कानपुर में हुए लैम्बॉर्गिनी कांड के बाद से ये लग्जरी कार चर्चा में है. इस मामले में लगातार कई तरह के ट्विस्ट और टर्न सामने आ रहे हैं और इसकी वजह से कार के फीचर्स, इसकी रफ्तार, एफिशिएंसी भी चर्चा का विषय बन रही है. इसी बीच नजर गई कार के लोगो पर जो अपनी खास बनावट और डिजाइन की वजह से ध्यान खींचता है.
लैम्बॉर्गिनी कार ही नहीं इसका लोगो भी खास है. क्योंकि इसके लोगों में एक शील्ड पर गरजता हुआ आक्रामक Bull नजर आता है. इसे देखकर एक दिलचस्प सवाल उठता है, क्या लैम्बॉर्गिनी के लोगो में दिखने वाला गरजता हुआ Bull किसी तरह भगवान शिव के नंदी से जुड़ता है? हालांकि इस इटालवी कार ब्रांड के इतिहास को देखें तो इसका सीधा जवाब ‘नहीं’ में हो सकता है, लेकिन प्रतीकों की दुनिया में इसीलिए अनोखी है, क्योंकि हर सिंबल कुछ कहता है और यहीं से कहानी थोड़ी गहरी और रोचक हो जाती है.
लैम्बॉर्गिनी के फाउंडर का वृषभ कनेक्शन
बात शुरू करते हैं लैम्बॉर्गिनी के संस्थापक से. इस कार ब्रांड के फाउंडर फेरुशियो लैम्बॉर्गिनी थे. सोर्स बताते हैं कि इनका जन्म 28 अप्रैल 1916 को हुआ था. एस्ट्रोलॉजी के अनुसार उनकी राशि वृषभ यानी टॉरस थी. ऑटोमोबाइल इतिहास से जुड़े कई जाने-माने सोर्स जैसे टॉप गियर, मोटरट्रेंड और कार एंड ड्राइवर में ये दिलचस्प फैक्ट दर्ज है कि उनकी राशि का असर कंपनी के लोगो पर पड़ा.
कंपनी के ब्रांड इतिहास में भी यह माना गया है कि Bull शक्ति, आक्रामकता और परफॉर्मेंस का प्रतीक है. वही गुण जिन्हें फेरुशियो अपनी कारों में उतारना चाहते थे, लेकिन सिर्फ राशि ही कारण नहीं थी. 1962 में फेरुशियो स्पेन गए और मशहूर बुलफाइट ब्रीडर डॉन एडुआर्डो मियुरा से मिले. उस मुलाकात का उन पर गहरा असर हुआ. बाद में उन्होंने अपनी कई कारों के नाम मशहूर फाइटिंग बुल्स पर रखे. मियुरा, इसलेरो, मर्सियलागो, एवेंटाडोर और हुराकान जैसे नाम उसी परंपरा से आए. यानी बुल सिर्फ ज्योतिष नहीं, बल्कि पर्सनल पैशन और पावर सिंबोलिज्म का भी हिस्सा रहा.

सनातन परंपरा में क्या है नंदी का महत्व
अब जरा भारत की आध्यात्मिक परंपरा की ओर देखें. भगवान शिव का वाहन है नंदी. हर शिव मंदिर में नंदी शांत भाव से शिवलिंग की ओर निहारते दिखाई देते हैं. वह सिर्फ एक बैल नहीं, बल्कि भक्ति, धैर्य, स्थिरता और संयमित शक्ति का प्रतीक हैं. शास्त्रों -पुराणों में शिव को वृषभध्वज कहा गया है, यानी जिनके ध्वज पर वृषभ अंकित हो. पुराणों में धर्म को चार पैरों वाले वृषभ के रूप में दिखाया गया है. इस नजरिए से वृषभ सिर्फ पशु नहीं, बल्कि संतुलन और नैतिक शक्ति का प्रतीक है.
यहीं एक रोचक समानता उभरती है. लैम्बॉर्गिनी का Bull उग्र, आक्रामक और गतिशील ऊर्जा का प्रतीक है. वह चार्ज करता हुआ दिखाई देता है, जैसे किसी भी चुनौती को तोड़ देगा. वहीं नंदी स्थिर हैं, शांत हैं, लेकिन भीतर से उतने ही शक्तिशाली. एक मैकेनिकल पावर का प्रतीक है, दूसरा स्पिरिचुअल पावर का. एक सड़क पर तीन सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है, दूसरा मंदिर में अडिग बैठा रहता है, लेकिन दोनों के केंद्र में ‘शक्ति’ ही है.
Bull की आक्रामक छवि से जुड़ा कंपनी का लोगो
लैम्बॉर्गिनी का इंजन जब गरजता है, तो उसकी आवाज किसी जानवर की दहाड़ जैसी लगती है. रफ्तार लवर्स के लिए यह कार सड़क पर नहीं दौड़ती, बल्कि हमला करती है. इस उग्रता में कुछ लोगों को शिव के तांडव की ऊर्जा का भाव दिखता है, एक ऐसी शक्ति जो सृजन और संहार दोनों का प्रतीक है. हालांकि यह तुलना पूरी तरह प्रतीकात्मक है, क्योंकि कंपनी ने कभी भी शिव या सनातन धर्म से जुड़ाव का दावा नहीं किया. उनका लोगो मुख्य रूप से फाउंडर की राशि, बुलफाइटिंग के प्रति आकर्षण और शक्ति के वैश्विक प्रतीक के रूप में Bull की छवि से जुड़ा है.
फिर भी, संस्कृति की खूबसूरती यही है कि वह अर्थों को जोड़ देती है. महाशिवरात्रि के समय जब नंदी की पूजा हो रही हो और सोशल मीडिया पर किसी लैम्बॉर्गिनी का वीडियो ट्रेंड कर रहा हो, तो दोनों की तस्वीरें मन में साथ-साथ उभरती हैं।. एक में डिवोशन है, दूसरे में डॉमिनेशन. एक भीतर की यात्रा है, दूसरा बाहर की चमक. एक हमें संयम सिखाता है, दूसरा नियंत्रण के साथ ताकत दिखाता है.
Bull चाहे इतालवी सुपरकार के लोगो में हो या शिव मंदिर के आंगन में, वह हमेशा शक्ति का प्रतीक रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि एक शक्ति को स्पीड में बदल देता है, और दूसरा शक्ति को साइलेंस में. शायद यही संतुलन हमें याद दिलाता है कि असली ताकत सिर्फ तेज दौड़ने में नहीं, बल्कि अपने भीतर की ऊर्जा को साध लेने में है.