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IPL स्पॉट फिक्सिंग केस में क्रिकेटरों को बड़ी राहत

आईपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली की पटियाला कोर्ट में आरोप तय करने के लिए हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने 4 बजे फैसला सुनाने की बात कही थी. एस श्रीसंत समेत तीनों दोषी क्रिकेटरों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली. तीनों को ही रिहा कर दिया गया है. साल 2013 में आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आया था, जिसमें क्रिकेटर एस. श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण के अलावा दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील को भी आरोपी बनाया गया है.

आईपीएल फिक्सिंग के आरोपियों की फाइल फोटो आईपीएल फिक्सिंग के आरोपियों की फाइल फोटो

आईपीएल-6 स्पॉट फिक्सिंग मामले में दिल्ली की पटियाला कोर्ट में आरोप तय करने के लिए हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने 4 बजे फैसला सुनाने की बात कही थी. एस श्रीसंत समेत तीनों दोषी क्रिकेटरों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली. तीनों को ही रिहा कर दिया गया है. साल 2013 में आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग का मामला सामने आया था, जिसमें क्रिकेटर एस. श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हाण के अलावा दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील को भी आरोपी बनाया गया है.

23 मई को पूरी हो चुकी है सुनवाई
इस मामले की सुनवाई 23 मई को पूरी हो चुकी है. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक स्पॉट फिक्सिंग मामले में कुल 42 लोग आरोपी हैं, जिनमें से 6 फरार हैं. इससे पहले अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले में आरोप तय करने को लेकर 29 जून का दिन निर्धारित किया था. उन्होंने आरोपियों की ओर से पेश हो रहे वकीलों को 6 जून तक लिखित में अपना पक्ष रखने को कहा था.

पुलिस जांच पर सवाल
आपको बता दें कि इस मामले में अदालत ने पुलिस की जांच पर ही सवाल उठाए हैं. कोर्ट का कहना है कि प्रथम दृष्टया कोई साक्ष्य नहीं दर्शाता कि आरोपियों ने मैच फिक्स किए हैं. आरोप तय करने को लेकर हुई जिरह के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मैच फिक्सिंग और सट्टेबाजी में शामिल होने के अपने दावे को पुख्ता करने के लिए आरोपियों के बीच टेलीफोन पर बातचीत का संदर्भ दिया था.

सरकारी वकील ने कहा
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट से कहा, सबूतों को साथ रखने के लिए एजेंसियों के साथ ही अलग-अलग राज्यों की पुलिस भी साथ आ रही है. सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत चार्जशीट के बाद भी जांच जारी रह सकती है. इस केस में हवाला के साथ ही अन्य गैरकानूनी तरीकों से भी पैसा आया है. वहीं दूसरे पक्ष ने कोर्ट से केस की जांच के लिए और वक्त देने की मांग की है. उनका कहना है कि जस्टिस लोढ़ा कमेटी का फैसला आने के बाद कुछ नई बातें सामने आई हैं जिनको ध्यान में रखकर केस की और छानबीन की जरूरत है.

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