भारत के खिलाफ चार मैचों की टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई टीम का बुरा हाल है. पैट कमिंस की अगुवाई वाली कंगारू टीम को पहले मुकाबले में एक पारी और 132 रनों से हार झेलनी पड़ी थी. वहीं दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए टेस्ट मैच में भी स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ. दिल्ली टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को छह विकेट से हार का सामना करना पड़ा.
नागपुर टेस्ट में जब ऑस्ट्रेलियाई टीम दूसरी पारी में 91 रन पर सिमट गई थी तो कमिंस ने अपने बल्लेबाजों को रविचंद्रन अश्विन, रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल की स्पिन तिकड़ी के खिलाफ अधिक बहादुर होने को कहा था. लेकिन कमिंस की यह सलाह भी टीम के काम नहीं आई और दिल्ली टेस्ट में उसके बल्लेबाजों का बुरा हाल रहा. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया पिच को दोषी दे रही थी, लेकिन दोनों ही मैचों में भारतीय प्लेयर्स ने उसी पिच पर शानदार बैटिंग की.
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अगले दो मैचों में से हार से बढ़ेगी मुसीबत
जब ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत के दौरे पर आई थी तो वह टेस्ट रैंकिंग और वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की प्वाइंट टेबल में नंबर-1 पर थी. लेकिन अब आने वाले दिनों में उसका यह ताज छिन सकता है. ऑस्ट्रेलियाई टीम यदि अगले दो टेस्ट मैच हार जाती है तो वह टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में भी पहुंचने से चूक सकती है. ऐसी स्थिति में श्रीलंका के पास न्यूजीलैड को टेस्ट सीरीज में 2-0 से हराकर फाइनल में पहुंचने का सुनहरा मौका होगा.
बल्लेबाजों ने ही किया है बेड़ा गर्क
नागपुर टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया की टीम अपनी दोनों पारी को मिलाकर सिर्फ 268 रन बना सकी, उसी पिच पर भारत ने एक ही पारी में चार सौ रन बना डाले. फिर दिल्ली में भी ऑस्ट्रेलिया ने दोनों पारियों को जोड़कर सिर्फ 376 रन बनाए. ऑस्ट्रेलियाई टीम के खराब प्रदर्शन की वजह उसके बल्लेबाज ही हैं. पहले टेस्ट की दूसरी पारी में 91 रन और फिर दूसरे टेस्ट की भी दूसरी पारी में 113 रन. देखा जाए तो दोनों ही मैचों में ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी दूसरी इनिंग्स में लगभग एक ही सत्र में सिमट गई.
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जडेजा-अश्विन का तोड़ नहीं खोज सके
इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज आर. अश्विन और रवींद्र जडेजा का कोई तोड़ नहीं खोज पाए. दिल्ली टेस्ट की दूसरी पारी में तो स्टीव स्मिथ सहित छह बल्लेबाज स्वीप-शॉट खेलने की कोशिश में चलते बने. स्मिथ तो कभी कभार ही स्वीप मारते देखे जाते हैं. ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज जडेजा और अश्विव की सीधी गेंदों पर स्वीप मारने का प्रयास किया और वे एलबीडब्ल्यू या बोल्ड आउट होते चले गए. डेविड वॉर्नर जैसे प्लेयर तो तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी स्ट्रगल करते दिखे. खराब शॉट सेलेक्शन ने ऑस्ट्रेलियाई टीम को काफी नुकसान पहुंचाया.
भारत का निचले क्रम भी बना मुसीबत
ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए भारत के निचले क्रम के बल्लेबाज भी सिरदर्द साबित हुए हैं. पहले टेस्ट के दौरान बाएं हाथ के बल्लेबाजों अक्षर पटेल और रवींद्र जडेजा ने शानदार पारियां खेलीं. इस दौरान दोनों ने आठवें विकेट के लिए 88 रनों की साझेदारी करके भारत को 400 रन तक पहुंचने में मदद की. दिल्ली टेस्ट में भी भारतीय टीम पहली पारी में 150 रनों के भीतर ही सात विकेट खो चुकी थी. फिर अश्विन-अक्षर ने आठवें विकेट के लिए 114 रन जोड़कर कंगारुओं के हौसले पस्त कर दिए.