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दिनेश कार्तिक: जिसे सौरव गांगुली ने कहा- कहां-कहां से आ जाते हैं टीम में! 18 साल बाद बन चुका है हीरो

दिनेश कार्तिक 2022 के तीसरे क्वार्टर में होने वाले टी-20 विश्व-कप की रेस में सिर्फ़ शामिल ही नहीं हुए हैं बल्कि ऋषभ पंत की जगह पाने की पूरी दावेदारी ठोंक रहे हैं. 2019 में चल रही विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में शानदार फ़ॉर्म में चल रहे कार्तिक ने कहा था कि वो भारतीय टी-20 साइड में वापस आना चाहते हैं और धोनी की तरह एक तगड़े फ़िनिशर का रोल निभाना चाहते हैं.

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दिनेश कार्तिक (Getty Images) दिनेश कार्तिक (Getty Images)

साल 2007. डर्बन, साउथ अफ़्रीका. जोहांसबर्ग में विश्व-कप फ़ाइनल हारने के 4 साल बाद भारतीय टीम क्रिकेट के सबसे छोटे संस्करण का विश्व कप खेल रही थी. सामने मेज़बान थे. एक बेहद औसत शुरुआत के बाद पहली बार टी-20 इंटरनेशनल मैच में बल्लेबाज़ी कर रहे 20 साल के रोहित शर्मा की फ़िफ़्टी के चलते भारतीय टीम ने बोर्ड पर 150 से कुछ ज़्यादा रन टांग दिए थे. सामने जो टीम थी, उसने टूर्नामेंट के पहले ही मैच में, वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ 206 रन चेज़ कर डाले थे. 150 की क्या बिसात थी?

साउथ अफ़्रीका का टॉप ऑर्डर किसी भी काग़ज़ पर, कैसे भी बॉलिंग लाइन-अप के लिए बुरा सपना साबित हो सकता था. हालांकि भारतीय टीम भी कम चमकीली नहीं थी. एक दिन पहले ही युवराज सिंह ने स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर की सभी गेंदों पर छक्का जड़ा था. लेकिन उस रोज़, साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़, गेंद से कमाल दिखाना था. इस मैच में हारने पर भारतीय टीम के घर-वापसी के टिकट बुक हो जाने वाले थे.

श्रीसंत ने गेंद थामी और इनिंग्स की पहली ही गेंद लेग साइड पर इतनी बाहर फेंकी कि बगैर किसी लीगल गेंद के साउथ अफ़्रीका को 5 रन मिल चुके थे. पहला ओवर ख़त्म हुआ तो 11 रन बन चुके थे. साउथ अफ़्रीका और जीत के बीच में अब बस 143 रन का अंतर था. दूसरे छोर से आरपी सिंह ने गेंद पकड़ी. ओवर द विकेट आए आरपी ने ऑफ़ स्टम्प के बाहर की लाइन में गेंद छोड़ी लेकिन वो बहुत तेज़ अंदर आयी और गिब्स को एलबीडब्लू आउट दे दिया गया.

गिब्स नाराज़ थे और रीप्ले में दिखा भी कि गेंद विकेटों के ऊपर जा रही थी. लेकिन ये ग़ैर-डीआरएस का दौर था. भारत को कोई शिकायत नहीं थी. हालांकि साउथ अफ़्रीका की तगड़ी लाइन-अप अभी भी बची हुई थी. ओवर की चौथी गेंद. बायें हाथ के ग्रीम स्मिथ को ओवर द विकेट फेंकी गेंद. ऑफ़ स्टम्प के बाहर गिरी और अंदर आती दिखी. क्रीज़ में गहरे खड़े स्मिथ शरीर से दूर ड्राइव मारने को तैयार थे. उन्होंने बल्ले का पूरा चेहरा सामने किया मगर गेंद टप्पा खाने के बाद आर्क बनाती हुई बाहर निकल पड़ी.

