इंडोनेशिया के आचे प्रांत में स्थित पोंडोक बालिक गांव इन दिनों एक बड़े खतरे का सामना कर रहा है. यहां की जमीन धीरे-धीरे धंस रही है. एक विशाल गड्ढा (सिंकहोल) बन गया है, जो अब करीब 3 हेक्टेयर (लगभग 30,000 वर्ग मीटर) क्षेत्र में फैल चुका है. यह गड्ढा खेतों को निगल रहा है. गांव के घरों की ओर बढ़ रहा है. ड्रोन से ली गई तस्वीरों में यह नजारा बहुत डरावना लगता है.
नीचे देखिए Video...
क्या हुआ और क्यों हो रहा है यह भू-धंसाव?
यह समस्या कई सालों से चल रही है, लेकिन 2025 के अंत में आई भारी बारिश और बाढ़ के बाद यह बहुत तेज हो गई. विशेषज्ञों के अनुसार, कारण है जमीन के नीचे का सबसर्फेस इरोजन. इस इलाके की मिट्टी ज्वालामुखीय राख से बनी ढीली मिट्टी है, जो पानी से आसानी से बह जाती है.
पानी जमीन के अंदर घुसकर खोखला कर देता है. ऊपर की मिट्टी अचानक धंस जाती है. इंडोनेशिया में ज्वालामुखी बहुत हैं, इसलिए ऐसी मिट्टी वाले इलाके ज्यादा हैं. गड्ढे की गहराई करीब 100 मीटर तक बताई जा रही है. यह धीरे-धीरे फैल रहा है और अब मुख्य सड़क तक पहुंच गया है.
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किसानों और गांव वालों पर क्या असर?
इस गांव में करीब 800 लोग रहते हैं. गड्ढे का किनारा अब उनके घरों से सिर्फ 300-400 मीटर दूर है. कई किसानों के पूरे खेत इस गड्ढे में समा गए हैं. यहां मुख्य फसलें कॉफी और मिर्च हैं.
एक 40 साल की किसान सुमियाती जैसी कई लोग अपनी पूरी जमीन खो चुके हैं. वे चिंतित हैं कि अब परिवार का गुजारा कैसे होगा. किसान कहते हैं कि बिना बारिश के भी जमीन हिल रही है. उनकी आजीविका पर बड़ा संकट आ गया है.
सरकार क्या कर रही है?
सरकारी अधिकारी स्थिति पर नजर रख रहे हैं. उन्होंने खतरे वाली हाई-वोल्टेज बिजली लाइन को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है. मुख्य सड़क के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाया गया है.
अब ग्राउट इंजेक्शन (मिट्टी में विशेष सीमेंट डालकर मजबूत करना) और ढलान को मजबूत करने जैसे उपाय करने की योजना है. आचे ऊर्जा और खनिज संसाधन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है ताकि आगे नुकसान न हो.
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आगे क्या?
यह भू-धंसाव अभी भी सक्रिय है और कभी भी और फैल सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन से बारिश ज्यादा हो रही है, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं. गांव वालों को सुरक्षित रखने के लिए लंबे समय के उपाय जरूरी हैं. यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ या बदलता मौसम कितने बड़े खतरे ला सकता है.