scorecardresearch
 

Australia: तोतों और इंसानों में जंग... खाने की कमी से परेशान तोते खोल दे रहे बंद कचरे का डिब्बा

इंसान कचरे का डिब्बा बंद करते हैं. तोते उसे खोल देते हैं. डस्टबिन पर पड़ी भारी ईंट और पत्थर भी गिरा देते हैं. ताकि ढक्कन खोल कर डस्टबिन के अंदर फेंके गए कचरे से खाना खोज सकें. कचरा न फैले इसलिए ऑस्ट्रेलियाई लोग ढक्कन को भारी चीजों से दबाते हैं. ताकि उसे तोते खोल न सकें पर जंग जारी है...

X
ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों कचरे के डिब्बे को लेकर हो रही है इंसानों और सफेद तोतों में जंग. (फोटोः अन्स्प्लैश) ऑस्ट्रेलिया में इन दिनों कचरे के डिब्बे को लेकर हो रही है इंसानों और सफेद तोतों में जंग. (फोटोः अन्स्प्लैश)

ऑस्ट्रेलिया (Australia) में इंसानों और सफेद तोतों (Cockatoo) के बीच इन दिनों संघर्ष हो रहा है. ऐसा लगता है कि तोतों को खाना नहीं मिल रहा है. जिसकी वजह से उन्होंने ऐसा काम शुरू कर दिया है, जिससे इंसान परेशान है. इंसानों ने तोतों को उनके नए काम से रोकने के कई जुगत लगाए लेकिन विफल हो रहे हैं. तोतें स्मार्ट होते जा रहे हैं. या यूं कहें कि खाने की खोज में खुद को विकसित कर रहे हैं. 

Cockatoo Human Arm Race

ऑस्ट्रेलिया के जो तोते ये काम कर रहे हैं, वो दुनिया के खूबसूरत तोतों की श्रेणी में आते हैं. इन्हें सल्फर क्रस्टेड कोकाटू (Sulpher-Crested Cockatoos) कहते हैं. इस समय इनकी प्रजाति इंसानों की प्रजाति से खाने के लिए संघर्ष कर रही है. सफेद रंग के ये पक्षी इंसान की बांह जितने लंबे हो सकते हैं. फिलहाल हम इन तोतों के जिस काम की बात कर रहे हैं. उस पर वैज्ञानिक परेशान हैं. हैरान है और रिसर्च कर रहे हैं. 

कहानी ऐसी है कि सिडनी (Sydney) में लोगों ने सफेद तोतों को डस्टबिन का ढक्कन खोलकर खाना खाते और कचरा फैलाते देखा. बात सोशल मीडिया पर उठी तो वन्य जीव एक्सपर्ट तक पहुंची. एक्सपर्ट्स ने स्टडी करने की तैयारी की. और स्टडी कर भी डाली. कचरा फैलने की वजह से इंसान परेशान और खाना न मिलने की वजह तोते. अगर आप सिडनी के भौगोलिक स्थिति को देखें तो वह जंगल, तट और क्लिफ से घिरा हुआ है. यह स्टडी हाल ही में Current Biology जर्नल में प्रकाशित हुई है. 

Cockatoo Human Arm Race

नकली उल्लू से भी डरे नहीं सफेद तोते

सिडनी में तोते का यह संघर्ष सबसे ज्यादा स्टैनवेल पार्क में देखने को मिला. इस कस्बे में एक रेस्टोरेंट की मैनेजर एना क्यूलिक ने कहा कि अगर आप डस्टबिन को सही से बंद नहीं करते हैं, तो तोते कचरा बाहर फेंक देते हैं. क्योंकि ये तोते यहां पर बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद हैं. इनकी वजह से कचरा फैलता रहता है. मेरे परिवार ने इन्हें डराने के लिए उल्लू का स्टैच्यू लगाया लेकिन ये डरे नहीं. 