रास्ते में उनसे बल्ले का किनारा छुआ और विकेट के पीछे उड़ गयी. इस उड़ान के रास्ते में लगभग पांचवीं स्लिप पर खड़े दिनेश कार्तिक लपके. अपनी लम्बाई जितनी छलांग लगायी और आसमान से चांद खींच लाये. पारी के दूसरे ही ओवर में ग्रीम स्मिथ का विकेट भी जा चुका था. नासिर हुसैन ने माइक पर कहा- 'क्या कैच था! लोग कहते हैं कि दिनेश कार्तिक दो ध्रुवों पर रहते हैं. वो आसान कैच टपका देंगे और कुछ शानदार, कठिन कैच लपक लेंगे.'

विकेट के जश्न के तुरंत बाद, अगली गेंद फेंके जाने से पहले ही, कार्तिक ने कीपिंग पैड्स और दस्ताने पहने और विकेट्स के पीछे जाकर खड़े हो गए. भारत इस मैच में एक बॉलर शॉर्ट था और लग रहा था कि धोनी को बॉलिंग करनी पड़ेगी. लेकिन इसकी नौबत नहीं आयी और भारत ये मैच 37 रनों से जीत गया.

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साल 2018. आर प्रेमदासा स्टेडियम, कोलम्बो. ये वो दिन था जब तीन देशों की टी-20 सीरीज़ में पहले ही बाहर हो चुकी श्रीलंका टीम के सभी फ़ैन्स भारत को सपोर्ट कर रहे थे. इसके पीछे बांग्लादेशी खिलाड़ियों की कुछ हरकतें थीं. फ़िलहाल, मैच के आख़िरी 2 ओवर बचे थे और भारत को 12 गेंदों में 34 रन चाहिये थे. विजय शंकर का साथ देने आये दिनेश कार्तिक. और आते ही उन्होंने जो किया उसने टी-20 क्रिकेट को एक शानदार पारी दी. अगली 12 गेंदों में उन्होंने 8 का सामना किया. इन 8 गेंदों में दिनेश कार्तिक ने 362.5 के स्ट्राइक रेट से 29 रन बनाये.

श्रीलंका क्रिकेट के आधिकारिक यूट्यूब चैनल ने 6-6 गेंदों के 2 वीडियो (19वां और 20वां ओवर) अपलोड किये. ये दोनों वीडियो दुनिया में खेल की केटेगरी में सबसे ज़्यादा बार देखे जाने वाले वीडियो हैं. 19वें ओवर को 13.1 करोड़ और आख़िरी ओवर को 22.5 करोड़ से कहीं ज़्यादा बार देखा जा चुका है. कोलम्बो में खेली गयी वो पारी दिनेश कार्तिक का पर्याय बन चुकी है. 

विजयी शॉट लगाने के बाद दिनेश कार्तिक (AFP)

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11 साल के अंतर पर घटी दो घटनाएं दिनेश कार्तिक को परिभाषित करती हैं. फ़ील्डिंग करते हुए शानदार कैच लेने के तुरन्त बाद उन्हें पैड और दस्ताने पहना दिए जाते हैं और विकेट के पीछे भेज दिया जाता है. अमूमन शानदार खिलाड़ियों के साथ ऐसे पेश नहीं आया जाता. दिनेश एक आदर्श टीम-पर्सन की तरह कीपिंग करने लग पड़ते हैं और वहां भी 2 स्टम्पिंग अंजाम देते हैं. निदाहास ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल में जब वो उतरे, बेहद गुस्से में थे. वो जिस नंबर पर जाना चाहते थे, रोहित शर्मा ने विजय शंकर को भेज दिया था. लेकिन जब अंदर घुसे तो पूरी ताक़त झोंक दी. 12 गेंद के अंतर में इतिहास रच दिया.

दिनेश कार्तिक के करियर को आप जब देखते हैं तो पाते हैं कि इंग्लैण्ड के ख़िलाफ़ 19 साल की उम्र में उनके डेब्यू करते ही भारतीय क्रिकेट टीम में एक नाम और आ जाता है - महेंद्र सिंह धोनी. भारत के लिए, दोनों के पहले मैच में 3 महीने 18 दिनों का अंतर है. और धोनी के आने के बाद विकेटकीपर बल्लेबाज़ का स्पॉट 15 सालों के लिए बुक हो गया. इस पूरे दौरान कार्तिक ने घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाये. वो लड़का, जिसे खेलते देखने के लिए रविचंद्रन अश्विन अपने बाल्यकाल में अपने पिता के साथ कई किलोमीटर की दूरी तय करके जाते थे, आगे चलकर तमिलनाडु का कप्तान बना और लगातार अपनी टीम को आगे ले जाता रहा. लेकिन इंडिया की किट पहनने को नहीं मिल रही थी.

