भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. इस बोर्ड के सामने कभी ताकतवर समझे जाने वाले ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड भी कहीं नहीं ठहरते. बीसीसीआई को हर साल होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) से काफी आमदनी होती है. साथ ही, कई जानी-मानी कंपनियों का भारतीय बोर्ड के साथ करार है. इन कंपनियों में एमपीएल, पेटीएम, ड्रीम इलेवन, अंबुजा सीमेंट्स, बायजूस और स्टार स्पोर्ट्स जैसी कंपनियां शामिल हैं. अब बीसीसीआई के दबदबे को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने भी खुले तौर पर स्वीकार कर लिया है.
क्या कहा था पीसीबी चीफ ने?
पीसीबी चीफ रमीज राजा ने हाल ही में कहा, 'अगर भारत चाहे तो उनके बोर्ड का संचालन ‘बिखर’ सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का 90 प्रतिशत राजस्व भारत से आता है और इसका प्रभावी तौर पर यही मतलब है कि इस खेल को ‘भारत के व्यापारिक घरानों’ द्वारा चलाया जा रहा है. अगर कल भारतीय पीएम फैसला करते हैं कि वह पाकिस्तान को कोई फंडिंग नहीं होने देंगे, तो यह क्रिकेट बोर्ड ढह सकता है.'
BCCI की कमाई में गिरावट नहीं
कोरोना वायरस के चलते कई देशों के बोर्ड की कमाई में गिरावट आना लाजिमी था. लेकिन बीसीसीआई को इस महामारी का कोई खास नुकसान नहीं हुआ. इस साल मई में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक 2021 में भारतीय क्रिकेट बोर्ड की कमाई कुल 3730 करोड़ रुपए की है. वहीं, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (CA) और इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) काफी पीछे हैं. सीए का राजस्व 2843 करोड़ और ईसीबी का 2135 करोड़ रुपए है.
क्रिकेट फंडिंग का अधिकांश हिस्सा (प्रमुख देशों की अपनी व्यवस्था को छोड़कर) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की ओर से वितरित धन से आता है. मौजूदा अधिकार अवधि (2015-23) में सौ से अधिक सदस्य देशों को लगभग 1.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर वितरित किया जा रहा है. आईसीसी के अधिकांश फंड उनके "वैश्विक आयोजनों" से प्राप्त होते हैं, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के 50 ओवर क्रिकेट विश्व कप (CWC) और विश्व ट्वेंटी 20 (WT20) शामिल हैं.
ICC को मुख्यतया फंड दो स्रोतों से आते हैं-
1. मीडिया अधिकार (टीवी और डीजिटल): स्टार स्पोर्ट्स (अपने भारतीय/मध्य पूर्व ब्रॉडकास्टिंग के माध्यम से) ने दुनिया भर में 2015-23 के अधिकार लगभग दो बिलियन डॉलर में खरीदे थे. आईसीसी की ओर से अनुमोदित ब्रॉडकास्टर स्टार को शुल्क देने के बाद इन कार्यक्रमों को अपने क्षेत्रों में प्रसारित कर रहे हैं. उदाहरण के लिए स्काई (यूके), सुपर स्पोर्ट (उप-सहारा अफ्रीका), चैनल 9/फॉक्स स्पोर्ट्स (ऑस्ट्रेलिया). दिलचस्प बात यह है कि स्टार को उसके मालिक फॉक्स ने एक बड़े सौदे के तहत डिग्री को बेच दिया गया था.
2. स्पॉन्सरशिप अधिकार: 2015-23 की अवधि के लिए यह ICC बजट में लगभग 700 मिलियन डॉलर है. इसमें ट्रॉफी नामकरण अधिकार और अन्य प्रमुख सौदे शामिल हैं. हालांकि आईसीसी अब विश्व आयोजनों के नामकरण अधिकार नहीं बेचती हैं. उदाहरण के लिए 1996 का वर्ल्ड कप 'विल्स विश्व कप' के नाम से आयोजित हुआ था. इस अवधि के दौरान आईसीसी इवेंट्स से जुड़े प्रमुख नामों में GoDaddy, Booking.com, Bira91, Uber, निसान, एमिरेट्स ओप्पो, पेप्सी, कोक, एलजी, MRF टायर, कैस्ट्रोल, रिलायंस, हुंडई शामिल हैं.
इस अलावा गैर-इवेंट विशिष्ट स्पॉन्सर जैसे एमिरेट्स (अंपायर), ग्रे-निकोल्स (उपकरण) इन वैश्विक आयोजनों के अतिरिक्त हैं. लेकिन आम तौर पर ये प्रमुख टूर्नामेंटों में भी शामिल होते हैं.
2015-23 पीरियड के लिए ICC अनुदानों का विवरण (अमेरिकी डॉलर में) -
भारत- 405 मिलियन (लगभग 51मि. प्रति वर्ष)
इंग्लैंड- 139 मिलियन (लगभग 17 मि. प्रति वर्ष)
ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, वेस्टइंडीज - 128 मिलियन (16 मिलियन प्रति वर्ष)
जिम्बाब्वे- 94 मिलियन (लगभग 12 मि. प्रति वर्ष)
अफगानिस्तान और आयरलैंड - 40 मिलियन (लगभग 5 मि. प्रति वर्ष) ये दोनों अब आईसीसी के पूर्ण सदस्य बन गए हैं, इसलिए यह 2017-23 से तक आनुपातिक हो सकता है)
93 एसोसिएट्स देश- 160 मिलियन, यह दो अनुदान प्रणालियों (टूर्नामेंट और स्कोरकार्ड) में बंटा हुआ है.