाएगा. टी20 क्रिकेट में ऐसे बल्लेबाज कम होते हैं, जो 20 गेंदों में मैच का मूड बदल दें. वैभव उन्हीं दुर्लभ खिलाड़ियों में शामिल होते दिख रहे हैं.
इसीलिए राठौड़ ने विराट कोहली का उदाहरण देते हुए कहा कि हर बल्लेबाज का अपना रास्ता होता है. कोई टाइम लेकर खेलता है, कोई मैच पर टूट पड़ता है. जरूरी ये नहीं कि तरीका कैसा है, जरूरी ये है कि खिलाड़ी अपने खेल पर कितना भरोसा रखता है. राजस्थान फिलहाल वैभव को बदलने नहीं, उन्हें और बेखौफ बनाने की कोशिश कर रहा है.
दिलचस्प बात ये है कि वैभव की 'समस्या' वही है, जिसका सपना हर टीम देखती है- खिलाड़ी तेजी से रन बना रहा है, लेकिन लोग उससे और ज्यादा चाहते हैं. यह बताता है कि उम्मीदें कितनी तेजी से बढ़ चुकी हैं.
राजस्थान को भरोसा है कि जिस दिन वैभव 30-40 रन की शुरुआत को 90 या 100 तक ले गए, उस दिन सिर्फ मैच नहीं बदलेंगे, टूर्नामेंट का समीकरण बदल जाएगा. शायद उसी दिन आईपीएल को उसका अगला बड़ा सुपरस्टार भी मिल जाएगा.