यहां देखिए कैसे तोते खोल रहे हैं डस्टबिन

ईंट-पत्थर को खिसका कर खोलते हैं ढक्कन

एना क्यूलिक ने कहा कि हमने डस्टबिन पर भारी ईंट और पत्थर भी रखे. लेकिन तोते उन्हें खिसका कर गिरा देते हैं. उसके बाद उसका ढक्कन उठाकर खोल देते हैं. अब डस्टबिन में ताला लगाने की नौबत आ गई है. ये तोते लगातार विकसित हो रहे हैं. खुद को स्मार्ट बना रहे हैं. हमें तो लगता है कि अगले पांच-दस साल में ये भी पता कर लेंगे कि ताला कैसे खोला जाए. कुछ लोगों ने डस्टबिन पर इलास्टिक धागे से ढक्कन को बांधा. पर इन तोतों ने उस धागे को भी काट दिया. या ढीला करके खोल दिया. फिर से ढक्कन खोलकर कचरे से खाना खोजना शुरू कर दिया. 

Cockatoo Human Arm Race

दो प्रजातियों के बीच चल रहा है युद्ध

वैज्ञानिकों की स्टडी में यह बात सामने आई है कि सल्फर क्रस्टेड कोकाटू (Sulpher-Crested Cockatoos) इंसानों की हरकतों से सीख रहे हैं. वो इन सीखी हुई हरकतों को अपनी कार्यशैली में बदल रहे हैं. इस स्टडी को लीड कर रही है बारबरा क्लंप. बारबरा जर्मनी स्थित मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट की बिहेवरियल साइंटिस्ट हैं. बारबरा ने बताया कि पहली बार जब हमने सफेद तोतों की इस हरकत को देखा तो हैरान रह गए. वो डस्टबिन को खोलना सीख गए हैं. ये वाकई में दिमाग हिला देने वाली घटना थी. इंसान लगातार कचरा न फैले इसके लिए डस्टबिन को बंद रखने का प्रयास कर रहा है. वहीं तोते लगातार इंसानी प्रयोगों को विफल करते जा रहे हैं. यहां पर दो प्रजातियां सफाई और खाने के लिए संघर्ष कर रही हैं.  

Cockatoo Human Arm Race

अब लोग बुलाने लगे हैं इन्हें 'आसमानी चूहा'

बारबरा और उनकी टीम ने 3283 डस्टबिन की स्टडी की. उन्होंने देखा कि सफेद तोते नकली सांप, उल्लू, ईंट या पत्थर जैसी चीजों से डर नहीं रहे हैं. वो उन्हें हटा देते हैं. हालांकि वो अभी तक ताले नहीं खोल पाए हैं. डस्टबिन के ढक्कन को किसी चीज से फंसा दिया गया हो. या फिर बहुत वजनी कोई चीज़ रख दी गई हो. अब लोग इन्हें 'आसमानी चूहा' बुलाने लगे हैं. लेकिन इनकी इस हरकत की वजह कहीं न कहीं इंसान ही हैं. 

हर कोई नफरत नहीं करता, कुछ प्यार भी करते हैं

बारबरा कहती हैं कि कूड़े के डिब्बे को लेकर इंसानों और तोतों के बीच चल रहा ये संघर्ष सिर्फ एक चीज से कम हो सकता है. वो ये है कि अगर तोतों को खाना सही से मिलने लगे तो उन्हें शायद ये काम न करना पड़े. क्योंकि तोते लगातार स्मार्ट होते जा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि सारे इंसान इन तोतों से परेशान हैं. कुछ लोग इनसे प्यार भी करते हैं. लोग कहते हैं कि अगर इन्हें हम खाना खिलाते रहे तो दिक्कत होगी ही नहीं. क्योंकि इन आसमानी चूहों को इंसानों का खाना पसंद आ रहा है. इसमें कोई बुराई नहीं है. ये शोर मचाते हैं लेकिन प्यारे भी तो लगते हैं. (सभी फोटोः बारबरा क्लंप/करंट बायोलॉजी)

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें