श्रावण मास में पड़ने वाली शिवरात्रि को भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि सावन की शिवरात्रि मनुष्य के सभी पाप को नष्ट कर देती है. ऐसे में सावन की शिवरात्रि का बड़ा ही महत्व है क्योंकि इसमें व्रत रखने वालों के पाप का नाश होता है. कुवारें लोगों को मनचाहा वर या वधु का वरदान मिलता है और दांपत्य जीवन में प्रेम की प्रगाढ़ता बढ़ती है.
श्रावण शिवरात्रि में कैसे करें पूजन-
- सावन की शिवरात्रि में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है और उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है
- इस बार 30 जुलाई 2019 दिन मंगलवार को दोपहर 2:50 से भद्रा का आरंभ होने के बाद और यह भद्रा लगभग रात्रि में 1:26 तक रहेगी.
- शास्त्रों के अनुसार भद्रा में कोई भी शुभ कार्य करना शुभ नही माना जाता है
- लेकिन भगवान शिव की पूजा में प्रदोष काल का बहुत महत्व है
- इसी कारण सूर्यास्त से 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद तक भगवान शिव को जल अर्पण किया जा सकता है
सुखी दांपत्य जीवन का वरदान मिलेगा
- यदि जन्म कुंडली के सातवें भाव में पापी ग्रह सूर्य मंगल शनि हो तो दांपत्य जीवन में खटास आती है
- सप्तम भाव पर भी अधिक पापी ग्रहों की दृष्टि हो और सप्तम भाव का स्वामी अस्त हो तो भी दांपत्य जीवन में खटास रहती है
- पति पत्नी दोनों मिलकर पूरे श्रावण मास दूध दही घी शहद और शक्कर अर्थात पंचामृत से भगवान शिव शंकर का अभिषेक करें
- ॐ पार्वती पतये नमः मंत्र का रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप करें
- भगवान शिव के मंदिर में शाम के समय गाय के घी का दिया संयुक्त रूप से ही जलाएं
बीमारियों से छुटकारा-
- सुबह के समय जल्दी उठे अपने स्नान के जल में दो बूंद गंगाजल डालकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहने
- एक पूजा की थाली में रोली मोली चावल धूप दीप सफेद चंदन सफेद जनेऊ कलावा पीला फल सफेद मिष्ठान्न गंगा जल तथा पंचामृत आदि रखें
- यदि संभव हो तो अपने घर से नंगे पैर भगवान शिव के मंदिर के लिए निकले और विधि विधान से शिव परिवार की पूजा-अर्चना करें
- गाय के घी का दीया और धूपबत्ती जलायें वही आसन पर बैठकर शिव चालीसा का पाठ करें और शिवाष्टक भी पढ़ें
- अपने घर वापस आते समय भगवान शिव से प्रार्थना करें और अपने मन की इच्छा कहें
भगवान शिव को प्रसन्न करने के महाउपाय
- शिव चालीसा का पाठ कैसे किया जाये ताकि नौकरी व्यापार की समस्या हो जाए खत्म
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने
- अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और साफ आसन पर बैठे हैं
- पूजा में धूप दीप सफेद चंदन माला और सफेद आक के 5 फूल भी रखे और मिश्री को प्रसाद के लिए रखें
- पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलायें और एक लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें
- भगवान शिव की शिवचालिसा का तीन बार पाठ करें
- शिव चालीसा का पाठ बोल बोलकर करें जितने लोगों को यह सुनाई देगा उनको भी लाभ होगा
-शिव चालीसा का पाठ पूर्ण भक्ति भाव से करें और भगवान शिव को प्रसन्न करें
- पाठ पूरा हो जाने पर लोटे का जल सारे घर मे छिड़क दें
और थोड़ा सा जल स्वयं पी लें और मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं और बच्चों में भी बाट दें.