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वजह थे महेंद्र सिंह धोनी. आगे चलकर एक मेच्योर दिनेश कार्तिक ने ये क़ुबूल भी किया - 'जब धोनी आया तो उसने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी. मुझे समझ में आ गया था कि टीम में अब मेरे लिए दरवाज़े बंद हो चुके थे. कीपर-बैट्समैन दशकों तक चलने वाला एक काम होता है. सैयद किरमानी थे फिर मोरे आ गए. धोनी ऐसा क्रिकेटर है जो सदियों में एक बार आता है.' और इस तरह से दिनेश कार्तिक को भारतीय रंगों में तभी देखा जा सका जब धोनी टीम में नहीं थे. अमूमन धोनी खेल से ब्रेक लेने के लिए छुट्टी लिया करते थे. इसलिये कार्तिक के हत्थे छोटी सीरीज़ आयीं.

भारतीय टीम में किसी खिलाड़ी के दो टेस्ट मैचों के बीच सबसे बड़ा अंतर दिनेश कार्तिक के हिस्से ही आया. कार्तिक ने 21 जनवरी 2010 को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ खेलने के 8 साल, 144 दिनों के बाद 14 जून 2018 में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ हुए मैच में हिस्सा लिया. इस बीच भारतीय टीम ने कुल 88 मैच खेले जिसमें दिनेश अंतिम एकादश का हिस्सा नहीं बन सके. और ये सब उस खिलाड़ी के साथ हो रहा था जो 2007 में इंग्लैण्ड पर जीत दर्ज करने वाली टीम का हिस्सा था और वहां बेहद कठिन, स्विंग होने वाली परिस्थितियों में ओपनर बल्लेबाज़ की भूमिका बखूबी निभायी. 

महेंद्र सिंह धोनी और दिनेश कार्तिक (AFP)

2004 में खेली जा रही चैम्पियंस ट्रॉफ़ी का एक मज़ेदार किस्सा है. दिनेश कार्तिक डेब्यू कर चुके थे, लेकिन इस टूर्नामेंट में खेलने का मौका अब तक नहीं मिला था. कीपिंग ग्लव्स द्रविड़ के हाथों में थे और कार्तिक बेंच पर थे. 200 रनों का पीछा कर रही पाकिस्तान की टीम एक मज़बूत साझेदारी बना चुकी थी. अभी-अभी इंज़माम-उल-हक़ का विकेट गिरा था और भारतीय टीम में वापस उम्मीद जागी थी. विकेट गिरने के बाद कप्तान सौरव गांगुली ने टीम को घेरे में बुलाया और आगे के प्लान पर बात हो रही थी.

इसी बीच बाउंड्री के पार से टीम का 12वां खिलाड़ी पानी की बोतलों के साथ निकला. दिनेश अपने काम में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते थे. वो पूरी ताक़त से घेरे में खड़ी टीम की ओर दौड़ रहे थे. दोनों हाथों में बोतलें पकड़े दौड़ रहे दिनेश टीम से थोड़ी दूरी पर थे जब उन्होंने अपनी गति धीमी करनी शुरू की. लेकिन उस नरम घास पर उनके जूते ब्रेक लगाने की बजाय उन्हें फिसला रहे थे. ब्रेक नहीं लग रहा था और वो टीम के घेरे के नज़दीक पहुंचते जा रहे थे.

दिनेश कार्तिक, होते-करते, सेकंड भर के भीतर ही पाकिस्तान की अच्छी स्थिति देखकर टेंशन से भरे सौरव गांगुली से जा टकराए. टीम को ज्ञान दे रहे सौरव गांगुली को पीछे से ज़ोर का धक्का लगा और वो ख़ुद खड़बड़ाकर घेरे में आगे बढ़ गए. उन्होंने पीछे देखा तो टीम में अभी-अभी आये दिनेश कार्तिक खड़े थे. उनके मुंह से निकला - 'ये कहां-कहां से किसको पकड़ के ले आते हैं टीम में?'

