Yashasvi Jaiswal, Dhruv Jurel and Sarfaraz Khan: भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट टेस्ट मैच में 434 रनों से अभूतपूर्व जीत हासिल की. टीम इंडिया की टेस्ट इतिहास में यह सबसे बड़ी जीत रही. इस जीत के साथ ही उसने 5 मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली. दोनों टीमों के बीच सीरीज का चौथा मुकाबला 23 फरवरी से रांची में खेला जाएगा. राजकोट टेस्ट में भारतीय टीम की जीत में तीन नवोदित खिलाड़ियों का अहम रोल रहा. ये तीन खिलाड़ी हैं- यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान और विकेटकीपर ध्रुव जुरेल.
यशस्वी ने जहां डबल सेंचुरी जड़कर अंग्रेजों के होश उड़ा दिए, वहीं सरफराज ने डेब्यू टेस्ट मैच की दोनों पारियों में जोरदार अर्धशतक जमाए. जुरेल ने भी अपने डेब्यू पर 46 रनों की उपयोगी पारी खेलकर प्रभावित किया. देखा जाए तो यशस्वी जायसवाल, सरफराज खान और ध्रुव जुरेल का टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा. आइए नजर डालते हैं यशस्वी, सरफराज और जुरेल के 'क्रिकेट संघर्ष' पर -
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कभी टेंट में रहने को मजबूर थे यशस्वी
भदोही से मुंबई पहुंचे यशस्वी जायसवाल की कहानी बेहद मार्मिक है. उन्होंने डेयरी में काम किया और गोलगप्पे भी बेचे. यूपी के भदोही में 28 दिसंबर 2001 को जन्मे यशस्वी 12 साल की उम्र में मुंबई पहुंचे और आजाद मैदान में क्रिकेट की एबीसीडी सीखी. यहां वह मुस्लिम यूनाइटेड क्लब के संपर्क के कोच इमरान सिंह के संपर्क में आए. कोच इमरान ने उनसे कहा कि अगर मैच में परफॉर्म किया तो उसे टेंट में रहने को मिलेगा. आजाद मैदान को अपना संघर्ष-स्थल बना चुके यशस्वी पर एक दिन कोच ज्वाला सिंह की नजर गई. फिर क्या था कोच ज्वाला ने यशस्वी को तराशने का बीड़ा उठाया और उन्हें सबअर्बन सांताक्रूज स्थित अपनी कोचिंग में ले गए.
विजय हजारे ट्रॉफी के जरिए सुर्खियों में आए यशस्वी
यशस्वी की जिंदगी में बड़ा यू-टर्न अक्टूबर 2019 में आया, जब उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में 113, 22, 122, 203 और नाबाद 60 रनों की पारियां खेलीं. इसके अगले साल यशस्वी ने साउथ अफ्रीका में अंडर-19 वर्ल्ड कप में शानदार बल्लेबाजी की, जहां वो 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे और टीम उपविजेता रही.
यशस्वी जायसवाल ने अब तक भारत के लिए 7 टेस्ट और 17 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं. टेस्ट मैचों में यशस्वी ने 71.75 की औसत से 861 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक और दो अर्धशतक शामिल रहे. वहीं, टी20 इंटरनेशनल में यशस्वी के नाम 33.46 के एवरेज से 502 रन दर्ज हैं. टी20 इंटरनेशनल में यशस्वी ने 1 शतक और चार अर्धशतक लगाए हैं.

यशस्वी जायसवाल ने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अब तक छह पारियों में 109 की औसत से 545 रन बनाए हैं, जिसमें दो दोहरे शतक और एक अर्धशतक शामिल रहे. इस दौरान यशस्वी का स्ट्राइक-रेट 81.1 और एवरेज 109 का रहा. यशस्वी का स्ट्राइक-रेट तो ओली पोप (65.66), जो रूट (49.94), जैक क्राउली (67.06) और बेन स्टोक्स (57.22) जैसे इंग्लिश बल्लेबाजों से बेहतर रहा है. यशस्वी ने मौजूदा सीरीज में 50 चौके और 22 छक्के लगाए हैं. यानी 332 रन तो उन्होंने चौके-छक्के से बनाए हैं.
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आगरा में 21 जनवरी 2001 को जन्मे घ्रुव जुरेल 2020 में अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने वाली टीम इंडिया के उप-कप्तान रहे. तब टीम इंडिया फाइनल में बांग्लादेश से DLS के तहत 3 विकेट से हार गई थी. विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव मिडिल ऑर्डर में आकर बैटिंग करते हैं, उनके पास शॉट्स की काफी रेंज हैं. वह घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के लिए खेलते हैं.
