इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन की 28 मार्च से हो रही है. ओपनर मुकाबला बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की टीम्स आमने-सामने होंगी. पिछले कुछ सीजन की तरह इस बार भी आईपीएल में 10 टीमें भाग लेने जा रही हैं.
इनमें पंजाब किंग्स (PBKS), दिल्ली कैपिटल्स (DC), रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB), मुंबई इंडियंस (MI), चेन्नई सुपर किंग्स (CSK), राजस्थान रॉयल्स (RR), लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG), कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR), गुजरात टाइटन्स (GT) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) शामिल हैं.
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) आज भले ही दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग बन चुकी है, लेकिन इसकी शुरुआत से लेकर अब तक कई टीमें ऐसी भी रहीं, जो कुछ समय खेलने के बाद हमेशा के लिए गायब हो गईं. 2008 से अब तक कुल 5 फ्रेंचाइजी टीम्स ऐसी रही हैं, जो IPL का हिस्सा बनने के बाद अलग-अलग कारणों से लीग से बाहर हो गईं और फिर कभी वापसी नहीं कर सकीं.
चार्जर्स की कहानी सबसे अजब
हैदराबादी टीम डेक्कन चार्जर्स की कहानी सबसे अनोखी रही. 2008 में आखिरी स्थान पर रहने वाली यह टीम 2009 में एडम गिलक्रिस्ट की कप्तानी में चैम्पियन बनी. इसके बाद 2010 में सेमीफाइनल और 2011 में प्लेऑफ तक पहुंची. लेकिन आर्थिक संकट ने टीम को खत्म कर दिया. फ्रेंचाइजी मालिक कर्ज में डूब गए और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) को जरूरी बैंक गारंटी नहीं दे पाए. सिर्फ एक दिन की देरी के कारण बीसीसीआई ने डेक्कन चार्जर्स का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया. 2013 में डेक्कन चार्जर्स की जगह सनराइजर्स हैदराबाद को शामिल किया गया.

एक सीजन बाद ही खत्म हुआ कोच्चि का खेल
कोच्चि टस्कर्स केरला साल 2011 में आईपीएल में शामिल हुई, लेकिन सिर्फ एक सीजन के बाद ही बाहर हो गई. कप्तान महेला जयवर्धने, ब्रैंडन मैक्कुलम और रवींद्र जडेजा जैसे सितारे उस सीजन में टीम का हिस्सा थे. हालांकि इस टीम ने 14 में से 6 मैच जीते और पांचवें स्थान पर रही. मालिकों के बीच विवाद और बैंक गारंटी (₹156 करोड़) ना देने के कारण बीसीसीआई ने कॉन्ट्रैक्ट समाप्त कर दिया. बाद में इस मामले में अदालत ने बीसीसीआई को दोषी ठहराते हुए ₹800 करोड़ से ज्यादा मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन टीम की वापसी नहीं हो सकी.
वॉरियर्स ने तीन सीजन खेले और निराश किया
पुणे वॉरियर्स इंडिया ने भी 2011 के सीजन के जरिए आईपीएल में एंट्री ली, लेकिन सिर्फ तीन सीजन बाद यह टीम लीग से बाहर हो गई. यह फ्रेंचाइजी टीम सहारा ग्रुप के मालिकाना हक में थी और उस समय करीब 370 मिलियन डॉलर (लगभग ₹3000 करोड़) में खरीदी गई थी, जिससे यह उस दौर की सबसे महंगी टीम बन गई थी. वॉरियर्स की परेशानी शुरुआत से ही शुरू हो गई थी. सहारा ग्रुप ने टीम के लिए बोली 94 मैचों के सीजन के आधार पर लगाई थी, लेकिन बाद में बीसीसीआई ने मैचों की संख्या घटाकर 74 कर दी.
सहारा ने इसके बदले फ्रेंचाइजी फीस कम करने की मांग की, लेकिन बीसीसीआई ने यह मांग ठुकरा दी. यहीं से दोनों के बीच विवाद गहराता चला गया. समय के साथ सहारा ग्रुप और बीसीसीआई के रिश्ते और खराब होते गए. 2013 में जब बीसीसीआई ने बकाया फीस वसूलने के लिए बैंक गारंटी को भुना लिया, तो सहारा ग्रुप के प्रमुख सुब्रत रॉय ने टीम को आईपीएल से बाहर निकालने का फैसला कर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी फ्रेंचाइजी के साथ न्याय नहीं किया जा रहा.

पुणे वॉरियर्स इंडिया का प्रदर्शन भी खास नहीं रहा. इस टीम ने 3 सीजन खेले, लेकिन एक भी बार प्लेऑफ में नहीं पहुंची. तीसरे सीजन में तो इस टीम ने 3 कप्तान बदले. टीम की कप्तानी पहले सीजन में सौरव गांगुली ने संभाली. युवराज सिंह जैसे स्टार खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा रहे, लेकिन टीम का संयोजन कभी जम नहीं पाया. भारी निवेश और बड़े नामों के बावजूद यह टीम आईपीएल इतिहास की उन टीम्स में शामिल हो गई, जिन्हें आज बहुत कम लोग याद करते हैं.
लॉयन्स और सुपरजायंट मौकों को भुना नहीं सकी
गुजरात लॉयन्स और राइजिंग पुणे सुपरजायंट को 2016-17 में अस्थायी तौर पर शामिल किया गया था, जब चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स सस्पेंड थे. सुरेश रैना की कप्तानी में गुजरात लॉयन्स 2016 और 2017 दोनों ही सीजन के दौरान प्लेऑफ में पहुंची, लेकिन खिताबी जीत उससे दूर ही रही.

वहीं राइजिंग पुणे सुपरजायंट के लिए 2016 के सीजन में महेंद्र सिंह धोनी ने कप्तानी की, जहां यह टीम सातवें पायदान पर रही. जबकि 2017 में स्टीव स्मिथ की कैप्टेंसी में राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने फाइनल तक सफर तय किया, जहां उसे मुंबई इंडियंस (MI) के हाथों सिर्फ एक रन से हार झेलनी पड़ी. 2018 में सीएसके और आरआर की वापसी के साथ ही दोनों टीमों का सफर खत्म हो गया.
यानी इंडियन प्रीमियर लीग में अब तक 15 टीमों ने हिस्सा लिया है. बता दें कि पहले दिल्ली कैपिटल्स का नाम दिल्ली डेयरडेविल्स (DD) और पंजाब किंग्स का नाम किंग्स इलेवन पंजाब (KXIP) हुआ करता था. इन दोनों टीमों के नाम तो बदल गए, लेकिन किस्मत अब तक नहीं बदली. दोनों ही टीमें अब तक आईपीएल में खिताबी जीत हासिल नहीं कर पाई हैं.