ये छटपटाहट, हड़बड़ाहट, दिनेश कार्तिक की पहचान थी. वो अब भी अपनी ख़राब याद्दाश्त से परेशान रहते हैं. उनके करियर का शुरुआती हिस्सा उनके गुस्से की कहानियों से भरा हुआ है. दिनेश कार्तिक विकेट के पीछे से गालियां सुनाने की छवि बनवा चुके थे. वो ये क़ुबूल भी करते हैं कि इसकी वजह से उन्होंने कितनी मैच फ़ीस भी गंवाई है. कभी उनके फ़ैन रहे और फिर तमिलनाडु टीम से साथ खेलने वाले रविचंद्रन अश्विन बड़े चाव से वो किस्सा सुनाते हैं जब उनकी गेंद पर बल्ले का किनारा लेकर गेंद सीधा कार्तिक के ग्लव्स में गयी लेकिन एक भयानक शोर-शराबे वाली अपील के बाद भी अम्पायर ने आउट नहीं दिया. इसके बाद नाराज़गी से भरे अश्विन अपने रन-अप पर पहुंचे तो देखा कि दिनेश कार्तिक विकेटों के पीछे ज़मीन लेटे हुए थे. ये उनका विरोध जताने का तरीक़ा था. 

युवा दिनेश कार्तिक (AFP)

हाल ही में दिनेश कार्तिक के बारे में एक लम्बा पोस्ट वायरल हुआ. उनके जीवन के एक निजी एपिसोड को मसाला लगाकर जिस तरह से पेश किया गया, वो परेशान करने वाला था. ये वायरल पोस्ट इस बात में भी हमारा विश्वास गाढ़ा करता है कि  हम कितना भी आगे बढ़ चुकने का स्वांग रच लें, मसालेदार गप्प आज भी लोगों के अंतर्मन को तर करती हैं. लेकिन कार्तिक के गिरने और उठने की असल कहानी कहीं और थी.

2016 में, चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स को बैन किये जाने के बाद आयी गुजरात लॉयंस टीम ने दिनेश कार्तिक को ख़रीदा था. कार्तिक का घरेलू सीज़न बहुत अच्छा नहीं गया था और आईपीएल में उनकी कीमत 9 करोड़ से सीधा 2.3 करोड़ पर आ गयी थी. वो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख़ुद को चुका हुआ मान चुके थे. इसके साथ ही वो ये मान रहे थे कि 2016 का सीज़न उनका आख़िरी मौका था और यहां मिलने वाली असफ़लता उनके क्रिकेट पर विराम चिह्न लगा सकती थी.

इस पूरे समीकरण ने कार्तिक को एक जेल में कैद कर दिया था, जिसकी दीवारें हर घटते दिन के साथ सिकुड़ती जा रही थीं. ऐसे में उनके दोस्त अभिषेक नायर ने उनका हाथ थामा. अभिषेक नायर मुंबई के तगड़े बल्लेबाज़ थे और अब खिलाड़ी के पद एक कदम ऊपर उठकर उन्हें संवारने का काम भी कर रहे थे. ऐसे में प्रवीण आमरे के संरक्षण में आये कार्तिक ने नायर से मदद मांगी और नायर ने उन्हें अपने मुंबई के घर के एक छोटे से कमरे में जगह दी. कार्तिक उस छोटे से कमरे से निकलना चाहते थे और नायर उन्हें ऐसा करने नहीं देना चाहते थे क्यूंकि वो कार्तिक को ऐसा माहौल देना चाहते थे जो उन्हें पहले नहीं मिला था. यहां से दिनेश कार्तिक की अलग ही रगड़ापट्टी चालू हुई.

अमित पगनिस, अपूर्व देसाई सहित तमाम तकनीकी रूप से प्रबुद्ध लोगों ने दिनेश कार्तिक पर काम करना शुरू किया. उनके पैरों के मूवमेंट से लेकर सिर की स्थिरता तक, पूरे दिन के शेड्यूल से लेकर शरीर पर काम करने तक पर मेहनत की गयी. सब कुछ एक प्रयोग जैसा था और इसके सब्जेक्ट थे दिनेश कार्तिक. आज दिनेश कार्तिक स्लॉग स्वीप के दम पर कितने ही रन कमाते हैं. ये अमित पगनिस की देन है जो बम्बैय्या सर्किल में अपने ऐसे शॉट्स के लिए जाने जाते थे.