करगिल युद्ध लड़े चुके हैं जुरेल के पिता
ध्रुव जुरेल के पिता नेम सिंह जुरेल कारगिल युद्ध लड़ चुके हैं. ध्रुव अपने पिता की तरह सेना में जाना चाहते थे. आर्मी स्कूल में पढ़ने के दौरान ध्रुव ने स्विमिंग सीखी. इसके बाद गली क्रिकेट खेलना शुरू किया तो उन्हें क्रिकेट से प्यार हो गया. एक इंटरव्यू में ध्रुव मान चुके हैं कि वह पढ़ाई में मेधावी नहीं थे. उन्हें क्रिकेट खेलना बहुत पसंद था.
हालांकि नेम सिंह कभी इस बात का सपोर्ट नहीं करते थे उनका बेटा क्रिकेट खेले. जुरेल ने कहा था कि एक दिन उनके पिता अखबार पढ़ रहे थे और अचानक उनसे कहा एक क्रिकेटर है जिसका नाम भी तुम्हारे जैसा है, उसने खूब सारे रन बनाए हैं. उस दिन ध्रुव डर गए थे और उन्होंने पिता को यह नहीं बताया कि वो क्रिकेटर मैं ही हूं. ध्रुव इस वजह से डर रहे थे कि कहीं उनके पिता उनसे क्रिकेट छोड़ने के लिए ना कह दें.
मां ने गहने बेचकर जुरेल के लिए खरीदी किट
अब जुरेल को अहसास हो गया था कि क्रिकेट में ही उनका फ्यूचर है. उन्हें 14 साल की उम्र में एक किट चाहिए थी. पर तब पिता ने उन्हें अपनी पढ़ाई पर फोकस करने के लिए कहा. तब उनकी मां ने अपने बेटे की इच्छा पूरी करने के लिए सोने की चेन बेच दी. जुरेल ने तब यह भी बताया था कि उनको कश्मीर विलो का बैट खरीदना था, जो तब लगभग 1500-2000 रुपये का था, यह भी उनके लिए महंगा था, पर पिता ने बैट खरीद लिया. लेकिन जब पूरे किटबैग की बात आई, तो वो रेंज से बाहर हो गई.

इसके बाद ध्रुव ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया और घरवालों को धमकी दी कि अगर उन्होंने क्रिकेट किट नहीं दिलवाई तो वो भाग जाएंगे. इससे उनकी मां भावुक हो गईं और उन्होंने अपनी सोने की चेन मेरे पिता को दे दी और उनसे कहा कि इसे बेचकर इसको किट दिलवा दो. तब वो बहुत खुश हो गए थे, हालांकि बड़ा होने पर जुरेल को अहसास हुआ कि उनका बलिदान कितना बड़ा था. इस इंटरव्यू में उन्होंने माना कि पापा को ब्लैकमेल करने का उन्हें पछतावा हुआ था.
23 साल के ध्रुव जुरेल ने आईपीएल 2023 में अपने प्रदर्शन से सभी लोगों का ध्यान खींचा था. आईपीएल 2023 में जुरेल ने 13 मैचों में 152 रन 21.71 के एवरेज और 172.73 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से बनाए थे. ध्रुव जुरेल का आईपीएल में डेथ ओवर्स (17-20) में स्ट्राइक रेट बहुत धाकड़ रहा है. बता दें कि आईपीएल के 15वें सीजन से पहले राजस्थान रॉयल्स ने जुरेल को 20 लाख रुपए की कीमत में अपनी टीम से जोड़ा था.
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Words of wisdom from Anil Kumble & Dinesh Karthik that Sarfaraz Khan & Dhruv Jurel will remember for a long time 🗣️ 🗣️
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आईपीएल 2023 के सीजन में ध्रुव के रन आंकड़ों में भले ही कम लगे, पर उन्होंने कुछ ऐसी पारियां खेलीं, जो नोटिस की गईं. इम्पैक्ट प्लेयर बनकर उन्होंने डेब्यू किय. 5 अप्रैल 2023 को गुवाहाटी में पंजाब किंग्स के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स के लिए उन्होंने 15 गेंदों पर 32 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली.यह भी हैरत की बात है जिन संजू सैमसन की कप्तानी में जुरेल खेलते हैं, उनसे पहले उन्हें टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला.
