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Maa Durga Aarti: नवरात्र में पढ़ें मां दुर्गा की ये चमत्कारी आरती, सभी दुख होंगे दूर

Maa Durga Aarti: नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की आरती का विशेष महत्व माना जाता है. 'जय अम्बे गौरी' आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और मां की कृपा बनी रहती है. यहां पढ़ें संपूर्ण आरती.

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मां दुर्गा की आरती करने से जातक पर उनकी कृपा बनी रहती है (Photo: ITG)
मां दुर्गा की आरती करने से जातक पर उनकी कृपा बनी रहती है (Photo: ITG)

Maa Durga Aarti: चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान भक्त मां दुर्गा के सभी 9 रूपों की उपासना करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं. वहीं, नवरात्र में जिस तरह से मां दुर्गा की चालीसा का विशेष महत्व होता है, उसी तरह मां दुर्गा की आरती भी बहुत ही महत्वपूर्ण कहलाती है. माना जाता है कि पूरे नवरात्र आरती करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. ऐसे में मां दुर्गा की आरती गाकर भक्त अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त करते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. आइए पढ़ते हैं मां दुर्गा की विशेष और अद्भुत आरती. 

मां दुर्गा की आरती (Durga Aarti in Hindi)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत
मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।| जय अम्बे गौरी ॥

माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को |मैया टीको मृगमद को
उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको|| जय अम्बे गौरी ॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे| मैया रक्ताम्बर साजे
रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे|| जय अम्बे गौरी ॥

केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी| मैया खड्ग कृपाण धारी
सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती| मैया नासाग्रे मोती
कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति|| जय अम्बे गौरी ॥

शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती| मैया महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती|| जय अम्बे गौरी ॥

चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे| मैया शोणित बीज हरे
मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे|| जय अम्बे गौरी ॥

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ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी| मैया तुम कमला रानी
आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी|| जय अम्बे गौरी ॥

चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों| मैया नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू|| जय अम्बे गौरी ॥

तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता| मैया तुम ही हो भर्ता
भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता|| जय अम्बे गौरी ॥

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी| मैया वर मुद्रा धारी
मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी|| जय अम्बे गौरी ॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती| मैया अगर कपूर बाती
माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती|| बोलो जय अम्बे गौरी ॥

माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे| मैया जो कोई नर गावे
कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे|| जय अम्बे गौरी ॥

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