फ्रांस की राजधानी पेरिस में होने वाले यूरोप के सबसे बड़े कृषि प्रदर्शनी (International Agriculture Show या Salon International de l'Agriculture - SIA) में इस साल एक बड़ा बदलाव मिलेगा. पहली बार 1964 से चले आ रहे इस मेले में कोई गाय नहीं होगी.
आयोजकों ने मंगलवार को घोषणा की कि लम्पी स्किन डिजीज के प्रकोप के कारण गायों को शामिल नहीं किया जाएगा ताकि संक्रमण का खतरा न हो. यह मेला हर साल फरवरी में पोर्टे डे वर्साय में लगता है. करीब 6 लाख लोग आते हैं. इसमें आमतौर पर 500 से 600 गायें होती हैं, जो बच्चों और शहरवासियों के लिए मुख्य आकर्षण होती हैं.
यह भी पढ़ें: 9 साल में 44 सैटेलाइट, लेकिन 5 फेल्योर... डिफेंस से जुड़े प्रोजेक्ट्स में क्यों फंस रही इसरो की उड़ान
कई बच्चे पहली बार असली फार्म जानवर देखते हैं. SIA के चेयरमैन जेरोम डेस्पे ने कहा कि हमने कल रात फैसला लिया कि 2026 के अंतरराष्ट्रीय फार्म शो में कोई गाय नहीं होगी. यह ऐतिहासिक फैसला है, जिससे हम बहुत दुखी हैं. मेले में अन्य जानवर जैसे सूअर, भेड़, घोड़े, कुत्ते और बिल्लियां होंगी.
लम्पी स्किन डिजीज क्या है?
लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) एक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से गायों और भैंसों को प्रभावित करती है. यह काटने वाले कीड़ों (जैसे मच्छर या मक्खियां) से फैलती है. बीमारी से जानवरों को बुखार आता है. त्वचा पर दर्दनाक गांठें (लम्प्स) पड़ जाती हैं. वे कमजोर हो जाते हैं. दूध उत्पादन कम हो जाता है. यह बीमारी इंसानों में नहीं फैलती.

फ्रांस में जून 2025 से यह बीमारी फैली है. अब तक 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं. ज्यादातर आल्प्स क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में. फ्रांस सरकार ने बीमारी को कंट्रोल करने के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान चलाया है. कृषि मंत्रालय का कहना है कि बीमारी अब नियंत्रण में है.
लेकिन अगर एक भी गाय संक्रमित पाई जाती है, तो कानून के अनुसार पूरी झुंड (हर्ड) को मारना पड़ता है. इससे किसान बहुत नाराज हैं, क्योंकि वे इसे अनावश्यक और क्रूर मानते हैं.
किसानों की नाराजगी और विरोध
कई किसान बीमारी के फैलने का डर होने के बावजूद गायें लाने से मना कर रहे हैं, जबकि कुछ प्रभावित किसानों के साथ एकजुटता दिखाना चाहते हैं. पिछले हफ्ते पेरिस में किसानों ने ट्रैक्टरों से विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें सरकार की नीति की आलोचना की गई. मुख्य किसान यूनियन FNSEA सरकार की नीति का समर्थन करती है, लेकिन अन्य यूनियन इसे कठोर बताती हैं.
यह भी पढ़ें: IIT मद्रास ने तोप के गोलों में लगाया रैमजेट इंजन, रेंज बढ़ाकर दोगुना कर दिया
मेले के निदेशक अर्नॉड लेमोइन ने कहा कि हमें उम्मीद है कि विरोध मेले तक नहीं पहुंचेगा. मेले का मस्कट (प्रतीक) गाय है, जो इस साल अन्य जानवरों से बदला जाएगा.
There will be no cows at Europe's largest agricultural show in Paris this year for the first time ever after an outbreak of lumpy skin disease in France sparked fears of contamination, organisers said on Tuesday. https://t.co/UIMiWHzEdH https://t.co/UIMiWHzEdH
— Reuters Science News (@ReutersScience) January 13, 2026
यह फैसला फ्रांस के कृषि क्षेत्र में चल रहे तनाव को दिखाता है, जहां बीमारी के अलावा EU-Mercosur व्यापार समझौते जैसी अन्य समस्याएं भी हैं. मेले में हर साल बड़े नेता आते हैं. किसानों से मिलते हैं, लेकिन इस बार गायों की अनुपस्थिति से यह अलग दिखेगा.