नासा का रोवर क्यूरियोसिटी मंगल पर घूमते-घूमते एक साधारण सी चट्टान पर चढ़ गया. जब 899 किलो वजन वाले इस रोवर ने उस नरम चट्टान को कुचला, तो अंदर से पीले रंग के क्रिस्टल निकल आए. ये क्रिस्टल शुद्ध सल्फर (एलिमेंटल सल्फर) के थे, जिन्हें आम भाषा में ब्रिमस्टोन भी कहते हैं.
मंगल पर सल्फेट तो पहले भी मिले थे, लेकिन शुद्ध सल्फर का यह पहला प्रमाण है. यह खोज इतनी हैरान करने वाली है कि वैज्ञानिक अब इसे समझने में लगे हैं.
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कहां मिला यह खजाना?
यह चट्टान गेडिज वैली चैनल नामक जगह पर मिली. यह जगह मंगल पर एक पुरानी नदी का चैनल है, जहां अरबों साल पहले पानी बहता था. रोवर जब इस चैनल में आगे बढ़ रहा था, तब उसने इस चट्टान को कुचल दिया. वैज्ञानिकों ने देखा कि आसपास कई ऐसी ही चट्टानें पड़ी हैं, जो बाहर से सामान्य लगती हैं लेकिन अंदर शुद्ध सल्फर हो सकता है. क्यूरियोसिटी प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक एशविन वासवदा ने कहा कि रेगिस्तान में ओएसिस ढूंढने जैसी बात है. यहां ऐसा होना नहीं चाहिए था, इसलिए अब हमें इसका कारण ढूंढना होगा.

सल्फेट और शुद्ध सल्फर में क्या फर्क?
सल्फेट वो नमक हैं जो पानी में घुलने वाले सल्फर से बनते हैं. जब पानी सूख जाता है तो ये सल्फेट पीछे रह जाते हैं. मंगल पर पानी के इतिहास को समझने के लिए सल्फेट बहुत मदद करते हैं. लेकिन शुद्ध सल्फर बनने के लिए बहुत खास परिस्थितियां चाहिए. वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में ऐसी परिस्थितियां नहीं दिखतीं. फिर भी सल्फर के इतने बड़े-बड़े टुकड़े सतह पर पड़े हैं. इसका मतलब है कि मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास में कुछ बहुत बड़ा रहस्य छिपा है, जिसे हम अभी नहीं जानते.
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सल्फर जीवन के लिए क्यों जरूरी?
सल्फर जीवन के लिए जरूरी तत्व है. यह दो जरूरी अमीनो एसिड बनाने में काम आता है, जो प्रोटीन के निर्माण के लिए आवश्यक हैं. मंगल पर सल्फेट तो पहले से पता थे, इसलिए जीवन की संभावना की दिशा में यह नई जानकारी नहीं देता. लेकिन फिर भी मंगल पर पानी, रसायन और जीवन के लिए उपयोगी चीजें बार-बार मिल रही हैं. यह बताता है कि मंगल कभी जीवन के लिए उपयुक्त रहा होगा.

रोवर ने कैसे खोजा और आगे क्या?
क्यूरियोसिटी के पास इतने शक्तिशाली उपकरण हैं कि वह चट्टानों का विश्लेषण कर सकता है. लेकिन अगर रोवर उस चट्टान पर से नहीं गुजरता और उसे कुचलता नहीं, तो शायद बहुत समय तक शुद्ध सल्फर का पता नहीं चलता. अब वैज्ञानिक मॉडलिंग करके समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह सल्फर वहां कैसे पहुंचा. क्यूरियोसिटी अभी भी गेडिज वैली चैनल में आगे बढ़ रहा है. अगली चट्टानों का इंतजार कर रहा है. शायद और भी आश्चर्यजनक चीजें मिलें.
यह खोज मंगल को समझने की दिशा में एक नया अध्याय खोलती है. क्यूरियोसिटी जैसे रोवर हमें दिखा रहे हैं कि मंगल सिर्फ लाल रेगिस्तान नहीं है, बल्कि वहां भी रसायनों और खनिजों का अपना इतिहास है. वैज्ञानिक अब इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हैं कि शुद्ध सल्फर का ऐसा बड़ा भंडार वहां कैसे बना.