कार्तिक की छटपटाहट हर किसी को मालूम थी. नायर को भी. उन्होंने कार्तिक की जिम की ट्रेनिंग शाम को रखी. जबकि अभी तक कार्तिक सुबह जल्दी उठकर जिम करते थे और फिर पूरा दिन यूं ही निकाल दिया करते थे. नायर चाहते थे कि कार्तिक का सालों से चला आ रहा शेड्यूल तोड़ा जाए और नया सिस्टम तैयार किया जाए. यही उनकी छटपटाहट का इलाज हो सकता था. नये शेड्यूल के हिसाब से कार्तिक दिन भर परेशान रहते थे कि वो जिम कब करेंगे. लेकिन फिर शनैः शनैः उनका दिमाग, उनका शरीर नये शेड्यूल का अभ्यस्त होता गया और वो शांतचित्त होते गए. 

2016 में गुजरात लॉयंस की ओर से मिडल ऑर्डर में खेलते हुए दिनेश कार्तिक ने 16 मैचों में 335 रन बनाये. घरेलू मैचों में 14 पारियों में 704 रन और 9 घरेलू वन-डे मैचों में 607 रन बनाये. 2017 में खेली जाने वाली चैम्पियंस ट्रॉफ़ी में उनका सेलेक्शन हुआ. उन्हें जैसे ही मालूम पड़ा, उन्होंने अपने पूरे कोचिंग और हेल्पिंग स्टाफ़ को चेन्नई बुलाया. 15 लोगों का आना-जाना, होटल में रहना, उनका पूरा ख़र्चा, उनकी तनख्वाह आदि कार्तिक ने भरी. चेन्नई में उन्होंने पर्सनलाइज़्ड प्रैक्टिस सेशन किये जहां सीम होने वाली कंडीशन के हिसाब से वो ख़ुद को ढाल रहे थे. ये उनकी इंग्लैण्ड की तैयारी थी. प्रैक्टिस मैचों में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ उन्होंने 94 रन बनाये. लेकिन टूर्नामेंट में उन्हें अंतिम ग्यारह में जगह नहीं मिली.

लेकिन कार्तिक अब ऐसी बातों का लोड नहीं ले रहे थे. उनके सामने बड़ी तस्वीर टंगी थी - उन्हें अपना खेल बेहतर करना था. 2018 में दिनेश कार्तिक को केकेआर ने 7 करोड़ 40 लाख रुपयों में ख़रीदा और अपना कप्तान नियुक्त किया. कार्तिक ने टीम में सबसे ज़्यादा 498 रन बनाये. टीम टूर्नामेंट में तीसरे स्थान पर रही. अगले सीज़न में ज़ाती वजहों के चलते उन्हें बीच में ही कप्तानी छोड़नी पड़ी. मैनेजमेंट के चाहतों के ख़िलाफ़ जाते हुए, आईपीएल टीम की कप्तानी छोड़ देने का फ़ैसला भी उनके दृढ़ मनोबल की गवाही देता है. उन्हें मालूम था कि वो अपना शत प्रतिशत नहीं दे पा रहे थे, लिहाज़ा वो ये काम नहीं करना चाहते थे.

फ़िलहाल, दिनेश कार्तिक 2022 के तीसरे क्वार्टर में होने वाले टी-20 विश्व-कप की रेस में सिर्फ़ शामिल ही नहीं हुए हैं बल्कि ऋषभ पन्त की जगह पाने की पूरी दावेदारी ठोंक रहे हैं. 2019 में चल रही विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में शानदार फ़ॉर्म में चल रहे कार्तिक ने कहा था कि वो भारतीय टी-20 साइड में वापस आना चाहते हैं और धोनी की तरह एक तगड़े फ़िनिशर का रोल निभाना चाहते हैं. अपने आप को और अपने खेल को पलट कर रख देने वाला ये खिलाड़ी अपने डेब्यू के 18 साल बाद टीम में वापसी की हर संभव कोशिश कर रहा है और अपनी कही उस बात के 3 साल बाद उसे हासिल करता दिख रहा है. 

 

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