Bishan Singh Bedi Passes Away: भारत में खेले जा रहे वनडे वर्ल्ड कप 2023 के बीच खेल जगत के लिए एक बुरी खबर सामने आई है. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान और लीजेंड लेफ्ट ऑर्म स्पिनर बिशन सिंह बेदी का निधन हो गया है. उन्होंने 77 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा.
बेदी भारतीय क्रिकेट का वो चेहरा रहे, जो न सिर्फ मैदान पर अपने प्रदर्शन से चमके... बल्कि अपने नेतृत्व से मिसाल कायम की और साथ ही अपने विचार रखने में कभी संकोच नहीं किया. भारतीय जमीन से लेकर विदेशों में भी उन्होंने अपनी फ्लाइटेड लेग ब्रेक के जाल में बड़े-बड़े दिग्गजों को उलझाया.
पाकिस्तान की बेईमानी ने दिलाया था बेदी को गुस्सा
1960-70 का दशक बेदी के नाम रहा, ऐसा कहें तो गलत नहीं होगा. इस दौरान बेदी ने बल्लेबाजों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी. बेदी का क्रिकेट करियर करीब 12 साल का रहा है, इस दौरान उन्होंने गुस्से में कई बड़े फैसले लिए, जो काफी विवादास्पद भी रहे. कई मौकों पर उनकी आलोचनाएं भी हुईं.
वर्ल्ड कप के बीच भारतीय क्रिकेट के लिए बुरी खबर, बिशन सिंह बेदी का निधन
एक मौका ऐसा भी आया था, जब पाकिस्तान क्रिकेट टीम की बेईमानी से बेदी इतने चिढ़ गए थे कि उन्होंने बीच मैच से ही खिलाड़ियों को मैदान से वापस बुला लिया था. इंटरनेशनल क्रिकेट में यह पहला उदाहरण था, जब किसी कप्तान ने बेईमानी पर उतर आई विरोधी टीम को गुस्से में जीत दे दी हो. वनडे मुकाबले में उस वक्त भारत को जीत के लिए 14 गेंदों में 23 रन चाहिए थे और उसके 8 विकेट सुरक्षित थे.
हार सामने देख बेईमानी पर उतर आई थी पाकिस्तानी टीम
3 नवंबर 1978 को पाकिस्तान के शाहीवाल के जफर अली स्टेडियम में भारत-पाकिस्तान के बीच सीरीज का तीसरा और निर्णायक मैच खेला गया था. अंपायरिंग की जिम्मेदारी जावेद अख्तर और खिजर हयात पर थी. यानी पाकिस्तान के 11 खिलाड़ियों के अलावा दोनों अंपायर भी उनके अपने ही थे.

40 ओवरों के मैच में पहले बल्लेबाजी करने उतरे पाकिस्तान को भारतीय गेंदबाजों ने 205/7 के स्कोर पर रोक दिया था. सुनील गावस्कर की गैरमौजूदगी में चेतन चौहान और अंशुमन गायकवाड़ ने भारत की जवाबी पारी का आगाज किया. दोनों ने बड़े आराम से 44 रन जोड़ लिए थे. चेतन (23 रन) का विकेट गिरने के बाद उतरे सुरिंदर अमरनाथ (62 रन) ने गायकवाड़ के साथ स्कोर को 163 तक पहुंचा दिया. जीत का लक्ष्य आसान हो चुका था.
पाकिस्तान के अंपायर भी बेईमानी पर उतारू हो गए थे
गायकवाड़ के साथ गुंडप्पा विश्वनाथ क्रीज पर थे. 38वां ओवर शुरू हुआ और जीत के लिए भारत को महज 23 रनों की जरूरत थी. पाकिस्तान के कप्तान मुश्ताक मोहम्मद परेशान थे. सरफराज नवाज गेंदबाजी करने आए और इसके बाद जो भी हुआ वह पाकिस्तानी क्रिकेट को बदनाम कर गया.
सरफराज नवाज ने उस ओवर में लगातार चार बाउंसर फेंके, लेकिन अंपायर ने उनमें से एक को भी वाइड नहीं दिया. पाकिस्तान का प्लान था, निगाहें जमा चुके गायकवाड़ से इतनी दूर गेंद फेंको कि वह मार ही न पाए और उनकी इस स्कीम में पाकिस्तानी अंपायर उनके साथ थे. उन दिनों न्यूट्रल अंपायर का दौर शुरू नहीं हुआ था.
अंशुमन गायकवाड़ vs सरफराज नवाज
लगातार चार बाउंसर, लेकिन एक भी वाइड नहीं...
1. पहली गेंद. बाउंसर... विकेटकीपर वसीम बारी ने बाकी का काम किया. बल्लेबाज अंपायर की ओर देखता रहा, लेकिन वाइड नहीं.
2. दूसरी गेंद. बाउंसर... पिछली गेंद का ही रीप्ले...अंपायर पर फिर असर नहीं
3. तीसरी गेंद. फिर बाउंसर... उतनी ही ऊंची. लेकिन इस बार भी अंपायर हिले तक नहीं.
4. चौथी गेंद. वो गेंद इतनी ऊंची फेंकी कि 78 रन पर खेल रहे 6 फुट के गायकवाड़ कुछ समझ नहीं पाए.
गुस्से में बेदी ने खिलाड़ियों को बुलाकर पाकिस्तान को जीत दी
लाचार भारतीय बल्लेबाज पवेलियन की ओर देखने लगे. फिर क्या था कप्तान बेदी से रहा नहीं गया. उन्होंने दोनों बल्लेबाजों को वापस आने का इशारा कर दिया और साफ-साफ कह दिया कि भारत इस मैच में आगे नहीं खेलेगा. पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया गया. 2-1 से सीरीज पर कब्जा कर पाकिस्तानी टीम अपने घर में खुश हो गई.