26 साल के सरफराज खान की कहानी भी काफी प्रेरणादायी है. ऐसा कभी-कभार ही देखा जाता है कि लगभग 70 का औसत रखने वाले बल्लेबाज को पहला टेस्ट मैच खेलने से पहले 45 फर्स्ट क्लास मुकाबले खेलने पड़े हों. यानी सरफराज के करियर में चीजें आसानी से नहीं हुई हैं और उन्हें नेशनल कॉल-अप के लिए काफी इंतजार करना पड़ा.
सरफराज को सुनने पड़ते थे ताने...
यहां तक कहा गया कि सरफराज का वजन ज्यादा है... इसलिए उन्हें नहीं चुना जाता है. घरेलू क्रिकेट से लेकर आईपीएल तक में उनके शरीर को लेकर बहुत मजाक बनाया गया. किसी भी युवा के लिए इस तरह से ट्रोल किया जाना मानसिक तौर पर खतरनाक होता है. लेकिन सरफराज खुद पर काम करते रहे और आखिरी में यह साबित करने में सफल रहे कि स्लिम-ट्रिम दिखना ही फिटनेस नहीं होता है. शरीर की बनावट का भी फिटनेस में अहम रोल होता है.
सरफराज उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से ताल्लुक रखते हैं, हालांकि वह मुंबई में ही रहते हैं. सरफराज के पिता नौशाद ने अपने बच्चों के करियर को संवारने खातिर मुंबई में ही बसने का फैसला किया था. सरफराज अपनी फैमिली के साथ कुर्ला के टैक्सीमैन कॉलोनी में रहते हैं. नौशाद अपने तीनों बेटे सरफराज खान, मुशीर खान और मोईन खान को खुद ही ट्रेनिंग देते हैं. नौशाद अपने गांव से कई बच्चों को लेकर मुंबई लाए और उन्हें क्रिकेट के गुर सिखाया. वह इकबाल अब्दुल्ला और कामरान खान खान जैसे स्टार खिलाड़ियों के कोच रह चुके हैं.

नौशाद खान की मेहनत रंग ला चुकी है और अब सरफराज ने भारतीय टीम के लिए डेब्यू कर लिया है. सरफराज ने अब तक 46 फर्स्ट क्लास मैचों में 4042 रन बनाए हैं, जिसमें 14 शतक और 13 अर्धशतक शामिल रहे. सरफराज खान का उच्चतम स्कोर नाबाद 301 और औसत लगभग 71 (70.91) का है. फर्स्ट क्लास औसत के मामले में सरफराज खान दिग्गज खिलाड़ियों को टक्कर दे रहे हैं. कमाल की बात ये है कि पिछले तीन रणजी ट्रॉफी सीजन को मिलाकर सरफराज का एवरेज 100 से ऊपर का रहा है.
बेस्ट बैटिंग एवरेज फर्स्ट क्लास मैच (मिनिमम 50 पारी)
डॉन ब्रैडमैन- 234 मैच 28067 रन, 95.14 औसत
विजय मर्चेंट- 150 मैच 13470 रन, 71.64 औसत
जॉर्ज हैडली- 103 मैच 9921 रन, 69.56 औसत
सरफराज खान- 46* मैच 4042 रन, 70.91 औसत
अब सुनील गावस्कर के इस रिकॉर्ड की बराबरी की
सरफराज खान ने राजकोट के मैदान पर अपने टेस्ट डेब्यू पर शानदार प्रदर्शन किया. सरफराज खान ने पहली पारी में 62 शानदार रन बनाए, पर वह बदकिस्मती से रनआउट हो गए. फिर दूसरी पारी में भी सरफराज खान ने यादगार प्रदर्शन करते हुए नाबाद 68 रनों की पारी खेली. सरफराज ऐसे चौथे भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्हें डेब्यू टेस्ट मैच के दौरान दोनों ही पारियों में 50+ स्कोर किए. सरफराज से पहले दिलावर हुसैन, सुनील गावस्कर और श्रेयस अय्यर ही ऐसा कर पाए थे.
टेस्ट डेब्यू पर प्रत्येक पारी में 50+ स्कोर (भारत)
दिलावर हुसैन 59 & 57 vs इंग्लैंड, 1934
गावस्कर 65 & 67* vs वेस्टइंडीज, 1971
श्रेयस अय्यर 105 & 65 vs न्यूजीलैंड, 2021
सरफराज खान 62 & 68* vs इंग्लैंड, 2024