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जापान के पास समंदर में मिला 'खोया शहर'... वैज्ञानिकों में छिड़ी बहस

जापान के योनागुनी द्वीप के पास 6-24 मीटर गहराई में सीढ़ीदार पत्थरों से बनी संरचना मिली है. जैसे प्राचीन शहर का खंडहर. कुछ लोग इसे 10000 साल पुरानी इंसानों द्वारा बनाई संरचना मानते हैं, लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि यह प्राकृतिक है – भूकंप, दरारें और समुद्री हलचल से बनी है. लेकिन ये अपने आप में रहस्यमयी है.

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ये है वो संरचना जिसको देखने समंदर के अंदर गोताखोर गया है. (Photo:Wiki Commons-Vincent Lou)
ये है वो संरचना जिसको देखने समंदर के अंदर गोताखोर गया है. (Photo:Wiki Commons-Vincent Lou)

जापान के योनागुनी द्वीप के पास समुद्र की नीली लहरों में एक रहस्य छिपा है. इसे योनागुनी स्मारक (Yonaguni Monument) कहते हैं. पानी की सतह से सिर्फ 6 मीटर (20 फीट) नीचे शुरू होकर 24 मीटर गहराई तक फैला यह संरचना देखने में बिल्कुल पुराने खंडहर वाली शहर जैसी लगती है – सीढ़ियां, टेरेस, चौकोर कोने और सपाट सतहें.

कई लोग इसे 'समुद्र में खोया अटलांटिस' या प्राचीन सभ्यता का अवशेष मानते हैं, जो समुद्र में डूब गया. लेकिन ज्यादातर वैज्ञानिक कहते हैं कि यह पूरी तरह प्राकृतिक है, इंसानों ने नहीं बनाया.

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कैसे मिला यह रहस्य?

1987 में एक डाइविंग इंस्ट्रक्टर किहाचिरो अरातके ने योनागुनी द्वीप के पास गोता लगाते समय इसे देखा. यह संरचना बहुत बड़ी है – लंबाई में 50 मीटर से ज्यादा, चौड़ाई 20-40 मीटर और ऊंचाई 25 मीटर तक. पत्थरों में सीढ़ियां, प्लेटफॉर्म और तेज कोने दिखते हैं, जो देखकर लगता है जैसे कोई पुरानी पिरामिड या महल हो.

Yonaguni Monument Japan

क्या यह इंसानों ने बनाया?

रयूक्यू यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक मासाकी किमुरा ने कई सालों तक अध्ययन किया. उनका दावा है कि यह इंसानों द्वारा बनाई गई संरचना है, जो लगभग 10000 साल पहले समुद्र के स्तर बढ़ने से डूब गई. वे कहते हैं कि इसमें ड्रेनेज सिस्टम, सड़कें, दीवारें और यहां तक कि चेहरे जैसी नक्काशी भी हैं. उनका मानना है कि यह 'जापानी अटलांटिस' हो सकता है.

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लेकिन ज्यादातर वैज्ञानिक क्या कहते हैं?

अधिकांश भूवैज्ञानिक जैसे बोस्टन यूनिवर्सिटी के रॉबर्ट शोच (जिन्होंने 1997 में खुद गोता लगाया), इसे प्राकृतिक बताते हैं. कारण...

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  • यह क्षेत्र भूकंप वाला है. यहां की चट्टानें (सैंडस्टोन और मडस्टोन) में पहले से ही सपाट परतें और दरारें होती हैं.
  • भूकंप से चट्टानें नियमित तरीके से टूटती हैं, जिससे चौकोर ब्लॉक और सीढ़ियां जैसी आकृति बन जाती है.
  • समुद्र की लहरें और धाराएं इन दरारों को और चौड़ा करती हैं, सतहों को चिकना बनाती हैं.
  • पास की जमीन पर भी ऐसी ही चट्टानें हैं, लेकिन हवा और बारिश से वे गोल-मटोल हो गई हैं. पानी में होने से वे तेज कोनों वाली बनी रहीं.
  • 2024 में क्यूशू यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिकों ने कहा कि कोई पुरातात्विक सबूत (जैसे इंसानी बर्तन, हड्डियां या औजार) नहीं मिले. वे कहते हैं कि चट्टानों से अलग होने, घिसने और गड्ढे बनने जैसी प्रक्रियाएं अभी भी चल रही हैं – यह सब प्राकृतिक इरोजन से हो रहा है.

Yonaguni Monument Japan

पृथ्वी प्राकृतिक रूप से ऐसी आकृतियां कैसे बनाती है?

पृथ्वी पर कई जगहों पर प्राकृतिक रूप से ज्यामितीय चट्टानें हैं...

  • आयरलैंड का जायंट्स कॉज़वे – छह कोनों वाले कॉलम.
  • ऑस्ट्रेलिया का टेसेलेटेड पेवमेंट – टाइल्स जैसा सपाट पत्थर.
  • सऊदी अरब का अल नासला रॉक – एकदम सीधी दरार.
  • नॉर्वे का पल्पिट रॉक – सपाट और सीधी चट्टान.

ये सब टेक्टॉनिक तनाव, दरारें और इरोजन से बने हैं. योनागुनी भी इसी तरह का है.

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योनागुनी स्मारक बड़ा रहस्य है, लेकिन वैज्ञानिक सबूत प्राकृतिक होने की ओर ज्यादा इशारा करते हैं. इंसानी सभ्यता का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला. यह दिखाता है कि पृथ्वी कितनी कमाल की चीजें समय और प्राकृतिक शक्तियों से बना सकती है – बिना इंसानों के हाथ के. डाइवर्स आज भी यहां गोता लगाते हैं. इसकी खूबसूरती का मजा लेते हैं. यह खोया शहर नहीं, बल्कि प्रकृति की अनोखी कृति है.

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